Sultanganj Encounter में ढेर रामधनी यादव कौन था? बेटा चिराग की पार्टी में, पत्नी डिप्टी चेयरमैन, आतंक की कहानी
Bhagalpur Sultanganj Encounter: बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी ने 15 अप्रैल 2026 को शपथ ली। महज 13 दिन बाद राज्य की पुलिस ने 'जीरो टॉलरेंस' का सबूत पेश कर दिया। भागलपुर जिला स्थित सुल्तानगंज में कुख्यात अपराधी रामधनी यादव को पुलिस ने मार गिराया। यह कार्रवाई 12 घंटे के भीतर हुई, जब 28 अप्रैल को सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में रामधनी ने ताबड़तोड़ फायरिंग की। इस हमले में एग्जीक्यूटिव ऑफिसर कृष्णा भूषण कुमार (Krishna Bhushan Kumar) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चेयरमैन राजकुमार गुड्डू को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया। इस वारदात ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया।
घटना के बाद पुलिस ने तेजी दिखाई और रात होते-होते मुख्य आरोपी रामधनी यादव को घेर लिया गया। देर रात करीब 2:30 बजे बाइपास रोड पर मुठभेड़ हुई, जो सुल्तानगंज थाना से सिर्फ 200 मीटर दूर थी। पुलिस की गोली रामधनी के सीने में लगी और वह वहीं ढेर हो गया। हालांकि, इस एनकाउंटर में DSP नवीन और दो इंस्पेक्टर भी घायल हुए, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मुठभेड़ कितनी खतरनाक थी। अब सवाल उठता है कि आखिर रामधनी यादव इतना बड़ा नाम कैसे बन गया? पत्नी सुल्तानगंज नगर परिषद की डिप्टी चेयरमैन तो बेटा चिराग पासवान की पार्टी में, आइए जानते हैं रसूख के आतंक की कहानी...

Who Was Ramdhani Yadav: रामधनी यादव कौन था? कुख्यात अपराधी का 'पॉलिटिकल कनेक्शन'
रामधनी यादव सुल्तानगंज का रहने वाला था। उसका घर एनकाउंटर वाली जगह से महज 100 मीटर दूर था। वह इतना खूंखार था कि साल 2000 में एक कारोबारी की हत्या कर उसका सिर काटकर थाने ले गया था। उसकी पत्नी नीलम देवी 2019 में सुल्तानगंज नगर परिषद की डिप्टी चेयरमैन (तब सभापति) बन गईं। रामधनी ने पत्नी की कुर्सी का पूरा फायदा उठाया। दोनों के चार बेटे हैं। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे बड़ा बेटा सन्नी यादव, एमएलसी प्रतिनिधि है। दूसरा बेटा मनीष कुमार यादव, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) यानी चिराग पासवान (Chirag Paswan) की पार्टी का भागलपुर जिला युवा अध्यक्ष है। दो छोटे बेटे अमित और अंकित अभी पढ़ाई कर रहे हैं। पत्नी नीलम देवी ने 2020 में चिराग पासवान की पार्टी से सुल्तानगंज विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सकीं। तीसरे स्थान पर अटक गईं।
क्या हुआ था 28 अप्रैल को सुल्तानगंज में?
दोपहर करीब 4 बजे सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में टेंडर की बोली लग रही थी। यह टेंडर, नगर परिषद क्षेत्र में तालाब और होर्डिंग लगाने का था। चेयरमैन राजकुमार गुड्डू (बीजेपी नेता) के दफ्तर में 12-15 लोग मौजूद थे। तभी रामधनी यादव अपने दो साथियों के साथ अंदर घुसा। कट्टा निकालाकर चेयरमैन को धमकाते हुए कि सुल्तानगंज में सिर्फ तुम ही राज करोगे क्या? ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। राजकुमार गुड्डू को दो गोलियां लगीं। बीच बचाव करने पहुंचे एग्जीक्यूटिव ऑफिसर कृष्णा भूषण कुमार पर भी गोलियां चलीं। भूषण कुमार की मौके पर ही मौत हो गई। चेयरमैन गंभीर हालत में अस्पताल में हैं। पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। पुलिस ने उसी CCTV फुटेज के आधार पर रामधनी यादव की पहचान की।
Ramdhani Yadav Encounter: एनकाउंटर कैसे हुआ? पुलिस का बयान
भागलपुर के एसपी प्रमोद यादव ने बताया कि CCTV फुटेज से रामधनी यादव की पहचान हुई। वह डिप्टी चेयरमैन का पति था। गिरफ्तारी के डर से रामधनी ने खुद सरेंडर कर दिया। हम उसे हथियार बरामद करने के लिए ले जा रहे थे। इस दौरान रामधनी और उसके साथियों ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। रामधनी के पेट और सीने में गोली लगी। तीन पुलिस अधिकारी घायल हुए। एनकाउंटर बाइपास रोड पर हुआ, ठीक उसी इलाके में जहां रामधनी का घर था।
क्यों हुआ यह खूनी हमला? टेंडर का विवाद
पुलिस जांच के मुताबिक रामधनी नगर परिषद के टेंडरों पर कब्जा चाहता था। तालाब और होर्डिंग के टेंडर को लेकर चेयरमैन राजकुमार गुड्डू ने उसका विरोध किया। रामधनी ने चेयरमैन को 'हटाने' की प्लानिंग की। हमले का मकसद चेयरमैन को मारना था, लेकिन एग्जीक्यूटिव ऑफिसर कृष्णा भूषण कुमार ने बीच में आकर विरोध किया तो उन्हें भी मार डाला गया। कृष्णा भूषण कुमार की पत्नी उत्तर प्रदेश में एडीएम हैं।
नगर परिषद में सत्ता का खूनी खेल - 2017 से 2019 तक का साजिशी इतिहास
रामधनी यादव की कहानी 2017 से शुरू होती है। तब दयावती देवी नगर परिषद की सभापति थीं। 9 जून 2017 को उन्होंने पद की शपथ ली थी। रामधनी को उनकी कुर्सी पसंद नहीं थी। उसने पार्षदों को डरा-धमकाकर और पैसे देकर अपने पाले में खींच लिया। जून 2019 में दयावती देवी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। 14-6 के अंतर से प्रस्ताव पास हो गया और दयावती की कुर्सी छिन गई। उसी दिन पुलिस ने नीलम देवी को गिरफ्तार भी किया था। लेकिन बाद में नीलम देवी ने अपने समर्थक पार्षदों को एकजुट किया और DRDA सभागार में हुए चुनाव में सभापति (अब चेयरमैन) बन गईं।
नीलम देवी की कुर्सी मिलते ही रामधनी ने अवैध तरीके से संपत्ति बनानी शुरू कर दी। उनके बाइपास रोड पर आलीशान मकान है। घर में तीन फोर व्हीलर गाड़ियां खड़ी रहती थीं। रामधनी टेंडरों पर कब्जा चाहता था, लेकिन चेयरमैन राजकुमार गुड्डू ने विरोध किया। यही टेंडर विवाद अंततः हत्या तक पहुंच गया।
Ramdhani Yadav की पूरी कहानी
- 2000: कारोबारी की हत्या, सिर काटकर थाने पहुंचाया।
- 2017-2019: पत्नी की कुर्सी के लिए साजिश, अविश्वास प्रस्ताव, कुर्सी छीनना।
- 2019: नीलम देवी चेयरमैन बनीं, रामधनी ने अवैध संपत्ति बनाई।
- 2020: पत्नी ने चिराग पासवान की पार्टी से चुनाव लड़ा, लेकिन तीसरे नंबर पर अटकीं।
- 2026: टेंडर विवाद में चेयरमैन और एग्जीक्यूटिव ऑफिसर पर हमला, एक की मौत।
- 12 घंटे बाद: पुलिस एनकाउंटर में रामधनी ढेर।
पुलिस अब रामधनी के साथियों की तलाश कर रही है। सीसीटीवी फुटेज, हथियार और अन्य सबूतों के आधार पर आगे की जांच जारी है। यह एनकाउंटर न सिर्फ एक अपराधी के अंत की कहानी है, बल्कि बिहार में 'अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस' की नई शुरुआत भी साबित हो सकता है।












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