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बिहार: हाय हाय ये मजबूरी! ख़ुद ही अपना आशियाना उजाड़ रहे हैं लोग, जानिए क्यों ?

बिहार में मॉनसून की आमद के साथ लोगों को राहत मिली तो वहीं दूसरी ओर आफ़त भी बन गई। बारिश की वजह से नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है। कटिहार जिला में महानंदा नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।

पटना, 9 जुलाई 2022। बिहार में मॉनसून की आमद के साथ लोगों को राहत मिली तो वहीं दूसरी ओर आफ़त भी बन गई। बारिश की वजह से नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है। कटिहार जिला में महानंदा नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल तो वहीं कोसी नदी का जलस्तर से भागलपुर में एक बार फिर से लोगों को कटाव की परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। कोसी नदी के किनारे बसे आशियाने कटाव की वजह से नदी की भेंट चढ़ रहे हैं। अब ग्रामीणों के सामने ऐसी मजबूरी आन पड़ी है कि वह खुद ही अपना आशियाना उजाड़ कर वहां से पलायन कर रहे हैं।

कटाव की समस्या से जूझ रहे हैं नदी किनारे बसे लोग

कटाव की समस्या से जूझ रहे हैं नदी किनारे बसे लोग

कोसी नदी के किनारे बसे भागलपुर से लेकर नवगछिया गांव के लोगों को कटाव की समस्या से जूझना पड़ रहा है। कोसी का जलस्तर पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ते ही जा रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक कहारपुर से जहांगीरपुर तक कोसी के किनारे बसे लोगों के आशियाने कटाव की वजह से नदी की भेंट चढ़ते जा रहे हैं। एक दो नहीं करीब सैकड़ों घर अभी तक नदी में डूब चुके हैं। नदीं किनारे जो बचे हुए लोग हैं उन पर भी कटाव का खतरा बना हुआ है। यही वजह है की वह लोग खुद ही अपने घरों को तोड़ रहे हैं।

घर तोड़कर ईंट और पत्थर जुटा रहे ग्रामीण

घर तोड़कर ईंट और पत्थर जुटा रहे ग्रामीण

कोसी नदी किनारे बसे परिवारों की मानें तो उन्हें डर है कि उनका घर भी जल समाधि ले सकता है। इसलिए वह लोगो खुद अपने घरों को तोड़ रहे हैं। ताकि वह घरों को तोड़कर ईंट और पत्थर बचा कर अपने साथ ले जा सकें। भविष्य में उन बचे हुए ईंट पत्थर से दोबार घर बना सकें। उनका कहना है कि अगर वह अभी अपना घर तोड़ कर ईंट और पत्थर इकट्ठा नहीं करेंगे तो उनका घर कटाव की भेंट चढ़ जाएगा और उन्हें कुछ भी नहीं मिलेगा।

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    कोसी नदी अपने आगोश में ले लेगी आशियाना- पीड़ित

    कोसी नदी अपने आगोश में ले लेगी आशियाना- पीड़ित

    पीड़ित परिवारों का कहना है इसलिए ही वह लोग समय रहते हुए अपने घरों को तोड़कर भविष्य के लिए राह आसान कर रहे हैं। अगर उन लोगों ने तोड़ने में कुछ और देर कर दी तो उनके आशियाने को कोसी नदी अपने आगोश में ले लेगी। महंगाई दिन पर दिन बढ़ती जा रही है उनके पास इतने पैसे नहीं हैं कि वह दोबारा से घर बनाने के लिए ईंट और पत्थर जुटा पाएं । इसलिए उन्हें अपना आशियाना उजाड़ने में ही फायदा नज़र आ रहा है।

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