Bihar Chunav: जनसुराज की दूसरी लिस्ट में 5 बड़े नाम, अभयकांत झा से असहाब आलम तक, कौन हैं PK के भरोसे के चेहरे?
Bihar Election 2025 (JanSuraaj candidate List): बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले प्रशांत किशोर (PK) की पार्टी जनसुराज ने सोमवार को अपनी दूसरी उम्मीदवार सूची जारी कर दी है। इस बार पार्टी ने 65 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है। खास बात यह है कि जनसुराज ने अपनी लिस्ट में समाज के हर तबके से उम्मीदवार उतारे हैं, कोई वकील है, कोई डॉक्टर, तो कोई ऐसे सामाजिक कार्यकर्ता, जिन्होंने अपने दम पर पहचान बनाई।
पार्टी की दूसरी लिस्ट में 20 आरक्षित सीटें हैं, जबकि 45 सामान्य सीटें। इनमें SC के 19, ST का 1, और 14 मुस्लिम उम्मीदवार शामिल हैं। 45 सामान्य सीटों में से 34 सीटें मुस्लिम, EBC और OBC वर्ग को दी गई हैं, जबकि सवर्ण समुदाय को 11 सीटों पर टिकट मिला है। अब जानते हैं जनसुराज की दूसरी लिस्ट के 5 सबसे चर्चित चेहरों के बारे में, जिन पर प्रशांत किशोर ने भरोसा जताया है।

🔵1. लालमुनी चौबे के बेटे हेमंत चौबे -चैनपुर से उतरेंगे मैदान में
जनसुराज पार्टी ने कैमूर जिले की चैनपुर विधानसभा सीट से हेमंत चौबे को उम्मीदवार बनाया है। हेमंत, बिहार के दिग्गज नेता और पूर्व सांसद लालमुनी चौबे के बेटे हैं। लालमुनी चौबे की छवि एक ईमानदार और साफ-सुथरे नेता की रही है, जिनका क्षेत्र में आज भी प्रभाव माना जाता है।
हेमंत चौबे ब्राह्मण समुदाय से हैं और उन्होंने एमए तक की पढ़ाई की है। वे बीएचयू से एलएलबी की पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन मां की बीमारी के चलते बीच में पढ़ाई छोड़नी पड़ी। राजनीति में कदम रखने के बाद से वे अपने पिता की तरह जनसेवा को ही प्राथमिकता मानते हैं। प्रशांत किशोर ने इस युवा चेहरे को मैदान में उतारकर पार्टी में नई ऊर्जा भरने की कोशिश की है।
🔵2. भागलपुर दंगा पीड़ितों के वकील अभयकांत झा -न्यायप्रिय छवि के साथ राजनीति में एंट्री
भागलपुर के वरिष्ठ वकील अभयकांत झा को जनसुराज ने उम्मीदवार बनाकर बड़ा संदेश दिया है। 74 साल के अभयकांत झा ने 1989 के भागलपुर दंगे के 880 से ज्यादा पीड़ितों का केस मुफ्त में लड़ा था। उन्होंने निष्पक्ष तरीके से न्याय के लिए लड़ाई लड़ी, जिसके बाद वे शहर में "जनता के वकील" के रूप में पहचाने जाने लगे।
वे भागलपुर सिविल कोर्ट के वरिष्ठ वकील और बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं। ब्राह्मण समाज से आने वाले अभयकांत झा की पहचान एक सुलझे हुए और संवेदनशील व्यक्ति की है। राजनीतिक मंच पर यह उनका पहला मौका होगा, लेकिन जनसुराज के स्थानीय ढांचे को मजबूत करने में वे पहले से अहम भूमिका निभा रहे हैं।
🔵3. चार बार विधायक रह चुके जनार्दन यादव -भाजपा छोड़ जनसुराज से थामा दामन
नरपतगंज विधानसभा सीट से जनसुराज ने जनार्दन यादव को टिकट दिया है। वे इस क्षेत्र के पुराने और अनुभवी नेता हैं। जनार्दन यादव अब तक चार बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने पहली बार 1977 में जनसंघ के टिकट पर चुनाव जीता था और जेपी आंदोलन के दौरान दो बार जेल भी गए थे।
कुछ सालों से राजनीति में सक्रिय न रहने के बाद उन्होंने हाल ही में भाजपा से इस्तीफा दिया। उनका कहना था कि "अब की भाजपा अटल-आडवाणी वाली पार्टी नहीं रही।" इसके बाद उन्होंने प्रशांत किशोर की पार्टी का दामन थाम लिया। नरपतगंज में उनकी मजबूत पकड़ और जनता के बीच लोकप्रियता को देखते हुए जनसुराज ने उन्हें प्रत्याशी बनाया है।
🔵4. रक्सौल से कपिलदेव प्रसाद उर्फ भुवन पटेल -42 साल की सामाजिक सेवा का इनाम
रक्सौल विधानसभा सीट से जनसुराज ने कपिलदेव प्रसाद उर्फ भुवन पटेल को टिकट दिया है। वे पिछले 42 वर्षों से राजनीति और समाजसेवा में सक्रिय हैं। दो बार मुखिया रह चुके हैं और उनकी पत्नी भी भेलाही पंचायत की मुखिया हैं।
कपिलदेव प्रसाद पहले जेडीयू में थे और दो बार जिलाध्यक्ष तथा प्रदेश महासचिव जैसे अहम पदों पर रह चुके हैं। लेकिन जब बार-बार टिकट से वंचित किया गया, तो उन्होंने पार्टी बदलने का फैसला किया। जनसुराज में शामिल होने के बाद से वे रक्सौल में पार्टी के संगठन को मजबूत कर रहे हैं। पार्टी ने उनकी जमीनी पकड़ और लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें प्रत्याशी बनाया है।
🔵5. कटिहार के असहाब आलम - जमीनी नेता को मिला जनसुराज का टिकट
बारसोई विधानसभा सीट (कटिहार) से जनसुराज पार्टी ने असहाब आलम को उम्मीदवार बनाया है। वे मूल रूप से एकचन्ना गांव के रहने वाले हैं और लंबे समय से अपने क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दों पर सक्रिय हैं।
असहाब आलम ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत राजद (RJD) से की थी और कई वर्षों तक संगठन में काम किया। तीन साल पहले उन्होंने जनसुराज का दामन थामा और पार्टी में तेजी से सक्रिय हो गए। जनसुराज ने उन्हें टिकट देकर यह संदेश दिया है कि पार्टी जमीनी और साफ-सुथरी छवि वाले नेताओं को तरजीह दे रही है।
🔵जातीय और सामाजिक संतुलन पर PK की रणनीति
जनसुराज की दूसरी लिस्ट में प्रशांत किशोर ने जातीय समीकरण का बारीक गणित साधा है। 65 उम्मीदवारों की सूची में हर वर्ग और हर समुदाय को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है, चाहे वह ब्राह्मण हो, यादव, दलित, मुस्लिम या अति पिछड़ा वर्ग।
पार्टी की रणनीति साफ है, "जिसकी जितनी संख्या, उसकी उतनी भागीदारी।" यही वजह है कि जनसुराज ने शिक्षा, समाजसेवा और न्याय जैसे क्षेत्रों से आने वाले उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है।
आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में जनसुराज की यह लिस्ट न सिर्फ राजनीतिक हलचल बढ़ा रही है, बल्कि यह भी दिखा रही है कि प्रशांत किशोर अब पूरी गंभीरता से बिहार की सत्ता की लड़ाई में उतर चुके हैं।












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