बिहार चुनाव में रैली-जुलूस पर सख्त नियम! बिना पूरा ब्यौरा दिए नहीं मिलेगा NOC, जानिए नई व्यवस्था

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मी तेज होते ही प्रशासन ने चुनावी सभाओं, जुलूसों और हेलीकॉप्टर रैलियों के लिए सख्त दिशा-निर्देश लागू कर दिए हैं। अब राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को हर सभा या जुलूस के आयोजन से पहले विस्तृत जानकारी देनी होगी, तभी उन्हें अनुमति मिलेगी। इस बार भारत निर्वाचन आयोग ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और अनुशासित रखने के लिए "सिंगल विंडो सिस्टम" लागू किया है।

एक क्लिक में सभी मंजूरियां, लेकिन कड़े मानदंडों के साथ

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मी तेज होते ही प्रशासन ने चुनावी सभाओं, जुलूसों और हेलीकॉप्टर रैलियों के लिए सख्त दिशा-निर्देश लागू कर दिए हैं। अब राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को हर सभा या जुलूस के आयोजन से पहले विस्तृत जानकारी देनी होगी, तभी उन्हें अनुमति मिलेगी। इस बार भारत निर्वाचन आयोग ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और अनुशासित रखने के लिए "सिंगल विंडो सिस्टम" लागू किया है।

Bihar Election 2025

आयोजकों को बताना होगा कि रैली में कितने लोग शामिल होंगे, कहां से कहां तक यात्रा होगी और कितने समय में कार्यक्रम पूरा किया जाएगा। संबंधित थाना प्रभारी से विधि-व्यवस्था से जुड़ा एनओसी (No Objection Certificate) इसी सिस्टम के माध्यम से प्राप्त किया जाएगा। यदि जुलूस को बाद में सभा में बदल दिया जाता है, तो उसके लिए भी नई अनुमति लेनी होगी।

लाउडस्पीकर के लिए अलग अनुमति जरूरी

रैली या सभा में लाउडस्पीकर का इस्तेमाल अब बिना अनुमति नहीं किया जा सकेगा। इसके लिए लाउडस्पीकर एक्ट के अनुसार संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी से स्वीकृति लेनी होगी। सिंगल विंडो सिस्टम यह सुनिश्चित करेगा कि अनुमति वैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप ही जारी हो।

चुनावी कार्यालय सरकारी जमीन पर नहीं खुलेगा

निर्वाचन कार्यालय खोलने के लिए नई शर्तें भी तय की गई हैं। राजनीतिक दल या प्रत्याशी अब सरकारी भूमि या भवन में चुनावी कार्यालय नहीं खोल सकेंगे। अगर निजी संपत्ति पर कार्यालय खोला जाता है, तो भूमि स्वामी से एनओसी अनिवार्य होगा। इसके साथ अंचलाधिकारी का सत्यापन प्रतिवेदन भी आवश्यक रहेगा।

हेलीकॉप्टर रैली के लिए देना होगा पूरा विवरण

राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को हेलीकॉप्टर या हेलीपैड उपयोग करने से पहले जिला निर्वाचन पदाधिकारी को विस्तृत जानकारी देनी होगी। आवेदन में यह बताना जरूरी होगा कि हेलीकॉप्टर में कितने लोग आएंगे, उसकी रजिस्ट्रेशन संख्या क्या है और बैठने की क्षमता कितनी है। हेलीकॉप्टर के आगमन और प्रस्थान की तारीख, समय और अवधि का ब्यौरा भी देना होगा। आयोजन स्थल पर विधि-व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी आयोजक की रहेगी।

यदि हेलीपैड विद्यालय परिसर में बनाया जा रहा है, तो प्रधानाध्यापक से भी लिखित अनुमति जरूरी होगी। अग्निशमन विभाग से एनओसी लेना अनिवार्य है, जबकि निजी भूमि पर हेलीपैड बनाने के लिए भू-स्वामी से अनुमति लेनी होगी।

पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम

चुनाव आयोग की इस नई व्यवस्था का उद्देश्य चुनावी प्रचार में पारदर्शिता और अनुशासन सुनिश्चित करना है। पहले जहां अलग-अलग विभागों से अनुमति लेनी पड़ती थी, अब यह प्रक्रिया एक ही प्लेटफॉर्म से पूरी होगी। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इससे फर्जी कार्यक्रमों, अराजक जुलूसों और बिना अनुमति के सभाओं पर नियंत्रण रहेगा, जिससे चुनावी माहौल शांतिपूर्ण रहेगा।

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