Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Bihar Chunav 2025: Giriraj Singh के विवादित बोल से NDA की ज़मीन खिसकने का ख़तरा, अपने नेता ने ही दे दी नसीहत!

Bihar Chunav 2025: बिहार में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही सियासत का पारा चढ़ चुका है। भाजपा नेताओं के लगातार दौरों, रणनीतिक बैठकों और रैलियों के बीच एक बार फिर वही पुराना सवाल खड़ा हो गया है, क्या चुनावी मौसम में उग्र बयानबाज़ी पार्टी की ज़मीन को मजबूत करती है या कमज़ोर?

शनिवार को केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मुसलमानों को लेकर बेहद विवादित टिप्पणी कर दी कि, "मुसलमान नमक हराम हैं, बीजेपी की योजनाओं का लाभ लेते हैं, लेकिन वोट नहीं देते।" यह कथन न केवल असंवैधानिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला है, बल्कि पार्टी की आधिकारिक लाइन 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' के भी प्रतिकूल है।

Bihar Chunav 2025

बिना नाम लिए अपने नेता ने ही किया बयान पर पलटवार
दिलचस्प है कि पार्टी के ही वरिष्ठ अल्पसंख्यक नेता शहनवाज़ हुसैन ने नाम लिए बिना इस बयान पर पलटवार किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की समावेशी नीति की याद दिलाई। यह घटना महज़ एक बयान तक सीमित नहीं है। यह पार्टी के भीतर उस अंतर्द्वंद्व का प्रतीक है। जहाँ एक ओर विकास और समावेश की राजनीति का आह्वान है।

वहीं दूसरी ओर ध्रुवीकरण की रणनीति पर भरोसा रखने वाले नेता हैं। बिहार जैसे बहुजातीय और बहुधर्मी राज्य में यह टकराव और भी गहरा असर डाल सकता है। सीमांचल, मिथिलांचल और मगध जैसे इलाक़े-जहां मुसलमान आबादी निर्णायक है, वहाँ ऐसे शब्द भाजपा की संभावनाओं को कमजोर कर सकते हैं।

बुनियादी ढांचे की सौगात भाजपा के लिए चुनावी पूंजी
प्रधानमंत्री मोदी 15 सितंबर को पूर्णिया और अररिया से नई रेल लाइनों और वंदे भारत जैसी परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। यह कार्यक्रम साफ़ तौर पर विकास की राजनीति पर जोर देता है। सीमांचल जैसे पिछड़े क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की सौगात भाजपा के लिए चुनावी पूंजी बन सकती है।

लेकिन विकास संदेश को जमीन पर उतारने के लिए पार्टी को अपने ही नेताओं की जुबान पर लगाम लगानी होगी। भाजपा की कोर कमेटी की पटना बैठक और तेजस्वी यादव की मुजफ्फरपुर सभा, दोनों इस बात का संकेत हैं कि 2025 की जंग अब सिर्फ़ संगठन या गठबंधन की ताकत पर नहीं, बल्कि जनता के विश्वास पर लड़ी जाएगी।

एनडीए का समीकरण अभी मजबूत दिख रहा है, पर गिरिराज जैसे बयान विपक्ष को हथियार दे सकते हैं। आरजेडी और कांग्रेस पहले ही "अल्पसंख्यक विरोधी भाजपा" के नैरेटिव को भुनाने की कोशिश में हैं। आख़िरकार, बिहार की जनता धार्मिक विभाजन से अधिक रोज़गार, शिक्षा, सड़क और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देती है।

प्रधानमंत्री मोदी का सीमांचल दौरा भाजपा के लिए बड़ा अवसर
विकास के ठोस एजेंडे के साथ प्रधानमंत्री मोदी का सीमांचल दौरा भाजपा के लिए बड़ा अवसर है। लेकिन यह तभी असरदार होगा जब पार्टी अपने भीतर की बयानबाज़ी की आग को बुझा सके। एनडीए को यह समझना होगा कि मतदाता अब सिर्फ़ नारे और ध्रुवीकरण से प्रभावित नहीं होता। गिरिराज सिंह जैसे नेताओं के बयान न केवल मुसलमान मतदाताओं को दूर करेंगे, बल्कि मध्यमार्गी हिंदू वोटरों में भी असहजता पैदा कर सकते हैं।

भाजपा नेतृत्व को अनुशासन और संवाद पर जोर देते हुए स्पष्ट संदेश देना होगा कि पार्टी की राजनीति सबका साथ पर टिकी है, सबका अपमान पर नहीं। बिहार चुनाव की असली परीक्षा यही होगी, क्या भाजपा विकास और समावेश की राजनीति को केंद्र में रख पाती है, या फिर कुछ नेताओं की जुबान उसकी ही सियासी जमीन खिसकाती है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+