Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Bihar Chunav 2025: 'ऐसा नहीं हुआ तो 100 सीटों पर अकेले लडूंगा', आखिर NDA को क्यों धमकाने लगे जीतन राम मांझी?

Bihar Chunav 2025 (Jitan Ram Manjhi): बिहार की राजनीति में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संस्थापक जीतन राम मांझी हमेशा से अपनी बेबाकी और सियासी चतुराई के लिए जाने जाते रहे हैं। उन्होंने फिर से सुर्खियां बटोरीं जब सीट शेयरिंग पर बयान देते हुए एनडीए को सीधा संदेश दिया - अगर उनकी पार्टी को सम्मानजनक हिस्सेदारी यानी 15 से 20 सीटें नहीं मिली तो वे 100 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेंगे।

सवाल उठता है कि मांझी ने ऐसा बड़ा बयान क्यों दिया और इसके पीछे असली वजह क्या है? जीतनराम मांझी ने कहा, ''उनके हर विधानसभा क्षेत्र में 10-15 हजार वोटर मौजूद हैं। और इस आधार पर वे चुनाव में अकेले भी 6% वोट हासिल कर सकते हैं। इसलिए उन्हें 15 से 20 सीटें मिलनी चाहिए, अगर ऐसा नहीं हुआ तो वो 100 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेंगे।''

Bihar Chunav 2025 Jitan Ram Manjhi

मांझी का मिशन: मान्यता प्राप्त पार्टी बनना

दरअसल हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा की राजनीति के लिए इस बार का विधानसभा चुनाव बेहद अहम है। पार्टी के पास फिलहाल चार विधायक और एक सांसद हैं, लेकिन भारत निर्वाचन आयोग की नजर में यह अब भी "निबंधित, गैर-मान्यता प्राप्त दल" है। मान्यता पाने के लिए जरूरी है कि या तो पार्टी के पास कम से कम आठ विधायक हों या राज्य में 6% वोट शेयर हासिल करे।

यही कारण है कि मांझी अब 15 से 20 सीटों पर दावेदारी कर रहे हैं। उनका मानना है कि इतनी सीटें मिलने पर ही उनकी पार्टी आठ पर जीत दर्ज कर पाएगी। अगर एनडीए ने यह मांग नहीं मानी तो मांझी अकेले मैदान में उतरकर 100 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की धमकी दे रहे हैं।

'भीड़ पैसों से नहीं, समर्थन से जुटती है'

बोधगया स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में मांझी ने दावा किया कि उनकी पार्टी बिना पैसा खर्च किए भीड़ जुटाने की क्षमता रखती है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि बाकी दल जहां पैसे से भीड़ बुलाते हैं, वहां उनकी पार्टी का जनसमर्थन अपने आप पहुंचता है। मांझी का कहना है कि एनडीए के नेता भी यह ताकत जानते हैं और सीट बंटवारे में उनकी पार्टी की वास्तविक ताकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

NDA के भीतर बढ़ती सीटों की खींचतान

एनडीए में सीट बंटवारे की लड़ाई नई नहीं है। चिराग पासवान पहले ही संकेतों में अपनी दावेदारी जाहिर कर चुके हैं। अब मांझी की सख्त बयानबाजी ने गठबंधन के भीतर तनाव बढ़ा दिया है। उनका साफ कहना है कि अगर पार्टी को "सम्मानजनक हिस्सेदारी" नहीं मिली तो अकेले चुनाव लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

चाणक्य इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिकल राइट्स एंड रिसर्च के अध्यक्ष सुनील कुमार सिन्हा का कहना है, "मांझी का लक्ष्य साफ है। चार विधायकों और एक सांसद वाली अपनी पार्टी को जितनी ज्यादा सीटें मिलें, उतना ही उनके लिए फायदेमंद रहेगा। केंद्र में वह खुद मंत्री हैं और राज्य में बेटे मंत्री हैं। ऐसे में वह एनडीए से बाहर जाने का जोखिम नहीं लेंगे।"

केस स्टडी: मंत्री पद छोड़ने वाले नेता और नतीजे

बिहार की राजनीति ऐसे उदाहरणों से भरी पड़ी है, जहां नेताओं ने केंद्रीय मंत्री पद छोड़कर राज्य की सियासत में बड़ा दांव खेला और भारी कीमत चुकाई।

  • उपेंद्र कुशवाहा - मंत्री पद छोड़ चुनाव में उतरे लेकिन बाद में अस्तित्व की लड़ाई में फिर भाजपा के सहारे लौटना पड़ा।
  • पशुपति कुमार पारस - लोकसभा चुनाव से पहले पद छोड़ अलग रास्ता अपनाया और अब तक ठौर खोज रहे हैं।
  • चिराग पासवान - एनडीए से अलग होकर मुश्किलें झेलीं लेकिन अब मंत्री बनकर भाजपा से दूरी न बनाने की कसमें खा रहे हैं।

इन उदाहरणों को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि मांझी न तो कुशवाहा की गलती दोहराएंगे और न ही पारस या चिराग की तरह खुद को मुश्किल में डालेंगे।

पीएम मोदी की मणिपुर यात्रा का जिक्र

बातचीत के दौरान जीतन राम मांझी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मणिपुर यात्रा का भी बचाव किया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के तंज पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी खुद मणिपुर गए थे, लेकिन कोई ठोस उपलब्धि नहीं दिखा पाए। इसके उलट प्रधानमंत्री मोदी ने वहां 8000 करोड़ रुपये का पैकेज दिया और खराब मौसम के बावजूद सड़क मार्ग से लोगों तक पहुंचे। मांझी ने विपक्ष को "बिना आधार के प्रलाप" करने वाला करार दिया।

जीतन राम मांझी का यह बयान केवल धमकी नहीं बल्कि उनकी पार्टी के भविष्य की मजबूरी भी है। इस बार के चुनाव में उनका दांव साफ है - मान्यता प्राप्त दल बनना। अगर एनडीए उनकी मांगों को अनसुना करता है तो मांझी अकेले लड़ने से पीछे नहीं हटेंगे। अब देखना होगा कि भाजपा और जदयू जैसी बड़ी पार्टियां मांझी की शर्तों को कितनी गंभीरता से लेती हैं। क्योंकि बिहार की राजनीति में एक छोटे दल का संतुलन बिगाड़ना अक्सर बड़े गठबंधनों को भारी पड़ चुका है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+