Bihar politics: बिहार चुनाव में करारी हार पर पहली बार खुल कर बोले तेजस्वी, बताया क्यों 25 सीट ही जीत सके?
Bihar politics: आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के नतीजों पर गंभीर सवाल उठाते हुए बड़ा दावा किया है कि प्रदेश में एनडीए (NDA) की जीत हुई, लेकिन लोकतंत्र (Democracy) हार गया। उन्होंने अपनी हार का कारण बताते हुए कहा कि बेरोजगारी (Unemployment) सबसे बड़ा मुद्दा था और जनता एनडीए सरकार को दोबारा नहीं चाहती थी। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि ₹40,000 करोड़ की रिश्वत सीधे वोटरों में बांटी गई।
उन्होंने ईवीएम और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी संदेह व्यक्त किया, यह कहते हुए कि उनके गठबंधन का वोट प्रतिशत बढ़ा था और हार का अंतर केवल 12,000 वोटों का था। उन्होंने जोर दिया कि चुनाव फिक्स्ड था और अब चुनाव का कोई मतलब नहीं रह गया है।

कपिल सिब्बल के साथ पॉडकास्ट में दावा
देश के जाने माने वकील और सांसद कपिल सिब्बल के साथ पॉडकास्ट के दौरान तेजस्वी यादव ने दावा किया कि, उनकी पार्टी की सीटें कम होने का कारण धांधली थी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक 10 दिन पहले और विभिन्न योजनाओं के तहत, करीब ₹40,000 करोड़ रुपये पूरे बिहार में सीधे बांटे गए। तेजस्वी ने इसे "रिश्वत" करार दिया। उन्होंने कहा कि 20 साल तक शासन करने वाली डबल इंजन की सरकार (NDA) एक शुगर मिल तक चालू नहीं करा पाई, जबकि उनका मुख्य मुद्दा बेरोजगारी था और सरकार के प्रति जनता में गुस्सा था।
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बेरोजगारी चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा
पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने ज़ोर देकर कहा कि बेरोजगारी पूरे चुनाव का असल मुद्दा था। उन्होंने बिहार को सबसे गरीब राज्य बताते हुए कहा कि यहां पलायन, पेपरलीक, और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं हैं। उन्होंने 2020 में 10 लाख रोजगार देने की अपनी घोषणा का जिक्र किया, जिसे लोगों ने बढ़-चढ़कर समर्थन दिया। उनका दावा है कि जनता एनडीए की सरकार दोबारा नहीं चाहती थी, बल्कि एक नया बिहार बनाना चाहती थी, लेकिन उनका विजन (Vision) चुरा लिया गया।
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वोट प्रतिशत बढ़ा, सीटों का अंतर कम
तेजस्वी यादव ने दावा किया कि चुनाव परिणामों के डेटा से पता चलता है कि आरजेडी का वोट प्रतिशत बढ़ा है, भले ही सीटें कम आईं हों। उन्होंने यह भी बताया कि उनके गठबंधन (RJD) और एनडीए के बीच वोटों का कुल अंतर केवल 12,000 था, जबकि सीटों का अंतर 12-14 सीटों का था। उनका दावा है कि उनकी पार्टी 1000 से कम वोटों के अंतर से कई सीटें हारी है। उन्होंने कहा कि उनके शासनकाल में 5 लाख नौकरियां दी गईं, जबकि उनके हटने के बाद पेपर लीक हुआ।
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ईवीएम और चुनाव आयोग पर सवाल
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने ईवीएम (EVM) और चुनाव आयोग (Election Commission) की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि बदलाव सभी चाहते थे, लेकिन ईवीएम सिर्फ बदलाव नहीं चाहता था, वैलेट बदलाव चाहता था। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग बेईमानी के मूड में था और उनकी सभी शिकायतें अनसुनी कर दी गईं। उनका कहना है कि जिस तरह के हालात बन रहे हैं, उससे चुनाव का कोई मतलब नहीं रह गया है क्योंकि सब कुछ फिक्स्ड है।












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