बिहार चुनाव 2020: क्या राजद के केमिकल लोचा को खत्म करने के लिए चाहिए जादू की झप्पी?

बिहार चुनाव 2020:राजद

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    Bihar Assembly Elections 2020: Grand Alliance का बढ़ता कुनबा, ये दो दल भी हुए शामिल | वनइंडिया हिंदी

    राजद में लोचा ही लोचा है फिर भी वह Bihar Assembly Elections 2020 में 150 सीटों पर चुनाव लड़ने का मंसूबा बनाये हुए है। पार्टी के पावरफुल लीडर रघुवंश प्रसाद सिंह खफा हैं। तेजस्वी ने मनाया, फिर नहीं माने। लालू यादव ने भी 'रघु बाबू’ को संदेशा भेजा कि जादू की झप्पी दीजिए और बात खत्म कीजिए। लेकिन बात बनती नहीं दिख रही। पार्टी में कुछ और लोग भी नाखुश हैं। राजद को घर संभालना मुश्किल हो रहा है। लेकिन वह सहयोगी दलों के सामने खुद को मजबूती से पेश कर रहा है। वह अपने सिर की बला कांग्रेस के मत्थे मढ़ना चहता है। राजद ने खुद के लिए 150 सीटें सोच रखी हैं। बाकी की 93 सीटें कांग्रेस को देने की बात है। अब कांग्रेस जो मुनासिब समझे इनमें (93) से अपने लिए और अन्य घटक दलों के लिए सीटें बांट ले। अभी महागठबंधन में उपेन्द्र कुशवाहा, मुकेश सहनी की पार्टी पहले से है। वाम दलों को भी इसमें शामिल करने की बात चल रही है। अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस को अपने अलावा रालसोपा,वीआइपी, माकपा, भाकपा को भी सीटें देनी होंगी। अगर कुनबा और बढ़ा तो सीटों की रेवड़ी ज्यादा बांटनी पड़ेगी। यानी जो कांट-छांट होगी वो कांग्रेस के हिस्से में होगी। अब सवाल ये है कि क्या सहयोगी दल राजद की बात सुनेंगे?

    150 में 120 की आस !

    150 में 120 की आस !

    राजद 150 सीटों पर इसलिए चुनाव लड़ना चाहता है कि अगर खुदा न खास्ते कहीं लालू के नाम का सिक्का चल गया तो अपने बल पर भी बहुमत मिल जाए। पिछले चुनाव में राजद ने 101 में 80 सीटें जीती थीं। यानी वह करीब 80 फीसदी सीटें जीतने में सफल रहा था। अगर Bihar Assembly Elections 2020 में भी जनता ने इसी पैटर्न पर वोट कर दिया तो उसे 150 में 120 सीटें मिल सकती हैं। यानी बहुमत से सिर्फ 2 कम। ऐसे में अकेले भी मंजिल दूर न होगी। दरअसल राजद 1995 के चुनावी नतीजे से प्रेरित है। तब लालू यादव का रुतबा बुलंदी पर था। उस समय बिहार-झारखंड एक था। 1995 के विधानसभा चुनाव में लालू ने 324 में से 264 सीटों पर चुनाव लड़ा था। बाकी सीटें उन्होंने माकपा, भाकपा और झारखंड मुक्ति मोर्चा की दी थीं। लालू ने अकेले 167 सीटें जीत पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया था। अब 2020 में भी राजद यही सोच रहा है कि वह इतनी सीटों पर जरूर लड़े ताकि अकेले मैजिक फिगर के आसपास रहने की गुंजाइश रहे।

    क्या राजद की सुनेगी कांग्रेस?

    क्या राजद की सुनेगी कांग्रेस?

    घर फूटे, गंवार लूटे। यानी जब कोई मजबूत घर कलह से टूट जाता है तो कमजोर भी इसका फायदा उठाने लेगते हैं। राजद का हालात-ए- हाजिरा फिलहाल यही है। राजद की मंशा चाहे जो हो, कांग्रेस उसे भाव देने के मूड में नहीं है। कांग्रेस विधायक दल के नेता सदानंद सिंह पहले ही कह चुके हैं कि उनकी पार्टी इस बार 80 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। 2015 में जदयू भी महागठबंधन का हिस्सा था तब कांग्रेस को 41 सीटें मिलीं थीं। 41 में से 27 सीटें जीत कर कांग्रेस ने करीब 70 फीसदी कामयाबी हासिल की थी। अब जब चूंकि महागठबंधन में जदयू नहीं है तो कांग्रेस की हिस्सेदारी भी अधिक होनी चाहिए। पिछले चुनाव में कांग्रेस की जीत का प्रतिशत भी बेहतर था। इसलिए 2020 में हम 80 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहते हैं। सदानंद सिंह ने राजद की घट रही ताकत का भी मुद्दा उठाया है। अगर कांग्रेस 80 सीटों पर चुनाव लड़ेगी तो फिर सहयोगी दलों का क्या होगा ? बाकी बची 13 सीटों में किसके हिस्से में क्या आएगा ? किसी को आम मिले और किसी को गुठली, तो क्या महागठबंधन रह पाएगा ? महागठबंधन में कमेटी बना कर सीट बांटने की चर्चा तो चल रही है लेकिन राजद और कांग्रेस की बढ़ती महात्वाकांक्षा के कारण यह व्यवस्था कितनी असरदार होगी, कहना मुश्किल है।

    कांग्रेस-राजद में भगदड़ से बिगड़ेगा खेल ?

    कांग्रेस-राजद में भगदड़ से बिगड़ेगा खेल ?

    राजद और कांग्रेस के कई विधायकों का सोचना है कि 2015 में अगर उनको जीत मिली तो इसमें नीतीश कुमार की भी भूमिका थी। अब नीतीश के नहीं रहने से ये विधायक अपनी जीत को लेकर आशवस्त नहीं हैं। चर्चा है कि राजद के कुछ और नेता जदयू में जाने वाले हैं। कांग्रेस के 27 में 16 विधायकों ने एक समय पार्टी छोड़ने का फैसला तक कर लिया था। वे दलबदल कानून से बचने के लिए दो और विधायकों को अपने पाले में करना चाहते थे लेकिन कामयाब नहीं हुए। यानी कांग्रेस में करीब 16 विधायक ऐसे हैं जो मौका देख कर पार्टी छोड़ सकते हैं। कांग्रेस ने अपने सभी मौजूदा विधायकों का टिकट पहले ही पक्का कर दिया है। लेकिन अधिकतर विधायक कांग्रेस में अपना भविष्य सुरक्षित नहीं मान रहे। अगर कांग्रेस का खेल बिगड़ता है तो उसका नुकासन राजद को ही होगा। ऐसे में राजद पर बड़ी जिम्मेवारी है कि वह Bihar Assembly Elections 2020 में अपने घर और बाहर (सहयोगी दल) को कैसे संभालता है।

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