Bharat Tiwari Encounter: इंसाफ के लिए प्रशांत किशोर से मिलने पहुंचे परिजन, PK बोले- आखिरी सांस तक दूंगा साथ
Bharat Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर जिले में हुए बहुचर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने राज्य की सियासत और कानून व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना को लेकर जनता और राजनीतिक गलियारों में भारी आक्रोश है।
इसी बीच, सोमवार, 22 जून को मृतक भरत तिवारी के परिजनों और उनके मित्रों ने पटना के बिहटा में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) से मुलाकात की।

परिजनों ने रो-रोकर प्रशांत किशोर के सामने न्याय की गुहार लगाई और आरोप लगाया कि यह कोई एनकाउंटर नहीं, बल्कि पुलिस द्वारा की गई सोची-समझी हत्या थी। प्रशांत किशोर ने पीड़ित परिवार को सांत्वना देते हुए इस लड़ाई में सड़क से लेकर कोर्ट तक हर संभव कानूनी और नैतिक मदद देने का पक्का भरोसा दिया है।
24 जून की महापंचायत में शामिल होने का आग्रह
मुलाकात के दौरान भावुक परिजनों ने प्रशांत किशोर से इस पूरे मामले में दखल देने की अपील की। उन्होंने पीके को आगामी 24 जून (बुधवार) को भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौती गांव में आयोजित होने वाली 'न्याय महापंचायत' में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का निमंत्रण दिया। परिजनों का कहना है कि प्रशांत किशोर के आने से इस लड़ाई को और ताकत मिलेगी और सरकार पर निष्पक्ष जांच का दबाव बनेगा।
प्रशांत किशोर ने दिया सहयोग का भरोसा
जन सुराज की ओर से जारी बयान के अनुसार, प्रशांत किशोर ने परिजनों की बात ध्यान से सुनी और उन्हें हरसंभव मदद का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि न्याय की लड़ाई में परिवार को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा और जरूरत पड़ने पर हर संभव सहयोग किया जाएगा। प्रशांत किशोर ने मामले को गंभीर बताते हुए पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना भी व्यक्त की।
सियासी मोड़ ले चुका है Bharat Tiwari Encounter मामला
भोजपुर जिले के बिलौती गांव निवासी 28 साल के भरत भूषण तिवारी की 17 जून को पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी। स्थानीय लोग और उनके समर्थक भरत तिवारी को एक सामाजिक कार्यकर्ता बताते हैं जो सोशल मीडिया के जरिए गरीबों, बाढ़ पीड़ितों और वंचितों की आवाज बुलंद करते थे। इस घटना के बाद से ही बिहार में कानून व्यवस्था और तथाकथित 'फर्जी एनकाउंटर' के चलन पर सवाल उठ रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने दिए न्यायिक जांच के आदेश: बढ़ते जन आक्रोश को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को इस पूरे मामले की हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से न्यायिक जांच कराने के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके अलावा थाना प्रभारी (SHO) समेत 4 पुलिसकर्मियों को निलंबित भी किया गया है।
क्या है भरत तिवारी एनकाउंटर मामला?
भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौती गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की पिछले सप्ताह पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी। इस घटना के बाद पूरे बिहार में बहस छिड़ गई और कई राजनीतिक दलों ने भी सवाल उठाए। पुलिस के अनुसार, 17 जून को भरत तिवारी को गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही थी। इसी दौरान उसने कथित रूप से अवैध हथियार से पुलिस टीम पर गोली चला दी। पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें वह घायल हो गया। बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
परिजनों का दावा- भरत ने कर दिया था सरेंडर
वहीं, भरत तिवारी के परिवार का दावा पुलिस के बयान से बिल्कुल अलग है। परिजनों का कहना है कि गोली चलाए जाने से पहले भरत ने आत्मसमर्पण कर दिया था और अपना हथियार भी फेंक दिया था। परिवार का आरोप है कि सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो से यह पता चलता है कि घटना के समय भरत निहत्था था। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसी वजह से परिजन लगातार निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं।
सरकार ने दिए न्यायिक जांच के आदेश
मामले को लेकर बढ़ते विवाद और लगातार उठ रहे सवालों के बीच बिहार सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं। सरकार का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले पर लोगों की नजरें टिकी हुई हैं। एक ओर पुलिस अपनी कार्रवाई को सही बता रही है, तो दूसरी ओर परिवार इसे फर्जी एनकाउंटर करार देते हुए न्याय की मांग कर रहा है। ऐसे में 24 जून की महापंचायत और न्यायिक जांच की प्रक्रिया इस मामले में आगे की दिशा तय कर सकती है।














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