हथियार फेंक चुका था भरत, फिर क्यों चलाई गोली? Bharat Tiwari की बिलखती मां ने पुलिस पर लगाया सीधे हत्या का आरोप

Bharat Bhushan Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर जिले के बिलौती गांव में 28 साल के भरत भूषण तिवारी की कथित पुलिस मुठभेड़ (Encounter) में हुई मौत का मामला अब बेहद संवेदनशील मोड़ पर आ गया है।

इस घटना को लेकर जहां एक तरफ पूरे बिहार में सियासी उबाल है, वहीं दूसरी तरफ मृतक भरत तिवारी के रोते-बिलखते परिवार ने पुलिस प्रशासन पर सीधे हत्या का आरोप लगाते हुए बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

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सोमवार, 22 जून को मीडिया से बात करते हुए मृतक भरत तिवारी की मां आशा देवी और उनके भाई चंदन तिवारी का दर्द और गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने इस पूरी कार्रवाई को 'सोची-समझी हत्या' करार देते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को इसका जिम्मेदार ठहराया है।

"मेरे बेटे को फांसी के फंदे पर लटकाने वाले अधिकारी को सजा मिले"- मां आशा देवी

भरत तिवारी की मां आशा देवी ने अपने बेटे के सामाजिक कार्यों को याद करते हुए रोते हुए कहा कि उनके बेटे की हत्या उसकी समाज सेवा के कारण की गई है। मां आशा देवी ने ANI से कहा-"मेरे बेटे को दो गोलियां मारी गईं। वह बहुत अच्छा इंसान था। वह हमेशा समाज के भले के लिए काम करता था और हमारे इलाके के गरीबों के लिए मसीहा की तरह था। उसने केवल जनता की भलाई के लिए अपनी आवाज उठाई थी और इसी समाज सेवा की कीमत उसे अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। उनकी तीन मांगें थीं जो पूरी नहीं हो रही थीं। मैं इस पूरे एनकाउंटर का आदेश देने के लिए सीधे DSP को जिम्मेदार मानती हूं और मेरी मांग है कि उन्हें फांसी की सजा दी जाए। हमारी गुहार और दर्द सुनने वाला शासन-प्रशासन में कोई नहीं है, कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है।"

फेसबुक लाइव पर सब साफ दिख रहा है, जांच की क्या जरूरत?: भाई चंदन तिवारी

मुठभेड़ के समय मौके पर मौजूद और पूरी घटना को करीब से देखने वाले भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी ने पुलिस की जांच प्रक्रिया पर ही बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि जब सब कुछ कैमरे के सामने लाइव हुआ है, तो फिर किस बात की जांच की जा रही है?

चंदन तिवारी ने घटना का आंखों देखा हाल बयां करते हुए कहा-हमें पुलिस की किसी जांच-पड़ताल से कोई लेना-देना नहीं है। जो भी इस घिनौने काम में शामिल है, उसे तुरंत चार्जशीट कर जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए। सब कुछ साफ-साफ दिख रहा है, किसी जांच की जरूरत ही नहीं है। इंटरनेट पर सब कुछ लाइव मौजूद है। जब सच सबके सामने है, तो फिर पूछताछ का नाटक क्यों? जितने भी लोग इसमें शामिल थे, उन्हें सीधे जेल में डालना चाहिए।

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हथियार फेंकने के बाद बातचीत की, फिर 20 मीटर दूर ले जाकर मारी गोली

चंदन ने आगे बताया कि उनका भाई कोई अपराधी नहीं था, बल्कि वह सिर्फ नेताओं को उनके वादे याद दिला रहा था। घटना वाले दिन क्या हुआ, इसे बताते हुए चंदन ने कहा-"भरत की मांग सिर्फ इतनी थी कि जो नेता चुनाव में वादे करते हैं, वे उन्हें पूरा करें। इसी बात को लेकर बहस शुरू हुई थी। हमने खुद देखा कि लगभग 100 से ज्यादा पुलिसवालों और STF के जवानों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया था।"

चंदन ने मीडिया से बातचीत में बताया- हथियार फेंकने के बाद झांसा दिया इसके बाद मेरे भाई ने अपना हथियार नीचे फेंक दिया, जो सोशल मीडिया लाइव पर भी साफ-साफ दिखाई दे रहा है। हथियार फेंकने के बाद एक अधिकारी ने उसके कंधे पर हाथ रखा और उससे बहुत प्यार से बात की। वे लोग बहुत तेज आवाज में बात कर रहे थे, इसलिए हमें साफ सुनाई दे रहा था। पुलिस अधिकारी ने कहा, 'भरत जी, हमें आपसे यही उम्मीद थी कि आप आत्मसमर्पण कर देंगे।'

चंदन तिवारी के मुताबिक, वे लोग उसे अपनी बातों में फुसला रहे थे। जैसे ही वे भरत को बातों में लगाकर वहां से करीब 20 मीटर दूर ले गए, पुलिसवालों ने अचानक उसे बहुत तेज धक्का दिया और गोली मार दी।

क्या है पूरा मामला?

भरत भूषण तिवारी भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौती गांव का रहने वाला था। पुलिस के मुताबिक, 17 जून को उसे गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही थी। इसी दौरान उसने कथित तौर पर पुलिस टीम पर गोली चला दी। पुलिस का कहना है कि आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई, जिसमें भरत घायल हो गया। बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हालांकि, परिजन इस दावे को खारिज कर रहे हैं और कह रहे हैं कि भरत ने पहले ही आत्मसमर्पण कर दिया था। भरत तिवारी की मौत के बाद पूरे बिहार में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

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