Bihar Election 2025: दुलारचंद यादव मर्डर केस उलझा! गोली से नहीं हुई मौत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
Bihar Dularchand Yadav Murder: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के माहौल के बीच मोकामा में हुई दुलारचंद यादव की हत्या ने पूरे राज्य में सियासी और सामाजिक हलचल मचा दी है। जहां एक ओर इस वारदात को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है, वहीं अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मामला नया मोड़ लेता दिख रहा है।
डॉक्टरों की टीम ने स्पष्ट किया है कि दुलारचंद यादव की मौत गोली लगने से नहीं हुई, बल्कि कुछ और कारणों से उनकी जान गई है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बदली जांच की दिशा
मोकामा में हुई इस हत्या के बाद तीन डॉक्टरों की टीम ने दुलारचंद यादव का पोस्टमार्टम किया। इस टीम में डॉ. अजय कुमार भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि दुलारचंद के पैर में एंकल जॉइंट के पास गोली लगी थी, जो पैर को आर-पार कर गई। डॉक्टरों के अनुसार, इस तरह की चोट से मौत होना संभव नहीं है।
डॉ. अजय कुमार ने कहा, "गोली पैर के नीचे के हिस्से से होकर निकल गई थी। यह ऐसा घाव नहीं था जो व्यक्ति की जान ले सके। इसके अलावा, शरीर पर और भी कई घाव थे, जो देखने में छिलने जैसे लग रहे थे।"
डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम से पहले मृत शरीर का एक्स-रे भी कराया। एक्स-रे रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई कि शरीर के किसी महत्वपूर्ण अंग को नुकसान नहीं हुआ था। इससे यह संभावना और मजबूत हो गई कि दुलारचंद यादव की मौत गोली लगने से नहीं हुई। अब पोस्टमार्टम टीम सभी सबूतों, घावों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही है।
बड़ा सवाल - फिर कैसे हुई मौत?
डॉक्टरों के इस बयान के बाद मामले की दिशा पूरी तरह बदल सकती है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर दुलारचंद यादव की मौत गोली से नहीं हुई, तो असल वजह क्या थी? क्या उन्हें पीटा गया था? क्या किसी आंतरिक चोट से उनकी जान गई? या फिर किसी और कारण से मौत हुई? फिलहाल, पुलिस मेडिकल टीम की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है और हत्या की जांच नए सिरे से शुरू कर दी गई है।
तनावग्रस्त है मोकामा इलाका
गौरतलब है कि गुरुवार को मोकामा में चुनाव प्रचार के दौरान दो गुटों के बीच भिड़ंत हुई थी। इस झड़प में गोलीबारी और पत्थरबाजी हुई, जिसके बाद दुलारचंद यादव की मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया था। पुलिस ने तुरंत भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया ताकि हालात नियंत्रण में रहें।
दुलारचंद यादव की मौत ने सिर्फ स्थानीय लोगों को नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों को भी सक्रिय कर दिया है। कुछ नेताओं ने इस घटना को चुनावी हिंसा करार दिया है, तो वहीं कुछ ने पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं। अब जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से "गोली से मौत" की बात संदिग्ध हो गई है, पुलिस और प्रशासन दोनों के लिए जांच की चुनौती और बढ़ गई है।












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