Bihar Chunav: बीजेपी की पहली लिस्ट में ब्राह्मण-भूमिहार पर भारी पड़े राजपूत, ठाकुरों को क्यों मिला इतना भाव
Bihar Chunav: बिहार विधानसभा चुनाव के लिए टिकटों के वितरण का दौर जारी है। बीजेपी ने मंगलवार को पहली लिस्ट जारी कर दी है, जिसमें 71 उम्मीदवार उतारे गए हैं। बीजेपी ने ईबीसी, ओबीसी और सवर्ण वोट बैंक का ध्यान रखते हुए टिकटों के वितरण में भी सामाजिक समीकरण का ध्यान रखा गया है। बीजेपी का कोर वोट बैंक एक समय ब्राह्मण-बनिया माना जाता था। हालांकि, पिछले एक दशक में स्थिति बदली और अब शहरी सवर्ण वोट के साथ ही ओबीसी वोट भी बीजेपी को मिल रहा है।
बीजेपी की पहली लिस्ट में किसी मुसलमान को टिकट नहीं दिया गया है, जबकि सिर्फ एक कायस्थ को टिकट मिला है। इसके अलावा, सवर्णों में खास तौर पर राजपूतों का ध्यान रखा गया है और 15 कैंडिडेट इसी जाति से उतारे गए हैं। बची हुई 30 सीटों में से भी कुछ पर ठाकुर जाति के उम्मीदवार उतारे जा सकते हैं।

BJP First List में राजपूतों का दिखा दबदबा
⦁ बीजेपी ने पहली लिस्ट में कुल 71 सीटों में से 34 सीटें सवर्ण उम्मीदवारों को दी हैं। इनमें राजपूतों को 15 टिकट दिए गए हैं जो सवर्ण जातियों में सबसे ज्यादा है।
⦁ 11 उम्मीदवार भूमिहार जाति से उतारे गए हैं, जबकि ब्राह्मण समुदाय की बात करें तो 7 कैंडिडेट इस समुदाय से हैं। कायस्थ जाति से एक उम्मीदवार को मैदान में उतारा गया है।
⦁ 2020 विधानसभा चुनाव की बात करें, तो तब 19 राजपूत उम्मीदवार उतारे गए थे, जिसमें से 16 ने जीत दर्ज की थी। दो विधायक वीआईपी से तोड़े गए और एक ने उपचुनाव में जीत दर्ज की थी। इस तरह से कुल 19 राजपूत विधायक बने।
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Bihar Chunav में राजपूतों को क्यों मिल रहा इतना भाव
राजपूत आबादी की बात करें, तो यह बिहार में महज 4 फीसदी के करीब है। इसके बावजूद बीजेपी ने पहली ही लिस्ट में 15 राजपूतों को टिकट दिया है। इसके पीछे वजह बताई जा रही है कि राजीव प्रताप रूडी को मंत्री नहीं बनाने और आरके सिंह की हार के बाद अनदेखी जैसे मुद्दों को आधार बनाकर इस जाति की नाराजगी की बात कही जा रही है। बीजेपी सवर्ण वोट बैंक को जोड़कर रखना चाहती है और प्रदेश की 25 से 30 सीटें ऐसी हैं जहां ठाकुरों का प्रभाव माना जाता है। उत्तरी और दक्षिणी बिहार में मिलाकर ये सीटें हैं, इन पर सीधे तौर पर राजपूत समुदाय वोट बैंक को प्रभावित करता है।
राजपूतों के पास अपना वोट बैंक होने के साथ ही छिटपुट वोट को प्रभावित करने की क्षमता आज भी है। बिहार के सामाजिक जीवन को समझने वाले इस तथ्य की अनदेखी नहीं कर सकते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने ठाकुरों को सम्मान देकर गिले-शिकवे दूर करने की कोशिश की है।
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