बिहार विधानसभा चुनाव: RJD ने चार वरिष्ठ नेताओं की संतानों को टिकट बांटकर किया उपकृत
आरजेडी ने एक तरफ वरिष्ठ नेताओं को संतुष्ट करने का प्रयास किया गया है तो दूसरी तरफ तेजप्रताप यादव को पार्टी में अहमियत देकर मेल-मिलाप का नया माहौल तैयार किया गया है।
पटना। 2020 के विधानसभा चुनाव में सबको साथ लेकर चलने के लिए राजद को किसी भी समझौते से कोई गुरेज नहीं। एक तरफ वरिष्ठ नेताओं को संतुष्ट करने का प्रयास किया गया है तो दूसरी तरफ तेजप्रताप यादव को पार्टी में अहमियत देकर मेल-मिलाप का नया माहौल तैयार किया गया है। तेजप्रताप यादव ने आज राजद प्रत्याशियों को सिम्बल बांट कर महत्वपूर्ण मौजूदगी दर्ज कराई। राजद में वरिष्ठ नेताओं को खुश करने के लिए उनके परिजनों के उदारता से टिकट दिया गया है। शिवानंद तिवारी, जगदानंद सिंह और पूर्व केन्द्रीय मंत्री कांति सिंह लालू के विश्वस्त सहयोगी रहे हैं। शिवानंद तिवारी के बेटे राहुल तिवारी का शाहपुर से टिकट बरकरार रखा गया है। जगदानंद सिंह के बेटे सुधाकर सिंह को कैमूर के रामगढ़ से उम्मीदवार बनाया गया है। कांति सिंह के पुत्र ऋषि सिंह को औरंगाबाद के ओबरा से टिकट दिया गया है। इसके अलावा राजद ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री जयप्रकाश यादव की पुत्री दिव्या प्रकाश को मुंगेर की तारापुर सीट से प्रत्याशी बनाया है। यहां तक कि राजद ने विवादास्पद नेताओं की पत्नियों को भी उपकृत किया है। रेप मामले में सजायाफ्ता पूर्व विधायक राजवल्लभ यादव की पत्नी विभा देवी को नवादा से तो रेप के आरोप में फरार चल रहे मौजूदा विधायक आरुण यादव की पत्नी किरण देवी को संदेश से टिकट दिया है। राजद को जीत चाहिए और उसने इसके लिए हर तरह के फैसले लिये हैं।

प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद के बेटे को टिकट
जगदानंद सिंह अभी राजद के प्रदेश अध्यक्ष हैं। वे राजपूत जाति से आते हैं और उन्हें राजद का सवर्ण चेहरा माना जाता है। जगदानंद सिंह कैमूर के रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र से लगातार छह बार विधायक रहे हैं। इस बार रामगढ़ सीट पर उनके पुत्र सुधाकर सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है। सुधाकर सिंह 2010 में भाजपा के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन वे तीसरे स्थान पर लुढ़क गये थे। तब राजद के जगदानंद सिंह ने चुनाव में अपने भाजपाई बेटे का विरोध किया था। रामगढ़ सीट पर फिलहाल भाजपा के अशोक सिंह का कब्जा है। अब देखना है कि सुधाकर सिंह राजद के उम्मीदवार के रूप में क्या नतीजा हासिल करते हैं।
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कांति सिंह के बेटे के लिए विधायक का टिकट काटा
पूर्व केन्द्रीय मंत्री कांति सिंह लालू की निकट सहयोगी रही हैं। लालू ने ही उन्हें सांसद और केन्द्रीय मंत्री बनाया था। कांति सिंह के बेटे को टिकट देने के लिए राजद ने ओबरा के सीटिंग विधायक वीरेन्द्र कुमार सिन्हा का टिकट काट दिया। कांति सिंह अपने बेटे को टिकट दिलाने के लिए सितम्बर से ही लॉबिंग कर रही थीं। सितम्बर में वे अपने बेटे ऋषि सिंह के पक्ष में जनसमर्थन जुटाने के लिए ओबरा गयीं थीं। उस समय से हल्ला था कि इस बार सीटिंग विधायक वीरेन्द्र कुमार सिन्हा का टिकट काट कर ऋषि सिंह को टिकट दिया जा रहा है। इससे स्थानीय लोग बहुत नाराज हो गये थे। उन्होंने कांति सिंह के खिलाफ ऐसा प्रदर्शन किया था कि उन्हें बीच में दौरा छोड़ कर लौटना पड़ा था। इस अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजद ने अपने वरिष्ठ नेताओं को संतुष्ट करने के लिए कितना जोखिम उठाया है। अब ये दीगर बात है कि वीरेन्द्र सिन्हा के समर्थक ऋषि सिंह के साथ कितना सहयोग करते हैं। शिवानंद तिवारी के पुत्र राहुल तिवारी ने 2015 में पहली बार शाहपुर से विधानसभा का चुनाव जीता था। शिवानंद तिवारी ने बीच में राजद की कार्यशैली पर कई सवाल उठाये थे। लेकिन इसके बाद भी उनके बेटे का टिकट बरकरार रखा गया।

विवादास्पद नेताओं की पत्नियों को टिकट
राजवल्ल्भ यादव को रेप मामले में उम्रकैद की सजा मिलने के कारण 2018 में विधायकी गंवानी पड़ी थी। राजद ने इस सीट को फिर पाने के लिए राजवल्लभ की पत्नी विभा देवी को नवादा से उम्मीदवार बनाय है। किसी भी आलोचना की परवाह किये बिना राजद ने एक भार फिर विभा देवी पर भरोसा जताया है। विभा देवी 2019 का लोकसभा चुनाव हार चुकी है। इसी तरह भोजपुर के संदेश विधानसभा क्षेत्र के राजद विधायक अरुण यादव पर एक नाबालिग से रेप का आरोप लगा है। पुलिस के अनुसार यह पूरा प्रकरण एक सेक्स रैकेट से जुड़ा हो सकता है। इस मामले में विधायक अरुण यादव फरार चल रहे हैं। अरुण यादव की चार करोड़ से अधिक की सम्पत्ति जब्त कर ली गयी है। उनका बैंक खाता फ्रीज है। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए कई जगहों पर छापा मार चुकी है। अरुण यादव के लिए जब चुनाव लड़ना मुश्किल हो गया तो राजद ने उनकी पत्नी किरण देवी को संदेश से उम्मीदवार बना दिया।

पूर्व स्पीकर उदयनारायण चौधरी को भी टिकट
पूर्व स्पीकर उदय नारायण चौधरी को राजद ने इमामगंज से उम्मीदवार बनाया है। वे कभी नीतीश कुमार के खासमखास नेता हुआ करते थे। उदयनारायण चौधरी को उस समय जदयू का सबसे बड़ा दलित चेहरा माना जाता था। नीतीश कुमार ने उन्हें विधानसभा का अध्यक्ष बनाया था। 2014 में जब राजद के विधायकों में टूट हुई थी उस समय स्पीकर उदय नारायण चौधरी पर नीतीश के समर्थन में काम करने का आरोप लगा था। उन्होंने तुरंत ही राजद के बागी विधायकों को अलग गुट के रूप में मान्यता दे दी थी। इससे लालू यादव तब उदय नारायण चौधरी पर बेहद नाराज हुए थे। लेकिन 2015 में जब वे इमामगंज से चुनाव हार गये तो जदयू में उनकी स्थिति बदलनी शुरू हो गयी। धीरे-धीरे नीतीश से खटपट बढ़ने लगी। 2017 में जब नीतीश ने भाजपा के मेल से फिर सरकार बनायी तो वे खुल कर विरोध में आ गये। जदयू से अलग हो कर शरद यादव के साथ लोकतांत्रिक जनता पार्टी बनायी। वे 2019 में जमुई से लोकसभा का चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन राजद में बात नहीं बनी। राजद ने शरद को तो उम्मीदवार बना दिया लेकिन चौधरी टिकट नहीं पा सके। फिर वे राजद में शामिल हो गये। बहुत दिनों से वे लालू यादव की नजरे इनायत की प्रतीक्षा में थे। आखिरकार उनकी भी इच्छा पूरी हो गयी। अब इमामगंज सीट पर उदय नारायण चौधरी की लड़ाई हम के जीतन राम मांझी से होगी। 2015 के चुनाव में जीतन राम मांझी ने ही चौधरी को हराया था। अब देखना है कि वे हिसाब बराबर कर पाते या नहीं।












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