Prashant kishor: प्रशांत किशोर खुद कितने पढ़े लिखे हैं? कौन सी है डिग्री? एजुकेशन को लेकर क्यों मचता है बवाल?
Prashant kishor Education: बिहार की राजनीति में इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा में अगर कोई नाम है तो वह है प्रशांत किशोर यानी PK। कभी चुनावी रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर आज जनसुराज पार्टी के संस्थापक और चेहरे बन चुके हैं। लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर उनकी राजनीतिक रणनीति से ज्यादा उनकी पढ़ाई-लिखाई पर सवाल उठ रहे हैं।
अक्सर प्रशांत किशोर दूसरों RJD नेता तेजस्वी यादव समेत अन्य नेताओं की पढ़ाई और डिग्री पर तंज कसते हैं, लेकिन जब बात उनकी खुद की डिग्री पर आती है तो वह चुप्पी साध लेते हैं। यही वजह है कि उनकी शैक्षणिक योग्यता हमेशा विवादों में बनी रहती है। ऐसे में आइए जानें प्रशांत किशोर खुद कितने पढ़े लिखे हैं।

प्रशांत किशोर की पढ़ाई कहां तक हुई? (Prashant kishor Education qualification)
प्रशांत किशोर मूल रूप से बिहार के रोहतास जिले के रहने वाले हैं। प्रशांत किशोर का परिवार लंबे समय से शिक्षा और सेवा से जुड़ा रहा है। उनके पिता श्रीकांत पांडे डॉक्टर थे और उनकी पत्नी जाह्नवी दास भी पेशे से डॉक्टर हैं। PK की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई बिहार में ही हुई। उन्होंने स्कूली शिक्षा यहीं पूरी की और फिर पटना साइंस कॉलेज में दाखिला लिया। हालांकि, तबीयत खराब रहने की वजह से उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। माना जाता है कि उन्होंने पटना के मशहूर साइंस कॉलेज से इंटरमीडिएट तक पढ़ाई की थी।
इसके बाद प्रशांत किशोर लखनऊ चले गए और वहीं से अपनी ग्रेजुएशन पूरी की। दिलचस्प बात यह है कि उनकी पढ़ाई का सिलसिला लगातार बाधित होता रहा। द लल्लनटॉप को दिए एक इंटरव्यू में PK ने खुद बताया था कि बारहवीं के बाद उन्होंने तीन साल का ब्रेक लिया था, और ग्रेजुएशन के बाद भी दो साल तक पढ़ाई से दूरी बनानी पड़ी।
प्रशांत किशोर ने यह भी कहा था कि वह आईआईटी की तैयारी से बचने के लिए दिल्ली आ गए थे। आगे चलकर उन्होंने हैदराबाद में संयुक्त राष्ट्र (UN) के साथ काम किया। इसी दौरान उनकी मुलाकात जाह्नवी दास से हुई, जिनसे बाद में उन्होंने शादी की। हालांकि एक इंटरव्यू में उन्होंने ये भी दावा किया कि वे पटना साइंस कॉलेज के टॉपर थे।
कई जगह यह दावा किया जाता है कि उन्होंने हैदराबाद से पब्लिक हेल्थ में पढ़ाई की है और बाद में अमेरिका की किसी यूनिवर्सिटी से भी ट्रेनिंग या कोर्स किया है।
लेकिन उनकी डिग्री को लेकर ठोस और साफ जानकारी सार्वजनिक रूप से कभी सामने नहीं आई। न ही PK ने खुद किसी मंच से यह स्पष्ट किया है कि उनके पास कौन-कौन सी डिग्रियां हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर आए दिन यह मुद्दा छिड़ जाता है। हालांकि चुनावी हलफनामे में उन्हें अपनी डिग्री का खुलासा करना पड़ेगा।
प्रशांत किशोर के शिक्षा पर विवाद क्यों खड़ा होता है?
विवाद की असली वजह है PK का रवैया। वह अक्सर नेताओं पर सवाल उठाते हैं कि पढ़ाई-लिखाई के बिना राजनीति करने का क्या मतलब है। खासकर, तेजस्वी यादव पर PK कई बार यह कह चुके हैं कि "जो खुद ठीक से पढ़ाई पूरी नहीं कर पाया, वह बिहार का भविष्य कैसे तय करेगा?"।
लेकिन जब उनसे उनकी खुद की डिग्री के बारे में पूछा जाता है, तो वह इस पर ज्यादा खुलकर नहीं बोलते। यही दोहरा रवैया विरोधियों और सोशल मीडिया यूजर्स को हमला करने का मौका दे देता है।
हाल के दिनों में ट्विटर (अब X) और फेसबुक पर कई यूजर्स ने PK की डिग्री पर पोस्ट किए हैं। कुछ लोग लिखते हैं कि PK दूसरों को ज्ञान तो देते हैं, लेकिन खुद अपनी पढ़ाई के बारे में पारदर्शिता नहीं दिखाते। वहीं उनके समर्थक कहते हैं कि PK का काम ही उनकी असली डिग्री है-उन्होंने जिन चुनावों की रणनीति बनाई, वहां बड़े-बड़े नेताओं को जीत दिलाई। ऐसे में उनकी शैक्षणिक योग्यता से ज्यादा मायने उनकी रणनीतिक समझ रखती है।
प्रशांत किशोर की छवि और जनता की उम्मीदें
चाहे विवाद कितना भी हो, इसमें कोई शक नहीं कि प्रशांत किशोर ने खुद को बिहार की राजनीति में एक गंभीर विकल्प के रूप में स्थापित कर लिया है। उनकी पार्टी जनसुराज जनता से जुड़े मुद्दों को उठाकर राजनीतिक जमीन बनाने में जुटी है। लेकिन PK की डिग्री से जुड़ा विवाद उनके विरोधियों के लिए हथियार बना हुआ है। चुनाव के नजदीक आते-आते यह मुद्दा और भी गरमाने वाला है।
प्रशांत किशोर की असली डिग्री क्या है, यह आज भी आम जनता के लिए एक रहस्य ही है। वह खुद इस पर खुलकर बोलना पसंद नहीं करते। लेकिन राजनीति में यह सवाल बार-बार उठता रहेगा, क्योंकि PK ने खुद ही दूसरों की पढ़ाई-लिखाई को मुद्दा बनाया है। अब देखना यह होगा कि चुनावी समर में उनकी रणनीति ज्यादा असर दिखाती है या उनकी डिग्री पर उठ रहे सवाल जनता के बीच उनकी छवि को कमजोर करते हैं।












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