Bihar Chunav: ब्राह्मण वोटर्स का BJP से हो रहा है मोहभंग! इस दल की तरफ बढ़ रहा है झुकाव, सर्वे में खुलासा
Bihar Brahmin Voters: बिहार में विधानसभा चुनाव के बीच भाजपा के लिए ब्राह्मण वोटर्स चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। अगड़ी जाति, जो हमेशा भाजपा के कोर वोटर्स मानी जाती रही है, अब धीरे-धीरे इस दल से दूर होती दिखाई दे रही है। पार्टी के आंतरिक सर्वे के अनुसार, ब्राह्मण समाज में यह बदलाव बीजेपी के लिए चुनौती बन सकता है।
पिछले 20-25 सालों से यह वोट बैंक भाजपा गठबंधन के साथ रहा है। पार्टी अब उन्हें मजबूर वोटर मान रही है, जो पहले कांग्रेस से भाजपा की तरफ आए थे। यह रुझान बिहार की राजनीतिक समीकरण को प्रभावित कर सकता है और आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की रणनीति के लिए बड़ा इशारा देता है।

क्यों नाराज हुए ब्राह्मण समाज?
ब्राह्मण समाज लंबे समय से भाजपा का परंपरागत और भरोसेमंद वोट बैंक रहा है। कांग्रेस से मोहभंग के बाद इस वर्ग ने भाजपा को अपना राजनीतिक घर मान लिया। कई चुनावों में ब्राह्मण समाज का एकमत समर्थन भाजपा को आसानी से मिल जाता रहा है। पार्टी नेतृत्व भी इसे स्थायी मानकर चलता रहा, यह मानते हुए कि विपक्ष में सिर्फ राजद है और चुनाव के समय लालू-राबड़ी राज का भय दिखाकर आसानी से वोट जुटाए जा सकते हैं।
लेकिन अब बदलाव नजर आने लगा है। भाजपा के भीतर टिकट वितरण और प्रतिनिधित्व में इस समाज की उपेक्षा होने लगी है। वही वोटर जिनके भरोसे भाजपा ने ताकत और प्रभाव पाया, अब किनारे होते दिख रहे हैं। ब्राह्मण समाज के नेताओं का आरोप है कि उनका एकमत वोट भाजपा लेती है, लेकिन उन्हें उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिलता। यह रुझान आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए चुनौती बन सकता है।
बिहार में ब्राह्मणों की कितनी आबादी?
साल 2023 में बिहार सरकार ने जाति आधारित सर्वेक्षण के आंकड़े सार्वजनिक किए। इसके अनुसार, बिहार की कुल आबादी 13 करोड़ 7 लाख 25 हजार 310 है। सूबे में सवर्ण जातियों की कुल आबादी 15.22% है। सवर्णों में सबसे बड़ी संख्या ब्राह्मणों की है, जो 3.66% हैं। दूसरे नंबर पर राजपूत हैं (3.45%) और इसके बाद भूमिहार (2.86%) आते हैं। ये आंकड़े बिहार की जातिगत संरचना और राजनीतिक समीकरण को समझने में मददगार हैं।
ये भी पढ़ें: Bihar Election 2025: छठ पर बिहार वासियों को PM मोदी देने जा रहे हैं बड़ा तोहफा! 'मन की बात’ में किया ऐलान
ब्राह्मणों को टिकट देने में भाजपा की आनाकानी
भारतीय जनता पार्टी ने 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में ब्राह्मण समाज को केवल 11 टिकट दिए। इसमें से 7 भोजपुर और मगध के ब्राह्मण और 4 मैथिल ब्राह्मण उम्मीदवार थे। मिथिला भाजपा का गढ़ माना जाता है और यहां के सभी चार मैथिल ब्राह्मण उम्मीदवार चुनाव जीत गए। वहीं, भोजपुर और मगध में सिर्फ 1 उम्मीदवार सफल हो पाया।
सवर्ण समाज में अन्य जातियों की स्थिति बेहतर रही। भाजपा ने भूमिहार समाज से 15 उम्मीदवार उतारे, जिनमें से 8 की जीत हुई। राजपूत समाज से लड़े 21 उम्मीदवारों में 18 सफल रहे और कायस्थ समाज के 3 उम्मीदवार सभी जीत गए। इसके पीछे यह संकेत मिलता है कि ब्राह्मण समाज को अपेक्षाकृत कम टिकट मिला, जबकि अन्य सवर्ण जातियों का प्रतिनिधित्व अधिक था।
ये भी पढ़ें: Bihar Chunav 2025: BJP के बागी नेताओं की सूची से मची खलबली, इन 5 विधायकों का पार्टी काट सकती है टिकट!
ब्राह्मण समाज का जनसुराज के तरफ बढ़ा झुकाव
अगड़ी जाति का रुझान अब धीरे-धीरे जनसुराज पार्टी की तरफ बढ़ता दिखाई दे रहा है। भारतीय जनता पार्टी के द्वारा किए गए आंतरिक सर्वे में भी इस बदलाव की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि ब्राह्मण समाज का सबसे अधिक मोहभंग भाजपा से हुआ है। अब इस समाज का राजनीतिक भविष्य प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी में नजर आ रहा है, जिससे आगामी चुनाव में भाजपा के लिए चुनौती बढ़ सकती है।
नीतीश कैबिनेट में केवल 2 ब्राह्मण मंत्री
नीतीश कुमार की कैबिनेट में ब्राह्मण समाज के केवल दो मंत्री शामिल हैं। इसमें श्री मंगल पांडेय स्वास्थ्य मंत्रालय और विधि मामलों के लिए तथा श्री नीतीश मिश्रा उद्योग मंत्रालय के लिए हैं। दोनों नेता बीजेपी से हैं। कैबिनेट में ब्राह्मण समाज के नेताओं की यह न्यून प्रतिनिधित्व चुनावी समीकरणों को भी दिखाता है। लोकसभा चुनाव के दौरान भी इस समाज को केवल दो टिकट दिए गए थे। दरभंगा से गोपाल जी ठाकुर और बक्सर से मिथिलेश तिवारी। इनमें से केवल गोपाल जी ठाकुर ही चुनाव जीतने में सफल रहे। इससे स्पष्ट होता है कि ब्राह्मण समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में सीमित अवसर मिल रहे हैं, जबकि यह समाज भाजपा और नीतीश कुमार की राजनीति में महत्वपूर्ण वोट बैंक माना जाता रहा है।












Click it and Unblock the Notifications