Bihar Election 2025: नीतीश या तेजस्वी? बिहार में किसकी बनेगी सरकार? सट्टा बाजार ने बताया
Bihar Election 2025 Satta Bazaar: बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में, बल्कि सट्टा बाजार में भी हलचल बढ़ गई है। राजस्थान के मशहूर फलोदी सट्टा बाजार में इस वक्त बिहार के सियासी समीकरणों पर खूब दांव लग रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि फिलहाल यहां NDA की हवा तेज है और नीतीश कुमार का भाव सबसे ज्यादा स्थिर बताया जा रहा है।
NDA पर दांव लगाने वालों की भीड़, डबल रिटर्न का चांस
सट्टा बाजार के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति NDA की जीत पर ₹1000 का दांव लगाता है, तो रिटर्न में उसे ₹2000 तक मिल सकता है। यानी सटोरियों के हिसाब से NDA का खेल 'डबल धमाल' वाला है। इसका मतलब साफ है बिहार में जनता के साथ-साथ सटोरिए भी NDA को ही सबसे आगे देख रहे हैं।

कितनी सीटें जीत सकता है NDA?
सट्टा बाजार में फिलहाल NDA के लिए 128 से 132 सीटों तक के अनुमान लगाए जा रहे हैं। कुछ सूत्रों का कहना है कि ये आंकड़ा 135 से 138 सीटों तक भी जा सकता है। वहीं महागठबंधन का ग्राफ लगातार गिरता दिख रहा है। सटोरिए अब इसे 97 से 100 सीटों के बीच सीमित मान रहे हैं।
सीएम चेहरा: सट्टा बाजार में नीतीश सबसे 'हॉट फेवरेट'
मुख्यमंत्री पद को लेकर भी सट्टा बाजार में तस्वीर साफ है। नीतीश कुमार के भाव 40 से 45 पैसे के बीच टिके हुए हैं, जो यह दिखाता है कि सटोरियों की नजर में वे अब भी सबसे मजबूत उम्मीदवार हैं। NDA में किसी अन्य चेहरे के उभरने के संकेत फिलहाल नहीं हैं।
महागठबंधन पर छाए बादल, कांग्रेस को नहीं मिल रहा भरोसा
कांग्रेस समर्थित महागठबंधन के लिए सट्टा बाजार के भाव कुछ खास अच्छे नहीं हैं। चर्चाओं के मुताबिक, गठबंधन 93 से 96 सीटों तक सिमट सकता है। प्रचार अभियान भले ही तेज हो, लेकिन सटोरियों का विश्वास अभी तक उस पर लौटता नजर नहीं आ रहा।
6 और 11 नवंबर को होगा फैसला, भावों में फिर हो सकता है उलटफेर
बिहार में मतदान 6 और 11 नवंबर को होना है। जैसे-जैसे चुनावी रफ्तार बढ़ेगी, वैसे-वैसे सीटों और नेताओं के भावों में भी फेरबदल संभव है। सटोरिए मानते हैं कि आने वाले दिनों में व्यक्तिगत सीटों के भाव भी तय किए जा सकते हैं।
सट्टा बाजार का मूड फिलहाल साफ है। बिहार की सत्ता की रेस में NDA आगे है और नीतीश कुमार की कुर्सी सबसे मजबूत दिखाई दे रही है। हालांकि, चुनावी राजनीति में कुछ भी संभव है, और 11 नवंबर के नतीजे ही तय करेंगे कि सट्टा बाजार के 'भाव' सही थे या जनता ने कोई नया समीकरण रच दिया।












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