पुष्पम प्रिया की पहली सूची भेड़चाल वाली पार्टियों से क्यों है अलग, डालिए एक-एक कैंडिडेट पर नजर
“पहले वे वे नजरअंदाज करेंगे, फिर मजाक उड़ाएंगे, फिर वे आपसे लड़ेंगे और तब आप जीत जाएंगे।”- महात्मा गांधी
बिहार चुनाव में मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार पुष्पम प्रिया चौधरी गांधी जी के इसी सूत्र वाक्य से प्रेरित हो कर सियासत की नयी इबारत लिखने निकली हैं। पिछले छह सात-महीनों के दौरान उन्होंने राजनीति के स्टीरियोटाइप इमेज को तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रखी है। अब उन्होंने अपने उम्मीदवारों के चयन में भी नये प्रयोग किये हैं। उनके प्रत्याशियों की सूची जमीन से जुड़े जुझारू सोशल एक्टिविस्ट हैं तो डॉक्टर, प्रोफेसर, शिक्षक और पूर्व सैनिक भी। उनके प्रत्याशियों के चयन का पैमान आम राजनीतिक दलों से बिल्कुल अलग है। गांव-गांव, शहर-शहर घूम कर उन्होंने अपने उम्मीदवारों की खोज की है। ये सभी लोग अपने-अपने क्षेत्र के सफल लोग हैं जिन्हें पुष्पम प्रिया ने एक नयी राजनीतिक पहचान दी है।

प्लुरल्स के नायाब नगीने
विजय कुमार यादव को भागलपुर के कहलगांव से प्लुरल्स का उम्मीदवार बनाया गया है। वे प्रोफेसर हैं और करीब 15 साल से मैथेमेटिक्स पढ़ा रहे हैं। विजय कुमार यादव का जीवन शिक्षा के लिए समर्पित है। वे मैथेमेटिक्स, गांधीयन थॉट और हिन्दी से ट्रिपल एमए हैं। वे सामाजिक सरोकार वाले शिक्षक हैं। अपने व्यस्त दिनचर्या में से समय निकाल कर वे बच्चों को मुफ्त पढ़ाते भी हैं। इसके पहले उन्होंने पढ़ाने के सिवा किसी और चीज में दिलचस्पी नहीं दिखायी। लेकिन जब पुष्पम प्रिया ने राजनीति के नवाचार का शंखनाद किया तो उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया। कहलागांव कांग्रेस के दिग्गज नेता सदानंद सिंह का गढ़ है। वे यहां से नौ बार विधायक चुने जा चुके हैं। अब प्रोफसर विजय कुमार यादव का मुकाबला सदानंद सिंह जैसे मजबूत नेता से होगा। इसी तरह करीब 27-28 साल की शालिनी कुमारी को मुंगेर से प्लुरल्स का प्रत्याशी बनाया गया है। उन्होंने जियोलॉजी (भूविज्ञान) में एमफिल और पीएचडी की है। शालिनी ने पेयजल की शुद्धता पर सघन शोध किया है। शालिनी रिसर्च स्कॉलर थीं लेकिन पुष्पम प्रिया ने उन्हें बिहार के बदलाव के लिए नेता बना दिया। इसी तरह बांका से चुनाव लड़ने वाले काशी कांत सिंह इंडियन नेवी के रिटायर सैनिक हैं। वे बांका में बच्चों के लिए स्कूल चला रहे थे कि उन्हें प्लूरल्स की तरफ से चुनाव लड़ने का ऑफर मिला।

पुष्पम ने एससी सीट के योग्य उम्मीदवारों को खोजा
पुष्पम ने बोध गया सुरक्षित सीट पर फैशन डिजाइनर कुमारी दिव्या आनंद को उम्मीदावर बनाया है। दिव्या निफ्ट में पढ़ी हैं और क्राफ्ट एंड फैशन डिजाइनिंग की एक्सपर्ट हैं। फैशन की दुनिया में नये मुकाम बनाने वाली दिव्या अब पॉलिटिकल रिफॉर्म के लिए चुनाव मैदान में कूदी हैं। कैमूर के मोहनिया सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ने वाल सोनू कुमारी जमीन से जुड़ी सोशल एक्टिविस्ट हैं। उन्होंने दलितों पर अत्याचार और शोषण के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए 19 साल की उम्र में ही घर-बार छोड़ दिया था। वे बिना किसी प्रचार और शोर शराबे के अपना काम कर रहीं थीं। पुष्पम ने उन्हें खोज निकाला और अपना कैंडिडेट बना दिया। इसी तरह इमामगंज रिजर्व सीट से चुनाव लड़ रहीं रिंकू देवी खेती करती हैं। उनकी कोई राजनीति पहचान नहीं थी लेकिन जिस तरह महिला हो कर भी किसान के रूप अपनी पहचान बनायी ये बात पुष्पम को भा गयी। सिंकदरा सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ने वाले प्रीतम कुमार डॉक्टर हैं तो रजौली रिजर्व सीट से मैदान में उतरे रंजीत कुमार एसोसिएट प्रोफेसर हैं।

कोई महिला किसान तो कोई गोल्डमेडलिस्ट
औरंगाबाद के नबीनगर से संजू देवी को टिकट मिला है। वे ग्रेजुएट हैं लेकिन उन्होंने आधुनिक खेती को अपने जीवन का आधार बनाया है। वे ऑर्गेनिक खेती के लिए जानी जाती हैं। उन्हें अमरूद और आलू के ऑर्गेनिक उत्पादन के लिए कई पुरस्कार मिल चुके हैं। वे पहले भी सामाजिक राजनीति रूप से सक्रिय रही हैं। भागलपुर के सुल्तानगंज से चुनाव मैदान में उतरी किरण मिश्रा ने पॉलिटिकल साइंस और गांधीयन थॉट में एमए किया है। उन्हें यूनिवर्सिटी में टॉप करने के लिए गोल्डमेडल मिला है। वे सुल्तानगंज नगर परिषद की सदस्य रहीं हैं। भोजपुर के बड़हरा से पूजा सिंह चुनाव लड़ रही हैं। पूजा ने इकोनॉमिक्स से ग्रेजुएशन करने के बाद बीएड की और शिक्षक बन गयी। वे पिछले 12 साल से पढ़ा रहीं थी लेकिन अब चुनाव लड़ेंगी।

आधुनिकता और परम्परा का संगम
पुष्पम प्रिया लंदन रिटर्न हैं। काले रंग की शर्ट और जींस में क्षेत्रभ्रमण करने वाली पुष्पम ने राजनीति की आधुनिक शैली विकसित की है। लेकिन उन्होंने परम्पराओं से भी तालमेल बनाये रखा है। बेटी की सुख समृद्धि के लिए खोइंछा की परम्परा बहुत पुरानी है। पुष्पम ने वोटरों से भावनात्मक जुड़ाव के लिए खोइंछा मांगने का कार्यक्रम शुरू किया है। वे घर-घर जा कर लाल कपड़े में एक मुट्ठी चावल और एक रुपये का सिक्का, खोइंछा के रूप में मांग रही हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है चाहे वे जिस भी जाति और धर्म के हों लेकिन उन्हें खोइंछा जरूर दें। उन्होंने अपनी महिला उम्मीदवारों को भी ऐसा ही करने के लिए कहा है। पुष्पम ने अपने उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं से 108 खोइंछा लाकर देने के लिए कहा है ताकि बिहार को बदलने का आशीर्वाद मिल सके। प्लुरल्स की महिला उम्मीदवार खोइंछा के जरिये वोटरों के दिल में जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं।
-
'मेरे साथ गलत किया', Monalisa की शादी मामले में नया मोड़, डायरेक्टर सनोज मिश्रा पर लगा सनसनीखेज आरोप -
Silver Rate Today: चांदी में हाहाकार! 13,606 रुपये की भारी गिरावट, 100 ग्राम से 1 किलो की कीमत जान लीजिए -
Gold Silver Rate Crash: सोना ₹13,000 और चांदी ₹30,000 सस्ती, क्या यही है खरीदारी का समय? आज के ताजा रेट -
ईरान का गायब सुप्रीम लीडर! जिंदा है या सच में मर गया? मोजतबा खामेनेई क्यों नहीं आ रहा सामने, IRGC चला रहे देश? -
Gold Rate Today: ईरान जंग के बीच धराशायी हुआ सोना! 13,000 सस्ता, 18K और 22k गोल्ड की ये है कीमत -
Strait of Hormuz में आधी रात को भारतीय जहाज का किसने दिया साथ? हमले के डर से तैयार थे लाइफ राफ्ट -
Rupali Chakankar कौन हैं? दुष्कर्म के आरोपी ज्योतिषी के कहने पर काट ली थी उंगली! संभाल रहीं थीं महिला आयोग -
Love Story: बंगाल की इस खूबसूरत नेता का 7 साल तक चला चक्कर, पति है फेमस निर्माता, कहां हुई थी पहली मुलाकात? -
Ravindra Kaushik Wife: भारत का वो जासूस, जिसने PAK सेना के अफसर की बेटी से लड़ाया इश्क, Viral फोटो का सच क्या? -
Uttar Pradesh Gold Price: यूपी में आज 22K-18K सोने का भाव क्या? Lucknow समेत 9 शहरों में कितना गिरा रेट? -
Iran Vs America: ईरान की 'सीक्रेट मिसाइल' या सत्ता जाने का डर, अचानक ट्रंप ने क्यों किया सरेंडर -
US Iran War: 5 दिन के सीजफायर की बात, 10 मिनट में Trump का पोस्ट गायब! ईरान ने कहा- 'हमारे डर से लिया फैसला’












Click it and Unblock the Notifications