Bihar Chunav: 32 मुस्लिम बहुल सीटों पर ओवैसी उतारेंगे उम्मीदवार, महागठबंधन को टेंशन देने की तैयारी?
Bihar Chunav: बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार सीमांचल समेत कई मुस्लिम बहुल सीटों पर रोमांचक मुकाबला देखने को मिल सकता है। एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जाहिर की थी। हालांकि, पत्र लिखने के बावजूद भी सीमांचल में 6 सीटों की उनकी डिमांड पर तेजस्वी यादव और कांग्रेस ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। अब ओवैसी ने ऐलान कर दिया है कि उनकी पार्टी 32 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। ये सभी मुस्लिम बहुल सीटें हैं।
बिहार में मुस्लिमों का एकमुश्त वोट आरजेडी को मिलता रहा है। हालांकि, 2020 विधानसभा चुनाव में इसमें दरार पड़ी और सीमांचल में ओवैसी 5 सीटें जीतने में कामयाब रहे थे। चुनाव जीतने के बाद उनके चार विधायक आरजेडी में शामिल हो गए। ओवैसी अब खुलकर तेजस्वी यादव और महागठबंधन के खिलाफ संग्राम का ऐलान कर चुके हैं।

Bihar Chunav में इस बार मुस्लिम सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला
बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार कई सीटों पर रोमांचक मुकाबला देखने को मिल सकता है। 32 सीटों पर ओवैसी ने अपने उम्मीदवार उतारने का ऐलान करते हुए कहा है कि हमने 6 सीटें मांगी थी, लेकिन कांग्रेस और आरजेडी ने बड़ा दिल नहीं दिखाया। अब हम 32 सीटों पर चुनाव लड़कर उनको दिखाएंगे कि हम क्या कर सकते हैं। ये सभी 32 सीटें मुस्लिम बहुल हैं और यहां से ओवैसी के उम्मीदवार उतारने पर सीधे तौर पर आरजेडी के ही वोट बैंक में सेंध लगेगी। बिहार में इस बार प्रशांत किशोर भी मैदान में हैं और इस वजह से मुकाबला रोमांचक होने वाला है।
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असदुद्दीन ओवैसी ने सीमांचल की अपनी रैली में भी क्षेत्र की सभी 24 सीटें जीतने का दावा किया था। उन्होंने कांग्रेस और आरजेडी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने दोनों पार्टियों को घमंडी करार देते हुए कहा था कि इस बार जनता उन्हें दिखा देगी कि कौन उनका सही में प्रतिनिधित्व करता है। सीमांचल में पिछले चुनाव में मुस्लिम वोट बंटने का फायदा बीजेपी को हुआ था और पार्टी ने क्षेत्र में सबसे ज्यादा 8 सीटें जीती थीं।
Owaisi की पार्टी ने जारी की पहली लिस्ट
पहली सूची की घोषणा करते हुए एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने कहा था कि उनकी पार्टी सीवान, दरभंगा, समस्तीपुर, मोतिहारी, नवादा, जमुई, भागलपुर, सीतामढ़ी, मधुबनी, वैशाली, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, गया, और गोपालगंज सहित कई सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। इनमें से ज्यादातर सीटें अभी महागठबंधन और खास तौर पर आरजेडी के पास है।
ओवैसी की रणनीति से मिल सकता है बीजेपी को फायदा
ओवैसी ने सीमांचल में तूफानी चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया है। बीजेपी के लिए मुस्लिम बहुल सीटों पर वोट बंटना हमेशा फायदेमंद रहता है। ऐसी सीटों पर बीजेपी सोशल इंजीनियरिंग पर जोर देती है और इस बार बिहार चुनाव की कमान खुद अमित शाह ने संभाल ली है। शाह की खासियत ही सोशल इंजीनियरिंग के जरिए चुनावी गणित साधना मानी जाती है।
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