क्या थे वो 8 शब्द जिनसे बदला वैभव सूर्यवंशी का माइंडसेट, किसकी बात सुनकर लिया श्रीलंका से बदला?
Vaibhav Sooryavanshi: श्रीलंका ए के खिलाफ दांबुला में खेले गए ट्राई सीरीज के फाइनल मुकाबले में अपनी आतिशी पारी से तहलका मचाने वाले वैभव सूर्यवंशी ने अपनी सफलता का श्रेय टीम के एक ऐसी इंसान को दिया है, जिनकी बातों से उनका माइंडसेट पूरी तरह बदल गया।
केवल 15 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले वैभव ने बताया कि हर खिलाड़ी के जीवन में ऐसा समय आता है जब रन नहीं बनते और आत्मविश्वास डगमगाने लगता है। ऐसे संवेदनशील समय में एक अनुभवी कोच का साथ मिलना किसी भी युवा खिलाड़ी के मानसिक मनोबल को बढ़ाने के लिए संजीवनी जैसा काम करता है।

उन्होंने अपनी सफलता हा क्रेडिट मुख्य कोच ऋषिकेश कानिटकर को दिया है। स्पोर्टस्टार से बात करते हुए इस युवा बल्लेबाज ने खुलासा किया कि जब रन नहीं आ रहे थे, तब कानिटकर सर ने उनका हाथ थामकर उन्हें मुश्किलों से बाहर निकाला।
कोच के आठ शब्द बने वरदान
वैभव ने कहा कि कानिटकर सर ने मुझे अपने नेचुरल गेम खेलने की सलाह दी और कंडीशंस के बारे में भी बताया। वैभव ने बताया कि कानिटकर सर ने कहा कि तू अपना नेचुरल गेम खेल, बस ज्यादा मत सोच। इन आठ शब्दों ने बल्लेबाज के अंदर एक नई उर्जा भर दी और फिर वह श्रीलंका के खिलाफ कहर बनकर टूट पड़े।
वैभव ने आगे बताया कि जब आप लगातार असफल हो रहे होते हैं तो हर कोई आपकी कमियां गिनाने लगता है लेकिन कानिटकर ने उन्हें यह अहसास कराया कि उनके भीतर मैच जिताने की अद्भुत क्षमता मौजूद है। इसी गुरुमंत्र ने उन्हें फाइनल जैसे बड़े और दबाव वाले मुकाबले में खुलकर बल्लेबाजी करने की ताकत और प्रेरणा दी।
वैभव की आंधी में उड़ गई श्रीलंकाई टीम
गौरतलब है कि श्रीलंकाई टीम ने वैभव सूर्यवंशी से लीग मैच के दौरान झगड़ा किया था और ताना मारा था। इससे धक्का-मुक्की भी देखने को मिली। हालांकि फाइनल में आते ही वैभव ने अपने बल्ले से तहलका मचाने का काम किया और महज 11 गेंदों में लिस्ट ए क्रिकेट की सबसे तेज फिफ्टी जमा डाली। भारतीय टीम ने श्रीलंकाई टीम को हराते हुए ट्रॉफी पर अपना कब्जा जमा लिया। वैभव को प्लेयर ऑफ़ द मैच चुना गया।












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