क्या सरकारी और कॉमन व्यक्ति की हत्या में फर्क होना चाहिए? बाहुबली आनंद मोहन की रिहाई पर नीतीश कुमार का बचाव
बिहार के बाहुबली नेता और पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई पर नीतीश कुमार ने शुक्रवार को कहा कि मैं हैरान हूं। जब आनंद मोहन की रिहाई नहीं हुई थी, तो कई लोग इसकी मांग करते थे। अब जब हो गई है, तो वे इसका विरोध कर रहे हैं।

बिहार के बाहुबली नेता और पूर्व सांसद आनंद मोहन आखिरकार 15 साल बाद जेल से बाहर आ चुके हैं। जिलाधिकारी जी कृष्णैया की हत्या के केस में उम्रकैद की सजा काट रहे आनंद मोहन के लिए बिहार सरकार वरदान बनकर आई। कानूनी नियमों में बदलाव करते ही आनंद मोहन समेत 27 कैदियों को रिहाई मिली।
सियासी गलियारों में इसे नीतीश कुमार सरकार का राजनीतिक कार्ड बताया जा रहा हैं। ऐसे में नीतीश कुमार ने शुक्रवार को कहा कि मैं हैरान हूं। जब आनंद मोहन की रिहाई नहीं हुई थी, तो कई लोग इसकी मांग करते थे। अब जब हो गई है, तो वे इसका विरोध कर रहे हैं। नीतीश कुमार ने आगे यह भी कहा कि इतने सारे लोगों की रिहाई हुई है, लेकिन एक आदमी की ही चर्चा क्यों हो कर रहें है, यह आश्चर्यजनक है। इसमें कोई खास बात नहीं।
एक ही आदमी पर ही चर्चा क्यों?
नीतीश कुमान ने मीडिया से सवाल करते हुए अंदाज में कहा कि क्या सरकारी और कॉमन व्यक्ति की हत्या में कोई फर्क होना चाहिए। कहा कि आनंद मोहन 15 साल जेल में रहे हैं। उनकी रिहाई का फैसला सभी से विचार-विमर्श के बाद ही लिया गया है। 27 कैदियों को रिहा किया गया है, लेकिन हम सिर्फ एक ही आदमी पर ही चर्चा क्यों कर रहे हैं?
क्या हुआ नियम में बदलाव ?
दरअसल, बीती 10 अप्रैल को कारागार नियमावली, 2012 के नियम 481(i)(क) में संशोधन किया गया है। जिसके मुताबिक, सरकारी सेवक की हत्या को अपवाद की सूची से हटा दिया है। जिसमें सरकारी सेवक की हत्या करने वालों आरोपी की सजा में माफ करने का जिक्र था।












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