Bihar Chunav 2025: बदलते पाले और बदलती तस्वीर, कांग्रेस के MLA ने दिया इस्तीफ़ा, NDA की तरफ़ से लड़ेंगे चुनाव
Bihar Chunav 2025: बिहार की सियासत में एक बार फिर से पाला बदलने का सिलसिला तेज़ हो गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विश्वासमत के दौरान पाला बदलने वाले कांग्रेस विधायक मुरारी प्रसाद गौतम ने बुधवार को विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर एक नया राजनीतिक संदेश दे दिया है।
सियासी गौतम अब भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। रोहतास जिले की चेनारी (सुरक्षित) सीट से विधायक रहे गौतम का यह कदम सिर्फ एक व्यक्तिगत राजनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि बिहार की बदलती चुनावी बिसात का संकेत है, जहाँ वफादारियाँ अब विचारधारा से ज़्यादा अवसर के तराज़ू पर तौली जा रही हैं।

मुरारी प्रसाद गौतम 2020 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने थे और बाद में महागठबंधन सरकार में मंत्री भी रहे। लेकिन 2024 में नीतीश कुमार के विश्वासमत के दौरान उन्होंने एनडीए खेमे के पक्ष में मतदान कर राजनीति में अपनी नई दिशा तय कर दी थी। अब उनका औपचारिक रूप से कांग्रेस से त्यागपत्र देना यह साफ़ कर देता है कि चेनारी सीट भाजपा के खाते में जा रही है।
कांग्रेस के लिए झटका: बिहार में पहले से ही संगठनात्मक रूप से कमजोर कांग्रेस को यह इस्तीफा और कमजोर कर देगा। दलित आरक्षित सीट पर एक सक्रिय और ग्राउंड कनेक्ट वाले विधायक का जाना कांग्रेस की जातीय-सामाजिक पकड़ को नुकसान पहुंचाएगा।
भाजपा के लिए बढ़त: भाजपा के लिए यह कदम रणनीतिक रूप से फायदेमंद है। चेनारी जैसी एससी-बहुल सीट पर स्थानीय नेतृत्व की कमी को गौतम के आने से भरपाई होगी। इससे पार्टी को रोहतास-बक्सर-बिहिया बेल्ट में सामाजिक समीकरण साधने में मदद मिलेगी।
महागठबंधन के लिए संकेत: यह इस्तीफा सिर्फ कांग्रेस की कमजोरी नहीं दिखाता, बल्कि महागठबंधन के भीतर चल रही असंतोष की लहर को भी उजागर करता है। यह वही लहर है जो आने वाले महीनों में और कई नेताओं को पाला बदलने के लिए प्रेरित कर सकती है।
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नीतीश कुमार के लिए चुनौती: हालांकि गौतम पहले ही विश्वासमत के दौरान एनडीए का समर्थन कर चुके थे, लेकिन अब जब वे भाजपा में औपचारिक रूप से शामिल हो रहे हैं, तो जदयू के लिए यह संदेश है कि सहयोगी दल भाजपा अब अपना आधार मजबूत करने में लगी है।
कास्ट और ग्राउंड फैक्टर: चेनारी सीट पर पासवान, चमार, रविदास और अन्य अनुसूचित जाति मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। 2020 में गौतम को इन समुदायों के साथ यादव और मुस्लिम मतों का समर्थन मिला था। लेकिन अब भाजपा का झंडा थामने के बाद उन्हें इन समुदायों में नई समीकरण बनानी होगी। भाजपा गौतम के सहारे यहां एससी-ओबीसी गठजोड़ को मजबूत करने की कोशिश करेगी।
कांग्रेस की दुविधा: कांग्रेस अब इस सीट पर नए उम्मीदवार की तलाश में है, लेकिन उसके पास न तो ज़मीनी संगठन है, न कोई ऐसा चेहरा जो गौतम जैसी पकड़ रखता हो। यह स्थिति साफ़ बताती है कि **कांग्रेस के पास अब बिहार में "चेहरे" नहीं, सिर्फ "नाम" बचे हैं।
मुरारी प्रसाद गौतम का इस्तीफा बिहार चुनाव 2025 की राजनीति में एक और "साइलेंट सिग्नल" है। आने वाले महीनों में और भी कई पाले बदलेंगे, कई दोस्त दुश्मन बनेंगे, और कई दुश्मन हाथ मिला लेंगे। यह बिहार की वही पुरानी सियासत है। जहाँ कुर्सी के समीकरण हर मौसम के साथ बदल जाते हैं। राजनीति में न स्थायी दोस्त होते हैं, न स्थायी दुश्मन सिर्फ स्थायी हित, और मुरारी गौतम का निर्णय उसी स्थायी सच्चाई की एक और पुष्टि है।












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