Bihar Election: 'बिहार में बनेगा भव्य सीता मंदिर' सुपौल में शाह का बड़ा ऐलान, पूछा- क्या लालू बना बना सकते
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण से पहले चुनावी माहौल गरमाता जा रहा है। सुपौल में आयोजित जनसभा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर तीखा प्रहार किया और राम मंदिर से लेकर सिता मंदिर तक का मुद्दा उठाया। शाह ने जनता से सवाल किया बताइए, अयोध्या में राम मंदिर बनना चाहिए था या नहीं?
अमित शाह ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण 550 साल की प्रतीक्षा के बाद संभव हुआ। उन्होंने कहा,जब बाबर ने राम मंदिर को तोड़ा, तब से लेकर मोदी जी के आने तक सबने इसे रोके रखा। पहले मुगलों ने रोका, फिर अंग्रेजों ने बहकाया, और बाद में कांग्रेस और लालू प्रसाद यादव ने इसे अटका दिया।

शाह ने कहा कि जब जनता ने 2019 में नरेंद्र मोदी को दूसरी बार प्रधानमंत्री बनाया, तब देश ने देखा कि कैसे मोदी जी ने 2019 में भूमि पूजन किया और 2024 में रामलला का प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुआ।
बिहार में सीता माता मंदिर बनेगा
अमित शाह ने आगे कहा कि बिहार में माता सीता का धाम पुनौरा (पुनौरा धाम, सीतामढ़ी) पर एक भव्य सीता माता मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा, दो महीने पहले मैं और नीतीश कुमार जी, दोनों ने मिलकर सीता माता मंदिर के भूमिपूजन का कार्य किया था। अब दो साल छह महीने में एक भव्य मंदिर बनकर तैयार होगा। शाह ने यह भी कहा कि यह मंदिर न केवल बिहार की धार्मिक पहचान को मजबूत करेगा बल्कि सांस्कृतिक पर्यटन को भी नई दिशा देगा।
क्या लालू और राहुल सीता माता का मंदिर बनवा सकते थे?
अमित शाह ने अपने भाषण में विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा,मैं बिहार की जनता से पूछना चाहता हूँ - क्या लालू प्रसाद यादव और राहुल गांधी माता सीता का मंदिर बनवा सकते थे? क्या वे राम मंदिर के पक्ष में खड़े हुए?उन्होंने कहा कि कांग्रेस और आरजेडी ने हमेशा सांप्रदायिक राजनीति और तुष्टिकरण की नीति अपनाई है, जबकि बीजेपी ने देश की आस्था और परंपरा को सम्मान दिया है।
नीतीश कुमार के साथ बिहार के विकास की नई कहानी
अमित शाह ने सभा में कहा कि बिहार में एनडीए की सरकार ने विकास, रोजगार और सुरक्षा पर काम किया है। उन्होंने कहा,मोदी जी और नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में विकास की नई गाथा लिखी जा रही है। बिहार अब न तो जंगलराज में लौटेगा और न ही भ्रष्टाचार में। यह नया बिहार, विकास का बिहार है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे एनडीए गठबंधन के उम्मीदवारों को वोट दें, ताकि राज्य और केंद्र में स्थिर सरकार बनी रहे।
राम-सीता बनी सियासी हथियार
सुपौल की इस जनसभा में अमित शाह ने धार्मिक और भावनात्मक मुद्दों को राजनीतिक भाषण के केंद्र में रखा। उन्होंने राम मंदिर और सीता माता मंदिर को भाजपा सरकार की धर्म और विकास के समन्वय की मिसाल बताया। भाषण के दौरान जनता "जय श्रीराम" और "जय सियाराम" के नारों से गूंज उठी। शाह ने कहा कि अब वह दौर खत्म हो गया जब हमारी आस्था पर सवाल उठाए जाते थे। अब भारत अपनी परंपरा पर गर्व करता है।
सुपौल की इस जनसभा ने साफ कर दिया कि बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में भाजपा धार्मिक-सांस्कृतिक मुद्दों के साथ विकास का एजेंडा लेकर मैदान में है। अमित शाह ने एक ओर राम मंदिर और सीता माता मंदिर को जनता की आस्था से जोड़ा, वहीं दूसरी ओर विपक्ष पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। अब देखना यह है कि शाह का यह "राम-सिता कार्ड" बिहार की जनता के दिलों तक पहुंचता है या नहीं।












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