Bihar Chunav: घूंघट, बुर्का, नक़ाब, हिजाब वाली महिला वोटरों की कैसे की जाएगी पहचान? ये नियम होगा लागू
Bihar Chunav: बिहार विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान करते हुए चुनाव आयुक्त ने साफ किया था कि इस बार के चुनाव और उपचुनावों में बुर्का, नक़ाब या हिजाब पहनने वाली महिला मतदाताओं की पहचान की जाचं की जाएगी। इस फैसले का समाजवादी पार्टी ने विरोध भी किया। वहीं अब चुनाव आयोग ने बता दिया है कि आखिर कैसे और कौन इन नकाबपोश यानी घूंघट, बुरका, नकाब, हिजाब में आने वाली वोटरों की पहचान करेगा।
चुनाव आयोग ने का कि ऐसे वोटरों की पहचान के लिए पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त टी.एन. शेषन के 1994 के आदेश का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। यह दिखाता है कि 35 साल बाद भी शेषन के निर्देश प्रासंगिक बने हुए हैं।

क्या हैं टी एन शेषन का आदेश?
टी.एन. शेषन के आदेश के मुताबिक, भारतीय संविधान का अनुच्छेद 326 यह प्रावधान करता है कि लोकसभा और प्रत्येक राज्य की विधानसभा के चुनाव सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर होंगे। इसके तहत, भारत का हर वह नागरिक जिसकी आयु 18 वर्ष से कम नहीं है और जिसे किसी कानून के तहत अयोग्य घोषित नहीं किया गया है, मतदाता के रूप में पंजीकृत होने का हकदार होगा।
संविधान का अनुच्छेद 325 आगे कहता है कि धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर कोई भी व्यक्ति किसी विशेष निर्वाचक नामावली में शामिल होने के लिए अयोग्य नहीं होगा। संसद के किसी भी सदन या राज्य के विधानमंडल के लिए, प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र की एक सामान्य निर्वाचक नामावली होगी, जिसमें किसी भी व्यक्ति को केवल इन आधारों पर अपात्र नहीं किया जा सकता।
इस तरह, देश में महिला मतदाताओं को लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों में पुरुषों के समान ही निर्वाचन अधिकार प्राप्त हैं। हालांकि, कुछ राज्यों या क्षेत्रों में महिला मतदाताओं की भागीदारी पुरुषों की तुलना में कम देखी गई है।
निर्वाचन संचालन नियम, 1961 का नियम 34 विशेष रूप से प्रावधान करता है कि जहां मतदान केंद्र पुरुष और महिला दोनों के लिए हैं, पीठासीन अधिकारी निर्देश दे सकता है कि उन्हें बारी-बारी से अलग-अलग समूहों में प्रवेश दिया जाएगा।
बिहार में कौन करेगा इन पर्दे वाली वोटरों की जांच?
रिटर्निंग अधिकारी या पीठासीन अधिकारी महिला मतदाताओं की सहायता के लिए और विशेष रूप से, यदि आवश्यक हो तो उनकी तलाशी लेने के लिए महिला परिचारिका नियुक्त कर सकता है। महिला मतदाताओं की पूर्ण भागीदारी और मतदान प्रतिशत में सुधार के लिए आयोग ने समय-समय पर कई निर्देश जारी किए हैं।
आयोग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि किसी भी महिला मतदाता को मताधिकार से वंचित न किया जाए या उसके प्रयोग में बाधा न आए। मतदान केंद्र पर सुविधाओं की कमी, खासकर गोपनीयता और गरिमा बनाए रखने के लिए, पहचान या अमिट स्याही लगाने के मामले में ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।
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