Bihar Chunav: सीमांचल के उलझे सियासी समीकरण को सुलझाने के लिए PM Modi का अहम दौरा, समझें रणनीतिक गेम

Bihar Chunav: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले पीएम नरेंद्र मोदी का पूर्णिया दौरा बेहद अहम है। इस दौरे में पीएम पूर्णिया को एयरपोर्ट की सौगात देंगे। इसके अलावा, वह क्षेत्र के लिए कई बड़ी घोषणाएं कर सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा सिर्फ पूर्णिया तक सीमित नहीं है। यहां से वह पूरे सीमांचल को साधने की कोशिश करेंगे। सीमांचल के चार जिलों की 24 विधानसभा सीटों का समीकरण काफी उलझा हुआ है। पिछले पांच चुनावों में यहां अलग-अलग पार्टियों के पक्ष में नतीजे रहे हैं।

सीमांचल बिहार का वह इलाका है जिसे पिछले 15 सालों के नतीजों को देखते हुए किसी भी पार्टी के मजबूत गढ़ के तौर पर नहीं देखा जा सकता है। हालांकि, इसके बाद भी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पास यहां उम्मीदें रखने की वजह है। पिछले पांच में से तीन चुनाव में बीजेपी बड़ी ताकत बनकर उभरी है। बीजेपी को उम्मीद है कि एक बार फिर जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश की जाए, तो नतीजे पक्ष में जा सकते हैं।

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Bihar chunav में सीमांचल की भूमिका रह सकती है निर्णायक

बिहार विधानसभा चुनाव नतीजों में सीमांचल की 24 सीटें बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। पिछले 5 चुनाव से सीमांचल की सीटें बेहद कम अंतर से जीती जा रही हैं और यहां मुकाबला बेहद कड़ा रहता है। पिछली बार की 24 सीटों में से 10 सीटें 10 प्रतिशत से भी कम अंतर से तय हुई थीं। नौ सीटें ऐसी थीं जहां जीत का अंतर 20 प्रतिशत से भी कम था। 2015 के विधानसभा चुनाव में 14 सीटें ऐसी रही थीं जो सिर्फ 10 प्रतिशत के अंतर से जीती गई थीं। इस इलाके में मुस्लिम बहुल आबादी होने के बाद भी बीजेपी का 2010 और 2020 में स्ट्राइक रेट अच्छा रहा था। ऐसे में इतना स्पष्ट है कि मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण की काट जातीय समीकरण के जरिए निकाल सकती है।

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2010 और 2020 के चुनावों में भाजपा ने यहां क्रमशः 16 और 11 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इनमें 13 और आठ सीटें जीतीं थीं. इससे स्पष्ट है कि जीत का औसत (स्ट्राइक रेट) क्रमशः 81 और 73 फीसदी रहा था जो काफी अच्छा माना जा सकता है। अब एक बार फिर इस इलाके में बीजेपी पीएम मोदी के जोरदार चुनाव प्रचार के आधार पर माहौल बनाने में जुट गई है।

BJP का प्रदर्शन 2020 में भी रहा था शानदार

सीमांचल की 24 सीटों का पिछले चुनाव का हिसाब देखें, तो असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने 5 सीटें अमौर, बैसी, जोकिहाट, कोचटधामन, बहादुरगंज की जीती थीं। राहुल-तेजस्वी के महागठबंधन (RJD + कांग्रेस + CPI-ML) का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा था। RJD, कांग्रेस, CPI-ML ने मिलकर सिर्फ 7 सीटें जीती थीं। इसमें कांग्रेस ने 5, RJD ने1 और CPI-ML ने 1 सीट जीती थी। बीजेपी (BJP): 8 सीटें जीतकर सीमांचल में सबसे बड़ी पार्टी बनी थी और JD(U) के खाते में 4 सीटें आई थीं। इस चुनाव में एनडीए इस इलाके में अपने प्रदर्शन को बेहतर करने की तैयारी में जुट गई है। सूत्रों के मुताबिक, खुद अमित शाह ने सीमांचल के लिए प्लान बनाना शुरू कर दिया है। इसमें प्रचार रणनीति और बूथ मैनेजमेंट पर खास जोर रहेगा।

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