Bihar CPIML List: बिना बंटवारे के ही भाकपा माले ने 18 सीटों पर कर दी उम्मीदवारों की घोषणा, देखें लिस्ट
Bihar CPIML List: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर महागठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर जटिल स्थिति बनी हुई है। रिपोर्टस् के अनुसार, गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर राजनीतिक दलों में लगातार बातचीत जारी हैं। कांग्रेस ने अपने नेताओं को निर्देश दिया है कि बिहार की सभी 243 सीटों पर संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार की जाए।
इस बीच, मार्क्सवादी लेबर पार्टी (माले) ने अपनी ओर से 18 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों को सिंबल बांट दिए हैं। आइए जानते हैं किन सीटों पर पार्टी ने अपने कैडिडेट उतारे हैं...

18 सीटों पर भाकपा माले का दांव
पिछली बार माले जिन सीटों पर चुनाव लड़ा था, उनमें से इस बार महागठबंधन में औराई की सीट माले ने छोड़ दी है। औराई सीट पर पिछली बार माले के उम्मीदवार आफताब आलम दूसरे नंबर पर रहे थे, जबकि बीजेपी के रामसूरत राय चुनाव जीत गए थे।
माले की ओर से 18 सीटों में इस बार विभिन्न जातीय और सामाजिक समूहों के प्रतिनिधियों को टिकट दिया गया है। इनमें 2 मुस्लिम, 5 कुशवाहा, 4 रविदास, 2 अतिपिछड़ा और 1 सवर्ण महिला शामिल हैं।
राजद का फेरबदल और सिंबल वापसी
महागठबंधन में सीटों को लेकर लगातार खींचतान के बीच राजद ने सोमवार को अपने उम्मीदवारों को सिंबल दिए थे। हालांकि, देर रात खबर आई कि गठबंधन में दरार की वजह से कई उम्मीदवारों से सिंबल वापस ले लिया गया। इस कदम से साफ है कि महागठबंधन के भीतर सीट शेयरिंग को लेकर अभी भी मतभेद दूर नहीं हुए हैं।
दिल्ली में भी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव के बीच कोई सीधी बैठक नहीं हुई। राहुल गांधी ने कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की, जिसमें करीब डेढ़ घंटे तक बातचीत हुई, लेकिन सीटों के पेंच को सुलझाया नहीं जा सका।
महागठबंधन में सीटों का बंटवारे पर घमासान
सूत्रों की मानें तो, महागठबंधन में राजद 140 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। वहीं, कांग्रेस के हिस्से में लगभग 60 सीटें आ रही हैं। माले और अन्य छोटे दलों के हिस्से में शेष सीटें बंटी हुई हैं। इस बंटवारे में जातीय समीकरण, पिछली जीत-हार और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखा गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि महागठबंधन में सीटों के अंतिम बंटवारे और उम्मीदवारों की पुष्टि अगले कुछ दिनों में हो सकती है। इसके साथ ही दल अपने अभियान की रूपरेखा तैयार कर चुनाव मैदान में उतरेंगे। इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में जातीय समीकरण, पिछली चुनावी परफॉर्मेंस और गठबंधन की एकता प्रमुख भूमिका निभाने वाली है।












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