Bihar Chunav: तय होगा कई दिग्गजों का राजनीतिक भविष्य, कन्हैया-पप्पू यादव समेत इनकी भी दमखम का लगेगा अंदाजा!
Bihar Chunav: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में अब दो महीने से भी कम का वक्त बचा है। दिल्ली से लेकर पटना तक बैठकों का दौर जारी है। माना जा रहा है कि श्राद्ध पक्ष खत्म होते ही दोनों प्रमुख गठबंधन सीट बंटवारे का ऐलान कर देंगे। यह चुनाव लालू यादव के परिवार और पार्टी के राजनीतिक भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। इस चुनाव में प्रदेश के कई बड़े और कद्दावर नेताओं का भविष्य और राजनीतिक कद भी तय होगा। इसमें कांग्रेस के युवा तुर्क कन्हैया कुमार और पप्पू यादव जैसे कद्दावर नेता भी शामिल हैं।
लालू यादव के दोनों बेटों का राजनीतिक भविष्य कैसा होगा, यह भी इस चुनाव से ही तय होगा। तेजस्वी उनके घोषित उत्तराधिकारी हैं। अगर वह चुनाव जीतने और बहुमत का जादुई आंकड़ा छूने में सफल रहे, तो शायद सीएम भी बन जाएंगे। हालांकि, बड़े बेटे तेज प्रताप यादव पिता और परिवार से अलग अपना कोई स्वतंत्र अस्तित्व भी रखते हैं कि नहीं, यह इसी चुनाव से तय होगा। लालू परिवार से इतर इन चेहरों का भी राजनीतिक भविष्य इसी चुनाव से तय होगा।

Bihar Chunav दांव पर लगी है इन दिग्गजों की प्रतिष्ठा
कन्हैया कुमार: लेफ्ट पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए कन्हैया कुमार का राजनीतिक भविष्य भी बिहार चुनाव से काफी हद तक साफ हो जाएगा। राजनीति के जानकार कहते हैं कि कन्हैया की बिहार में सक्रियता खास आरजेडी और तेजस्वी यादव को खास पसंद नहीं है। अगर इस चुनाव में कांग्रेस उन्हें टिकट देती है या फिर कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलती है, तो इसके राजनीतिक संकेत होंगे। यह भी तय हो जाएगा कि पार्टी उन्हें भविष्य में बड़ा ओहदा देने के लिए तैयार कर रही है।
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पप्पू यादव: पप्पू यादव का प्रभाव पूर्णिया और मधेपुरा जैसे क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। वह सीमांचल और मिथिलांचल में भी अपना कुछ वोट बैंक रखते हैं। हालांकि, आरजेडी से निकाले जाने के बाद वह कांग्रेस में भी फिलहाल हाशिए पर ही हैं। इसके बावजूद पप्पू लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं। कांग्रेस में हैसियत और राजनीतिक भविष्य दोनों का अंदाजा इस चुनाव में पार्टी की तरफ से मिलने वाली भूमिका से तय हो जाएगा।
सम्राट चौधरी: बिहार में बीजेपी के पास अब तक सीएम के लिए कोई बड़ा और निर्विवाद चेहरा नहीं है। फिलहाल सम्राट चौधरी को लेकर यह चर्चा है कि अगर बीजेपी अपना सीएम बनाती है, तो वह एक विकल्प हो सकते हैं। फिलहाल सम्राट डिप्टी सीएम हैं और इस चुनाव नतीजों के साथ प्रदेश में पार्टी की स्थिति के साथ ही खुद सम्राट के कद का भी अंदाजा लगेगा।
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तेज प्रताप यादव: परिवार और पार्टी से निकाले जाने के बाद तेज प्रताप यादव ने अकेले ही मोर्चा संभाल लिया है। वह राघोपुर, महुआ समेत प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों का दौरा कर रहे हैं और आए दिन अपने ही भाई के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। इस चुनाव से यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि परिवार से निकाले जाने के बाद तेज प्रताप अपने दम पर कुछ कर भी सकते हैं या नहीं।












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