गुजरात और हिमाचल में बीजेपी की जीत से बिहार के नेताओं को हुआ बड़ा फायदा

अब ऐसा कहा जा रहा है कि चुनाव में जीत के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की नई कैबिनेट में बिहार से जुड़े ऐसे नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

पटना। गुजरात और हिमाचल प्रदेश में बीजेपी और कांग्रेस के बीच चली कांटे की टक्कर में बिहार के कुछ नेताओं के पार्टी में मान बढ़ने के आसार दिख रहे हैं। क्योंकि गुजरात और हिमाचल प्रदेश जीत के बाद बिहार की राजनीति पर भी असर पड़ना तय है। बिहार भाजपा के कई नेताओं की पुछ पार्टी में बढ़ जाएगी और तो और बिहार भाजपा के कई नेताओं के भविष्य पर इसका सकारात्मक असर दिखेगा। बिहार के नेताओं ने गुजरात और हिमाचल प्रदेश चुनाव के दौरान काफी मेहनत किया और पार्टी को शानदार जीत भी दिलाई है। जिसमें बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी संजय मयूख और भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश वर्मा के साथ-साथ आधा दर्जन बिहारी नेता शामिल थे। अब ऐसा कहा जा रहा है कि चुनाव में जीत के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की नई कैबिनेट में बिहार से जुड़े ऐसे नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। आपको बता दें की केंद्रीय मंत्री के पद से आजाद होने के बाद पूर्व मंत्री राजीव प्रताप रूडी समेत कई ऐसे बिहारी नेता थे, जिन्होंने संगठन में दमदार भूमिका निभाते हुए गुजरात और हिमाचल प्रदेश चुनाव में काफी मेहनत की थी।

Bihar BJP leaders win big victory in Gujarat and Himachal Pradesh

बिहार भाजपा के दो नेताओं को संगठन के तौर पर पार्टी में राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी दी गई। जिसमें से एक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडे हैं जो बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री हैं। जिन्हें हिमाचल प्रदेश चुनाव में चुनाव प्रभारी बनाया गया था और उन्हें ही चुनाव की नैया पार लगाने की जिम्मेदारी दी गई थी। तो दूसरे नेता प्रदेश प्रवक्ता योगेंद्र पासवान है। जो अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग में सदस्य बन चुके हैं। हालांकि भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में बिहार से पिछड़ी जाति का कोई भी नहीं है। ब्राह्मण, राजपूत और दलित बिरादरी का भी कोई प्रतिनिधि नहीं है, दो नेता रेनू देवी और रजनीश कुमार बिहार की अगवानी कर रहे हैं।

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रही रेनू देवी, पश्चिम चंपारण से हैं जो अति पिछड़ा वर्ग से आती हैं। वहीं रजनीश कुमार बिहार के बेगूसराय जिले के हैं जो सवर्ण हैं। केंद्रीय हिस्सेदारी से वंचित वर्गों के नेता अब उम्मीद पाले हुए हैं कि अगर दो महीने के भीतर राष्ट्रीय संगठन में फेरबदल हुया तो अब उन्हें जगह मिल सकती है। अब गुजरात और हिमाचल प्रदेश में बीजेपी की जीत के बाद बिहार के नेताओं का मान बढ़ने कि भी उम्मीद है।

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