Bahubali Files: AK-47 और ग्रेनेड वाले ‘छोटे सरकार’, Anant Singh के 5 किस्से-जब गोलियों से छलनी बिहार का सीना!
Bihar Bahubali Files Hindi: बिहार की राजनीति और अपराध की दुनिया हमेशा से एक दूसरे के साथ जुड़ी रही है। लेकिन जब बात आती है बाहुबली नेताओं की, तो 'अनंत कुमार सिंह' का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। मोकामा की मिट्टी से निकला ये नाम आज भी लोगों के दिलों में खौफ पैदा कर देता है।
कहा जाता है कि मोकामा की गलियों में कभी उसकी इजाजत के बिना पत्ता तक नहीं हिलता था। लोग उसे 'छोटे सरकार' कहकर बुलाते थे, और उसका कहा हुआ ही कानून माना जाता था। उसके इलाके में पुलिस भी कदम रखते हुए दो बार सोचती थी।

अनंत सिंह का सफर सिर्फ अपराध तक सीमित नहीं रहा। उसने सियासत में भी अपनी पकड़ मजबूत की। हथियारों का जखीरा, खूनी गैंगवार और राजनीतिक रसूख ने उसे बिहार का 'क्राइम किंग' बना दिया। उसकी कहानी में गोलियों की आवाजें, सत्ता का खेल और डर की दास्तानें सब कुछ शामिल हैं। मोकामा में उसका राज इस कदर था कि विरोधी नाम लेते ही कांप उठते थे। चुनावों के वक्त उसका असर इतना था कि कई नेता उसके साथ जुड़ने में ही अपनी सुरक्षा समझते थे।
लेकिन हर बाहुबली की तरह, अनंत सिंह की कहानी में भी गिरावट आई। पुलिस और प्रशासन ने धीरे-धीरे उसके साम्राज्य को तोड़ना शुरू किया। कई केसों में गिरफ्तारी हुई, और अदालत के चक्कर लगने लगे। आइए, इस खूंखार बाहुबली की कहानी, जिसने मोकामा को अपने खौफ का किला बनाया और बिहार को दहशत की आग में झोंक दिया...
Bihar 'Chhote Sarkar' Story Hindi: गरीब गांव से 'छोटे सरकार' तक का सफर
पटना जिले के बरहिया थाना क्षेत्र के लदमा गांव में जन्मा अनंत सिंह एक साधारण किसान परिवार से था। लेकिन 90 के दशक में बिहार की अराजकता, गैंगवार और सियासी उथल-पुथल ने उसे अपराध की दुनिया का 'बादशाह' बना दिया। कॉलेज के दिनों में दबंगों की संगत और हथियारों का शौक उसे गलियों से गैंगस्टर की कुर्सी तक ले गया।
देखते ही देखते मोकामा, बाढ़ और आसपास के इलाकों में उसका गैंग बन गया, और हत्या, अपहरण और रंगदारी के किस्सों ने उसे 'छोटे सरकार' की उपाधि दे दी।

AK-47 और ग्रेनेड का 'डॉन': अपराधों की फेहरिस्त
अनंत सिंह के खिलाफ 38 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें 7 हत्याएं, 11 हत्या के प्रयास, 4 अपहरण और अनगिनत रंगदारी के केस शामिल हैं। बिहार का शायद ही कोई थाना हो, जहां उसका नाम न गूंजता हो। लेकिन 2019 का वह मामला, जिसने उसे सुर्खियों में ला दिया, आज भी बिहार की क्राइम हिस्ट्री का सबसे खौफनाक अध्याय है।
2019 का हथियार कांड: पुलिस ने अनंत सिंह के पैतृक घर लदमा में छापा मारा। वहां से AK-47 राइफल, हैंड ग्रेनेड और 26 जिंदा कारतूस बरामद हुए। यह जखीरा इतना खतरनाक था कि पुलिस भी दंग रह गई। 2022 में कोर्ट ने इस मामले में अनंत को 10 साल की सजा सुनाई। यह AK-47 ही थी, जिसने उसे बिहार के बाहुबलियों में सबसे ऊपर खड़ा किया।

Anant Singh Terror 5 Stories: अनंत सिंह के खौफ के टॉप 5 किस्से: गोलियां, खून और दहशत
अनंत सिंह की दहशत की कहानियां मोकामा की गलियों में आज भी गूंजती हैं। यहां उसके 5 सबसे खौफनाक कारनामे हैं, जो बिहार के क्राइम इतिहास में दर्ज हैं:-
- Chaudhry Sahib Murder Case: चौधरी साहब हत्याकांड (2000): मोकामा का एक हाई-प्रोफाइल मर्डर, जिसमें स्थानीय दबंग चौधरी साहब को दिनदहाड़े गोलियों से भून दिया गया। पुलिस ने इस हत्या में अनंत सिंह का नाम जोड़ा। यह हत्या इलाके में वर्चस्व की जंग का हिस्सा थी, जिसने मोकामा को खून से रंग दिया।
- 2. AK-47 से गैंगवार (2000 के दशक): अनंत सिंह ने मोकामा में रेलवे ठेकों और बालू-कोयला कारोबार पर कब्जे के लिए खुलेआम AK-47 का इस्तेमाल किया। कई बार सड़कों पर फायरिंग की घटनाएँ हुईं, जिनमें उसके विरोधी मारे गए। इन गैंगवॉर ने मोकामा को युद्ध का मैदान बना दिया।
- 3. Barh Kidnapping-Murder Case- बाढ़ अपहरण-हत्या मामला (17 जून 2015): चार लोगों को बाढ़ (Barh) इलाके से अपहरण करने की घटना हुई थी, जिनमें से एक व्यक्ति (Putush Yadav alias Pawan Kumar) की हत्या हो गई। पुलिस ने कथित तौर पर आरोपियों से पूछताछ के दौरान यह दावा किया कि ये सब अनंत सिंह के आदेश पर हुआ था। पुलिस ने 24 जून 2015 को अनंत सिंह को गिरफ्तार किया था।

- 4. बिहटा अपहरण (Bihta Kidnapping) और जबरन वसूली: बिहटा में बिल्डर का अपहरण किया गया, और फिर जब्त की गई रकम की मांग की गई। अनंत सिंह इस मामले में आरोपी थे। पुलिस ने उनके घर से खाली मैगजीन, खून से सने कपड़े आदि बरामद किए थे। मामला 2014-15 में दर्ज हुआ था, गिरफ्तारी हुई जून 2015 में।
- 5. भोला और मुकेश सिंह हत्या (Bhola-Mukesh Singh Murder) की साजिश (2015): एक वायरल ऑडियो टेप ने बिहार को हिलाकर रख दिया। इसमें अनंत सिंह की आवाज में दो भाइयों 'भोला सिंह और मुकेश सिंह' की हत्या की साजिश की बात सामने आई। पुलिस ने ऑडियो की पुष्टि की, और यह केस अनंत के खिलाफ सबसे बड़े सबूतों में से एक बना।
पुलिस मुठभेड़ और चकमा (2005-2015)
कई बार पुलिस ने अनंत को घेरने की कोशिश की, लेकिन वह अपने सियासी रसूख और गैंग की ताकत से बच निकलता। एक बार छापेमारी से पहले उसने अपने गार्ड और CCTV हटा दिए, जिससे पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा। उसकी चालाकी ने पुलिस को भी हैरान कर दिया।
मोकामा का 'साम्राज्य': रॉबिनहुड या राक्षस?
अनंत सिंह का मोकामा (Mokama Crime News) में ऐसा जलवा था कि लोग उसे 'छोटे सरकार' कहकर पुकारते थे। रेलवे ठेके, बालू और कोयला कारोबार पर उसका एकछत्र राज था। विरोधी उससे खौफ खाते थे, लेकिन स्थानीय लोग उसे रॉबिनहुड मानते थे। वह गरीबों की मदद करता, गांव में स्कूल और मंदिर बनवाता, और चौक-चौराहों पर जनता से सीधे मिलता। लेकिन उसकी यह छवि खून-खराबे और दहशत की नींव पर टिकी थी। रात ढलते ही मोकामा में सन्नाटा छा जाता, और लोग दरवाजे बंद कर लेते।
सियासत का 'संरक्षक': अपराध और सत्ता का गठजोड़
90 के दशक में लालू-राबड़ी और बाद में नीतीश कुमार के दौर में अनंत सिंह ने सियासत और अपराध का खतरनाक गठजोड़ बनाया।
- 2005, 2010, 2015 में विधायक: जेडीयू के टिकट पर वह मोकामा से विधायक बना। जेल में रहते हुए भी उसने 2015 का चुनाव जीता।
- सियासी रसूख: कहा जाता है कि नीतीश कुमार जैसे बड़े नेताओं के साथ उसकी नजदीकी थी। उसका प्रभाव बिहार की सियासत में गहरा था।
- बूथ कैप्चरिंग और दहशत: चुनावों में उसकी गैंग बूथ कैप्चरिंग और वोटरों को डराने का काम करती थी।
अनंत सिंह सिर्फ अपराधी नहीं, बल्कि मोकामा का 'सिस्टम' था। उसकी मर्जी के बिना इलाके में पत्ता भी नहीं हिलता था।

पुलिस बनाम 'छोटे सरकार': एक लंबी जंग
पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने खुलासा किया कि अनंत सिंह का खौफ खत्म करना पुलिस की सबसे बड़ी चुनौती थी। कई बार मुठभेड़ों और छापेमारी के बावजूद वह अपने रसूख से बच निकलता। 2015 में बाढ़ में एक हाई-प्रोफाइल छापे में पुलिस को चकमा देकर वह फरार हो गया। लेकिन 2019 में दिल्ली में उसकी गिरफ्तारी ने उसके साम्राज्य को झटका दिया। 2022 में AK-47 केस में 10 साल की सजा ने उसे सलाखों के पीछे पहुंचाया।
Ananth Kumar Singh Criminal Case: कितने क्रिमिनल केस दर्ज? कितने पढ़े-लिखे?
एडीआर के मुताबिक, अनंत कुमार सिंह पर 38 क्रिमिनल केस दर्ज हैं। अनंत कुमार सिंह कितने पढ़े-लिखे हैं, इसकी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है। 'छोटे सरकार' ने सिर्फ साक्षर खुद को बताया है। बात करें तो, अनंत कुमार ने 68 करोड़ रुपए की अपनी संपत्ति बताई है, जबकि 17 करोड़ की देनदारियां हैं।

Who Is Ananth Kumar Singh Wife: कौन है अनंत कुमार की पत्नी?
अनंत कुमार सिंह की पत्नी का नाम नीलम देवी (Neelam Devi) है। वर्तमान में नीलम देवी मोकामा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। दोनों के दो जुड़वां बेटे अभिषेक (Abhishek) और अंकित (Ankit) हैं।
10 साल की सजा, फिर कैसे जेल से बाहर?
अनंत सिंह पर हथियार अधिनियम (Arms Act) और उनसे जुड़े मामले लगाये गए थे और उन्हें दोषी ठहराया गया। 14 जून 2022 को पटना एमपी/एमएलए कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया और 10 वर्ष की सजा सुनाई गई। इस सजा के कारण उनकी विधायक पद से सदस्यता समाप्त हो गई। बाद में, पटनाहाई कोर्ट ने उन्हें कुछ मामलों में सबूतों की कमी पर बरी किया और 16 अगस्त 2024 को उन्हें बेउर जेल से रिहा किया गया।
इसी बीच जनवरी 2025 में मोकामा-नौरंगा-जलालपुर में फायरिंग की घटना हुई, जिसमें अनंत सिंह नाम जुड़े। उन्होंने 24 जनवरी 2025 को आत्मसमर्पण किया। मामला 'सोनू-मोनू फायरिंग केस'के नाम से प्रसिद्ध है। 6 अगस्त 2025 को पटनाहाई कोर्ट ने उन्हें जमानत दी और वे बेउर जेल से बाहर आए। इस जमानत से बाहर आने के बाद उन्होंने राजनीति में वापसी की और जेडीयू (JDU) टिकट पर मोकामा से नामांकन की घोषणा की।
खौफ की विरासत: आज भी गूंजता नाम
आज अनंत सिंह जेल से बाहर है, बिहार का जंगलराज किताबों के पन्नों में है, लेकिन खौफ मोकामा की गलियों में आज भी जिंदा है। लोग कहते हैं, 'एक वक्त था, जब छोटे सरकार का नाम ही काफी था।' उसका नाम बिहार के अपराधी इतिहास में खून की स्याही से लिखा गया है। 38 केस, AK-47 का जखीरा, और रॉबिनहुड की छवि-यह सब अनंत सिंह को बिहार का 'छोटे सरकार' बनाता है। अनंत सिंह की कहानी बिहार की उस सियासत और अपराध का दस्तावेज है, जहां बाहुबलियों ने अपनी हुकूमत कायम की, और कानून उनके सामने बौना रहा।
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