Bihar: RJD से निकाले जाने के बाद पहली बार 'अगल-बगल' दिखेंगे तेजप्रताप और तेजस्वी, क्या कम होगी भाइयों की दूरी?
Bihar Chunav 2025 (Tej Pratap Yadav): बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में सोमवार (21 जुलाई) को एक दिलचस्प सियासी दृश्य देखने को मिलेगा। लालू प्रसाद यादव के दोनों बेटे -तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव -एक बार फिर आमने-सामने, अगल-बगल बैठे नजर आएंगे। यह दृश्य इसलिए खास होगा क्योंकि तेजप्रताप को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और परिवार दोनों से निकाले जाने के बाद यह पहली बार है जब दोनों भाई सार्वजनिक रूप से एक साथ नजर आएंगे।
यह पहला मौका होगा जब तेज प्रताप यादव को RJD से निकाले जाने और परिवार से बेदखल किए जाने के बाद दोनों भाई सार्वजनिक रूप से साथ दिखाई देंगे। इससे पहले दोनों भाई 3 मई को पटना के मिलर हाई स्कूल में आयोजित 'अति पिछड़ा जागरूकता सम्मेलन' के मंच पर साथ नजर आए थे, जिसे RJD ने आयोजित किया था। मगर उस वक्त परिवार के अंदरूनी हालात इतने उथल-पुथल भरे नहीं थे, जितने अब हैं।

विधानसभा में सीटों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं, सियासी गलियारों में हलचल
विधानसभा सचिवालय के मुताबिक, दोनों की सीटिंग पोजिशन में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बिहार विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी आधिकारिक सीटिंग चार्ट के मुताबिक दोनों यादव भाइयों की बैठने की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव 283 नंबर सीट पर बैठेंगे, जबकि तेजप्रताप यादव ठीक उनके बगल वाली 284 नंबर सीट पर। नंबर 282 खाली है, जबकि सीट नंबर 281 पर भूदेव चौधरी को बैठने की जगह दी गई है। दिलचस्प बात यह है कि तेजप्रताप के सामने डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और तेजस्वी के सामने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सीट है।
RJD से निकाले गए तेजप्रताप, लेकिन विधानसभा में अभी भी पार्टी विधायक
24 मई को तेजप्रताप की अनुष्का यादव के साथ तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि वे 12 साल से रिलेशनशिप में हैं। इसके ठीक 24 घंटे बाद लालू यादव ने तेजप्रताप को न सिर्फ पार्टी से बाहर निकाल दिया, बल्कि घर से भी बेदखल कर दिया। हालांकि, विधानसभा सचिवालय के सूत्रों के मुताबिक RJD ने तेजप्रताप को लेकर अब तक कोई आधिकारिक चिट्ठी नहीं भेजी है, जिससे उनकी विधायकी खत्म हो या सीट बदली जाए। ऐसे में दस्तावेजों में तेजप्रताप अभी भी RJD के विधायक ही बने हुए हैं।
तेजप्रताप की नई पारी -पोस्टर बदला, एजेंडा नया
पार्टी और परिवार से बाहर किए जाने के बाद तेजप्रताप ने अपनी गाड़ी से RJD का झंडा और प्रतीक हटा दिया है। उनकी गाड़ी पर अब 'टीम तेजप्रताप' का नया पोस्टर दिखाई देता है। उन्होंने हसनपुर और महुआ जैसे क्षेत्रों का दौरा भी शुरू कर दिया है, जहां वे लोगों से संवाद कर रहे हैं। चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा, "जनता चाहती है तो लड़ूंगा।"
राबड़ी देवी ने रोका तेजप्रताप का प्रेस कॉन्फ्रेंस वाला 'बड़ा धमाका'
18 जुलाई को तेजप्रताप यादव ने अचानक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर "बड़ा ऐलान" करने की बात कही थी। लेकिन दो घंटे इंतजार करवाने के बाद वह बिना कुछ कहे लौट गए। सूत्रों के मुताबिक, यह फैसला उन्होंने मां राबड़ी देवी की समझाइश के बाद लिया। राबड़ी ने समझाया कि किसी नई पार्टी का ऐलान या परिवार पर सार्वजनिक टिप्पणी से नुकसान हो सकता है। लालू यादव की ओर से भी यही संदेश भेजा गया था।
एक मीडिया इंटरव्यू में तेजप्रताप ने कहा, "मां राबड़ी देवी ही अब बातचीत करती हैं। वो हालचाल लेती रहती हैं, आम वगैरह भिजवाती हैं। लेकिन अब पापा (लालू यादव) से कोई संवाद नहीं होता।" उन्होंने साफ कहा कि रिश्तों में जो दूरियां आई हैं, वो अब भी बनी हुई हैं।
अनुष्का यादव से मुलाकात -सात घंटे साथ
30 जून की सुबह तेजप्रताप यादव अनुष्का यादव के घर पहुंचे और करीब 7 घंटे वहां रुके। बाहर निकलकर उन्होंने कहा, "अनुष्का से मेरा पारिवारिक रिश्ता है। मिलने-जुलने आता रहता हूं।" यह वही अनुष्का हैं, जिनके साथ वायरल हुई तस्वीर के बाद सियासी भूचाल आया था।
बिहार की राजनीति में जहां चुनावी शोर तेज हो रहा है, वहीं लालू परिवार के भीतर की सियासी पटकथा और भी दिलचस्प होती जा रही है। तेजप्रताप और तेजस्वी की अगल-बगल की सीटें अब सिर्फ विधानसभा की व्यवस्था नहीं, बल्कि एक सियासी संदेश भी हो सकती हैं। क्या दोनों भाइयों के बीच की दूरी मिट रही है या ये सिर्फ मंच की मजबूरी है? आने वाले दिनों में इसका जवाब शायद खुद 'वक्त' देगा।












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