Bihar Chunav: 'हो न्याय अगर तो आधा दो', मांझी के पोस्ट से NDA में बढ़ी हलचल, बिहार में सीट बंटवारे पर खिंचतान
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 (Bihar Assembly Election 2025) से पहले एनडीए (NDA) में सीट बंटवारे को लेकर हलचल तेज हो गई है। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी जो अक्सर राजनीतिक लाइमलाइट में रहते हैं इस समय अपने एक ताजा बयान और सोशल मीडिया पोस्ट के कारण चर्चा में हैं।
पॉलिटिकल सुत्रों की मानें तो मांझी 20 से ज्यादा सीटों की मांग पर अड़े हुए हैं और उन्होंने इस मुद्दे पर कवि रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियों का सहारा लेकर अपनी बात कही है। जिसके बाद से ही NDA खेमें में सीट शेयरिंग का मुद्दा हाइलाइट हो गया।

दिनकर की कविता से मांझी ने दिया सियासी संदेश
मांझी ने अपने X अकाउंट पर दिनकर की प्रसिद्ध पंक्तियाँ साझा कीं-"हो न्याय अगर तो आधा दो, यदि उसमें भी कोई बाधा हो,
तो दे दो केवल 15 ग्राम, रखो अपनी धरती तमाम,
HAM वही खुशी से खाएंगे, परिजन पे असी ना उठाएंगे।"
इस पोस्ट के जरिए मांझी ने यह संकेत दिया कि वे सम्मानजनक हिस्सेदारी चाहते हैं, चाहे सीटें कम ही क्यों न मिलें। राजनीतिक हलकों में इसे एनडीए के भीतर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
"सीटों को लेकर झगड़ा नहीं, बस पहचान चाहिए"
मांझी ने कहा कि उनकी पार्टी किसी झगड़े में नहीं है, बल्कि बस इतनी सीटें चाहती है जिससे विधानसभा में मान्यता प्राप्त पार्टी का दर्जा मिल सके। उन्होंने कहा कि हम मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री नहीं बनना चाहते। बस हमारी पार्टी की पहचान बनी रहे, यही हमारी मुख्य मांग है। माना जा रहा है कि मांझी की यह मांग उनके राजनीतिक कद को बनाए रखने की कोशिश है।
“हो न्याय अगर तो आधा दो,
— Jitan Ram Manjhi (@jitanrmanjhi) October 8, 2025
यदि उसमें भी कोई बाधा हो,
तो दे दो केवल 15 ग्राम,
रखो अपनी धरती तमाम,
HAM वही ख़ुशी से खाएंगें,
परिजन पे असी ना उठाएँगे”
वे चाहते हैं कि उनकी पार्टी को उतनी सीटें दी जाएं, जिससे बिहार की राजनीति में उनका प्रभाव और मजबूत हो सके। मांझी ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी पार्टी को सम्मानजनक सीटें नहीं मिलतीं, तो वे एक भी सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन एनडीए में बने रहेंगे। उन्होंने कहा, "हम गठबंधन नहीं तोड़ेंगे, पर पार्टी की उपस्थिति दिखाना जरूरी है।"
उनका यह बयान भाजपा और जदयू के लिए चुनौती बन सकता है, क्योंकि इससे एनडीए के भीतर सीटों को लेकर मंथन और तेज होगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मांझी का यह रुख "दबाव की राजनीति" का हिस्सा है ताकि उन्हें बेहतर सौदे की पेशकश मिल सके।
दलित राजनीति का प्रमुख चेहरा
जीतन राम मांझी बिहार की राजनीति में दलित समुदाय के प्रमुख चेहरे हैं। वे पहले जदयू से मुख्यमंत्री रह चुके हैं और 2015 में अपनी पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) बनाई थी। बाद में वे एनडीए में शामिल हो गए। विधानसभा चुनाव को लेकर सीमांचल और मगध क्षेत्रों में उनका असर माना जाता है।
एनडीए में सीट बंटवारे की बातचीत अब अंतिम चरण में है। ऐसे में मांझी की 20 सीटों की मांग ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा और जदयू उनकी "पहचान" की इस मांग पर कितना झुकाव दिखाते हैं।












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