Bihar Election 2025: सम्राट चौधरी से नीतीश मिश्रा तक, भाजपा की पहली लिस्ट के 13 बड़े चेहरे कौन सी जाति से?
Bihar Election 2025 (BJP Candidate List): बिहार की सियासत में जाति सिर्फ पहचान नहीं, बल्कि सत्ता की चाबी है। जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव 2025 नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे हर पार्टी अपनी जातीय बिसात बिछाने में जुट गई है। इसी बीच भाजपा ने मंगलवार (14 अक्टूबर) को अपने 71 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी। इस लिस्ट में जातीय संतुलन को लेकर पार्टी ने काफी सोच-समझकर कदम बढ़ाया है।
भाजपा ने इस बार 101 सीटों पर लड़ने का फैसला किया है, जिसमें से 71 सीटों के उम्मीदवार घोषित हो चुके हैं। इनमें 13 मंत्री, 9 महिलाएं और कई पुराने चेहरे दोबारा मैदान में हैं। पार्टी ने जहां 56 विधायकों में से 46 को दोबारा टिकट दिया है, वहीं 10 के टिकट काटे हैं। वनइंडिया हिंदी की खास सीरिज "जाति की पाति" में आज हम बात करेंगे भाजपा के पहले लिस्ट के 13 बड़े चेहरों की जाति के बारे में।

भाजपा की लिस्ट में किस जाति का कितना प्रभाव?
71 उम्मीदवारों में भाजपा ने सवर्णों को सबसे ज्यादा तरजीह दी है। पार्टी की लिस्ट में सवर्ण उम्मीदवारों की संख्या 35 है। इसके अलावा OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) से 11, EBC (अति पिछड़ा वर्ग) से 19 और SC-ST से 6 उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है। यानी भाजपा ने अपने पुराने वोट बैंक सवर्णों को बनाए रखते हुए पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग को भी संतुलित प्रतिनिधित्व दिया है।
भाजपा की पहली लिस्ट: 13 बड़े नाम और उनकी जातीय पहचान
अब बात उन 13 बड़े चेहरों की, जिन पर भाजपा ने इस चुनाव में सबसे ज्यादा दांव लगाया है। इन नेताओं की जाति न सिर्फ उनके राजनीतिक आधार को बताती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि भाजपा ने किस तरह जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश की है।
1. सम्राट चौधरी - कोईरी जाति
बिहार के डिप्टी सीएम और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी इस बार तारापुर से चुनाव लड़ रहे हैं। वे कोईरी जाति से आते हैं, जो बिहार की राजनीति में एक मजबूत OBC वर्ग माना जाता है। भाजपा सम्राट चौधरी के जरिए कुशवाहा वोटबैंक को मजबूत करने की कोशिश में है।
2. विजय सिन्हा - भूमिहार जाति
बिहार के दूसरे डिप्टी सीएम विजय सिन्हा लखीसराय से मैदान में हैं। भूमिहार समाज भाजपा का पारंपरिक सवर्ण वोटबैंक रहा है। विजय सिन्हा पार्टी के पुराने और भरोसेमंद नेता हैं, जिनकी पकड़ संगठन में भी मजबूत मानी जाती है।
3. मंगल पांडे - ब्राह्मण जाति
सीवान से उम्मीदवार बनाए गए स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ब्राह्मण समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे भाजपा के चेहरे में सवर्ण संतुलन का अहम हिस्सा हैं। पार्टी उम्मीद कर रही है कि पांडे की सादगी और संगठन में अनुभव से सीवान की सीट फिर भाजपा के खाते में जाएगी।
4. नीतीश मिश्रा - ब्राह्मण जाति
पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के बेटे नीतीश मिश्रा झंझारपुर से फिर मैदान में हैं। उद्योग मंत्री के रूप में उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर अपनी पकड़ दिखाई है। भाजपा उनके जरिए मिथिलांचल में ब्राह्मण और सवर्ण वोटरों को साधने की रणनीति बना रही है।
5. रामकृपाल यादव - यादव जाति
एक समय लालू यादव के करीबी रहे रामकृपाल यादव अब भाजपा के मजबूत यादव चेहरा हैं। पार्टी ने उन्हें दानापुर से टिकट दिया है। भाजपा यादव समाज में सेंध लगाने के लिए रामकृपाल जैसे नामों पर भरोसा जता रही है।
6. डॉ. प्रेम कुमार - चंद्रवंशी (कहार) जाति
गया से भाजपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री डॉ. प्रेम कुमार को एक बार फिर मौका मिला है। चंद्रवंशी जाति से आने वाले प्रेम कुमार को अति पिछड़े वर्ग में खासा सम्मान प्राप्त है।
7. रेणु देवी - नोनिया जाति
पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री रेणु देवी नोनिया समाज से आती हैं। वह भाजपा की महिला चेहरे के साथ-साथ अति पिछड़े वर्ग की महत्वपूर्ण प्रतिनिधि हैं।
8. नीरज कुमार सिंह बबलू - राजपूत जाति
बिहार के लोक स्वास्थ्य एवं अभियंत्रण मंत्री नीरज बबलू मधुबनी से विधायक हैं। राजपूत समुदाय में उनकी पकड़ मजबूत है और पार्टी उनके जरिए इस वर्ग के वोट को एकजुट रखना चाहती है।
9. संजय सरावगी - मारवाड़ी समुदाय जाति
दरभंगा से विधायक संजय सरावगी मारवाड़ी समाज से हैं। वे बिहार भाजपा के व्यापारी वर्ग के चेहरे हैं और शहरी वोटरों में उनकी अच्छी पहचान है।
10. जीवेश कुमार मिश्रा - भूमिहार जाति
नगर विकास मंत्री जीवेश मिश्रा भी भूमिहार समाज से हैं। भागलपुर से आने वाले मिश्रा को भाजपा ने दोबारा मौका दिया है, जो इस बात का संकेत है कि पार्टी सवर्ण एकता को टूटने नहीं देना चाहती।
11. राजू कुमार सिंह - राजपूत जाति
पर्यटन मंत्री राजू सिंह पश्चिमी चंपारण से आते हैं। वे राजपूत समुदाय के प्रभावशाली नेता हैं। भाजपा उन्हें सीमांचल से लेकर तराई बेल्ट तक सवर्णों के जोड़ के रूप में पेश कर रही है।
12. डॉ. सुनील कुमार - चमार (दलित) जाति
पर्यावरण मंत्री डॉ. सुनील कुमार दलित समाज से आते हैं। भाजपा उन्हें अपने दलित आउटरीच के हिस्से के रूप में प्रमोट कर रही है, ताकि पार्टी का सामाजिक आधार और विस्तृत हो।
13. नितीन नवीन - कायस्थ जाति
पथ निर्माण मंत्री नितीन नवीन कायस्थ समुदाय से हैं। वे पटना से आते हैं और सवर्ण समाज में भाजपा का भरोसेमंद चेहरा माने जाते हैं।
जातीय संतुलन ही जीत की कुंजी
भाजपा की पहली लिस्ट साफ दिखाती है कि पार्टी ने सवर्ण, पिछड़ा, अति पिछड़ा और दलित - सभी वर्गों को साधने की कोशिश की है। सम्राट चौधरी से लेकर नीतीश मिश्रा तक हर नेता के चयन के पीछे एक जातीय रणनीति छिपी है। बिहार में 6 और 11 नवंबर को वोटिंग होगी और नतीजे 14 नवंबर को आएंगे। अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा का यह जातीय संतुलन चुनावी मैदान में कितना असर दिखाता है।
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