मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रदर्शित हुई 64 योगिनी पर आधारित डॉक्यूमेंट्री ‘Y64 – व्हिस्पर्स ऑफ द अनसीन’
डॉ. बीना उन्नीकृष्णन की डॉक्यूमेंट्री मध्य प्रदेश के मितावली में 64 योगिनी मंदिरों का पता लगाती है, जो उनकी वास्तुशिल्प सुंदरता, आध्यात्मिक कथाओं और सांस्कृतिक विरासत में महिलाओं की भूमिका का विवरण देती है। यह फिल्म एक कालातीत योगिनी परंपरा को उजागर करने के लिए भारत भर में कला, इतिहास और व्यक्तिगत यात्राओं को मिश्रित करती है।
19वें मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF) 2026 में कलाकार और साधक डॉ. बीना उन्नीकृष्णन की डॉक्यूमेंट्री ‘Y64 – व्हिस्पर्स ऑफ द अनसीन’ का प्रदर्शन किया गया। यह डॉक्यूमेंट्री मध्यप्रदेश के मितावली स्थित ऐतिहासिक 64 योगिनी मंदिर पर आधारित है और इसे संस्कृति विभाग एवं काली ट्रस्ट के सहयोग से निर्मित किया गया है। अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों के बीच इस फिल्म का पहली बार प्रदर्शन हुआ।

मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव दक्षिण एशिया का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित फिल्म समारोह माना जाता है, जो विशेष रूप से वृत्तचित्र, लघु कथा और एनीमेशन फिल्मों को समर्पित है। इस अवसर पर भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रभात ने डॉ. बीना उन्नीकृष्णन और उनकी टीम को सम्मानित किया। कार्यक्रम में अतिरिक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार दीपक नारायण, एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर दीप्ति चावला, सिनेमैटोग्राफर प्रदीप सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
मध्यप्रदेश के अपर मुख्य सचिव, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व तथा सामान्य प्रशासन शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि मितावली, जबलपुर और खजुराहो के 64 योगिनी मंदिर भारतीय स्थापत्य कला के अद्भुत उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि मितावली का 64 योगिनी मंदिर भारत के पुराने संसद भवन की वास्तुकला के लिए प्रेरणा स्रोत रहा है और यह यूनेस्को की अस्थायी विश्व धरोहर सूची में भी शामिल है। उन्होंने कहा कि ‘Y64 – व्हिस्पर्स ऑफ द अनसीन’ जैसी परियोजनाएं देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही हैं। यह फिल्म कला, संस्कृति, अध्यात्म और स्त्री शक्ति जैसे विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करती है।
डॉ. बीना उन्नीकृष्णन ने बताया कि करीब साढ़े बारह वर्ष पहले उन्होंने 64 योगिनियों के चित्रांकन का कार्य एक दस्तावेजी प्रयास के रूप में शुरू किया था, लेकिन समय के साथ यह यात्रा आत्म-अन्वेषण और समर्पण की प्रेरणादायक सिनेमाई कहानी बन गई। उन्होंने इस वर्ष 64 मूल चित्रों के साथ भारत के 14 शहरों में लगभग 15 हजार किलोमीटर की यात्रा कर हजारों लोगों को योगिनी परंपरा से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि यह डॉक्यूमेंट्री केवल योगिनी मंदिरों के इतिहास और रहस्यों को नहीं दर्शाती, बल्कि यह उस आध्यात्मिक यात्रा और साहस की कहानी भी है, जो जीवन में आत्मविश्वास और परिवर्तन का मार्ग दिखाती है।
फिल्म में भारतीय विरासत, संस्कृति और अध्यात्म का अनूठा संगम देखने को मिलता है। काली ट्रस्ट और मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से निर्मित यह डॉक्यूमेंट्री दर्शकों को ऐसे संसार में ले जाती है, जहां कला, आस्था, इतिहास और आत्म-परिवर्तन एक साथ जुड़कर एक विशेष अनुभव का निर्माण करते हैं।












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