क्या सुभाषिनी और लव सिन्हा जैसे युवा चेहरों से कांग्रेस कर पाएगी अपना कायाकल्प?

क्रिकेट की तरह राजनीति भी अनिश्चताओं का खेल है। कब पासा पलट जाए कोई नहीं जानता। गैरकांग्रेसवाद की पिच पर पहले ही मैच में सेंचुरी मारने वाले शरद यादव की बेटी सुभाषिनी राव ने अब कांग्रेस की जर्सी पहन ली है। कांग्रेस उन्हें मधेपुरा के बिहारीगंज सीट से मैदान में उतारने वाली है। उनका मुकाबला जदयू के निरंजन कुमार मेहता से होगा। सुभाषिनी फिलहाल अपनी ससुराल गुड़गांव में रहती हैं लेकिन अब अपनी राजनीति पारी का आगाज करने के लिए वे अपने पिता की कर्मभूमि मधेपुरा (बिहारीगंज) आने वाली हैं। इसी तरह मशहूर अभिनेता और कांग्रेस के नेता शत्रुघन सिन्हा के बेटे लव सिन्हा को पटना के बांकीपुर सीट से मैदान में उतारा है। क्या कांग्रेस इन युवा और नये खिलाड़ियों की बदौलत बिहार में अपनी पारी को जमा पाएगी? 27 विधायकों वाली कांग्रेस 70 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और उस पर अपनी क्षमता को साबित करने का भारी दबाव है। कांग्रेस के टैलेंट हंट स्कीम के तहत देशभर से चर्चित लोगों को खोज कर बिहार लाया जा रहा है ताकि वे चुनाव लड़ कर पार्टी की साख को जिंदा रख सकें।

क्या सुभाषिनी और लव सिन्हा जैसे युवा चेहरों से कांग्रेस कर पाएगी अपना कायाकल्प?

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    सुभाषिनी राव की ससुराल

    सुभाषिनी राज राव दिग्गज समाजवादी नेता शरद यादव की बेटी हैं। उनकी शादी 2012 में हरियाणा के राजकमल राव से हुई। राजकमल राव की जब सुभाषिनी से शादी हुई थी उस समय राजकमल के पिता राव कमलवीर सिंह हरियाणा जदयू के प्रदेश अध्यक्ष थे। शरद यादव तब जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे और सांसद भी थे। राव कमलवीर सिंह के परिवार का हरियाणा के अहिरवाल में बहुत प्रभाव रहा है। कमलवीर सिंह के पिता राव महावीर सिंह 1966 में सहना से निर्दलीय विधायक चुने गये थे। फिर वे कांग्रेस में आ गये और कांग्रेस पार्टी के टिकट पर दो बार विधायक चुने गये। 1972 में महावीर राव हरियाणा सरकार में मंत्री भी रहे। महावीर सिंह के पिता राव मोहर सिंह आजादी के पहले स्टेट लेजिस्लेटिव काउंसिल के मेम्बर थे। सुभासिनी के ससुर राव कमलवीर सिंह ने 2005 और 2009 का विधानसभा चुनाव लड़ा था लेकिन जीत नहीं पाये थे।

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    सुभाषिनी क्यों गयीं कांग्रेस में ?

    शरद यादव के समधी बनने के बाद राव कमलवीर सिंह जदयू संगठन में बहुत सक्रिय रहे। हरियाणा में उन्होंने अपने प्रभाव से जदयू को खड़ा करने की कोशिश की। लेकिन जब 2017 में शरद यादव की नीतीश से खटपट शुरू हुई तो कमलवीर सिंह भी जदयू की राजनीति में कम रुचि लेने लगे। आखिरकार 2019 में कमलवीर सिंह कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गये। तब कमलवीर सिंह ने कहा था कि कांग्रेस में आ कर वे अपने पुरखों की पार्टी में आ गये। कमलवीर सिंह गुड़गांव के जमींदार परिवार से ताल्लुक रखते हैं और गुड़गांव में उनकी आलिशान कोठी है। 2019 के विधानसभा चुनाव में कमलवीर सिंह ने गुड़गांव जिले की बादशाहपुर सीट से चुनाव लड़ा था लेकिन वे हार गये थे। कांग्रेस नेता के परिवार की बहू के होने के कारण सुभाषिनी ने भी इसी पार्टी से अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत करने का फैसला किया। उन्होंने दिल्ली में जब कांग्रेस की सदस्यता ली तो उन्होंने सुर्खियां बटोर लीं। बिना किसी मेहनत के ही उन्हें प्रचार मिल गया।

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    सुभाषिनी, मोदी और नीतीश की कर चुकी हैं तारीफ

    सुभासिनी पॉलिटिकल साइंस से ग्रेजुएट हैं और उन्होंने एमबीए की डिग्री भी ली है। जब वे कांग्रेस में शामिल नहीं हुईं थीं तब उन्होंने 27 नवम्बर 2020 को एक बयान दिया था जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और नीतीश कुमार की तारीफ की थी और आभार जताया है। शरद यादव की तबीयत अभी खराब है और वे स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं। सुभाषिनी ने अपने बयान में कहा था, मेरे पिता शरद यादव की तबीयत में सुधार हो रहा है। मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और केन्द्रीय स्वास्थ्यमंत्री डॉ. हर्षवर्धन की बेहद शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मेरे पिता की तबीयत का व्यक्तिगत रूप से ख्याल रखा। इस मुश्किल समय में सहयोग के लिए मैं आपसभी की आभारी हूं। सुभाषिनी ने नीतीश कुमार के प्रति भी आभार प्रगट किया था। “नीतीश कुमार जी ने मुझे कई बार व्यक्तिगत रूप से फोन कर पिता की तबीयत के बारे में पूछा था। माननीय नीतीश कुमार ने मेरे परिवार के प्रति जो स्नेह और सहानुभूति दिखायी, मैं इसके लिए उनकी शुक्रगुजार हूं।” राजनीति कारणों से शरद यादव और नीतीश कुमार के रिश्ते में पिछले कुछ साल से कड़वाहट रही है। लेकिन अब सुभाषिनी ने उनके प्रति आभार प्रगट कर ये बता दिया कि दोनों के रिश्तों पर जमी बर्फ अब पिघल रही है।

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    लव सिन्हा की राजनीतिक पारी

    शत्रुघ्न सिन्हा की पुत्री सोनाक्षी सिन्हा सफल एक्ट्रेस होने की वजह से तो चर्चा में रहती हैं लेकिन उनके पुत्र लव सिन्हा को उतना एक्सपोजर नहीं मिला। वे लाइमलाइट में रहने की कोशिश भी नहीं करते हैं। वैसे लव सिन्हा ने भी फिल्मों में किस्मत आजमाने की कोशिश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली। लव ने 2010 में रिलीज हुई फिल्म 'शादियां’ में हीरो की भूमिका निभायी थी। फिर वे 2018 में आयी मल्टीस्टारर फिल्म 'पलटन’ में दिखायी पड़े। जेपी दत्ता की फिल्म पलटन चल नहीं पायी इसलिए लव सिन्हा का फिल्मी सफर आगे नहीं बढ़ पाया। फिल्मों में नाकाम होने के बाद लव अपने को व्यवसाय संभालने लगे। लोकसभा चुनाव के समय वे अपने पिता के प्रचार में सक्रिय रहे थे। लव सिन्हा को राजनीति का बहुत कम अनुभव है। वे अपने पिता के नाम के भरोसे ही चुनाव मैदान में उतरे हैं। जिस बांकीपुर सीट से वे कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं उस इलाके में ही उनका पुस्तैनी घर है। बांकीपुर सीट पर अभी भाजपा के नितिन नवीन का कब्जा है। इस चुनाव क्षेत्र में कायस्थ मतदाताओं की आबादी निर्णायक है। नितिन नवीन और लव सिन्हा एक ही जाति से आते हैं। अगर लव सिन्हा को शत्रुघ्न सिन्हा के नाम और जाति का फायदा मिल गया तो नतीजे बदल भी सकते हैं। ध्यान रहे कि इसी सीट से बिहार की चर्चित युवा नेत्री पुष्पम प्रिया भी चुनाव लड़ रही हैं। इन तीन उम्मीदवारों की लड़ाई में ऊंट किसी भी करवट बैठ सकता है।

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