Begusarai News: ‘1 हज़ार सैलरी,डेढ़ लाख घूस’, आशा बहू की नियुक्ति में भ्रष्टाचार, अधिकारियों पर लगे गंभीर आरोप
Begusarai News Today: बिहार के बेगूसराय जिले में आशा बहू की नियुक्ति में धांधली का मामला सामने आया है। जिम्मेदार अधिकारियों पर नौकरी के नाम पर लाखों रुपये वसूलने का आरोप भी लगा है। वार्ड नंबर चार के पंच और राजद के ब्लॉक महासचिव रामचंद्र अपने समुदाय के भीतर अनुचित भर्ती प्रक्रियाओं पर बेबाबाकी से बात रखी। नीचे दिए वीडियो में आप देख सकते हैं उन्होंने क्या कुछ कहा है।
वनइंडिया हिंदी के वरिष्ठ पत्रकार इंज़माम वहीदी से बात करते हुए रामचंद्र तांती ने कहा कि बेगूसराय ज़िला के नूरपुर पंचायत में आशा बहू की बहाली में धांधली हुई है। यह बहाली आमसभा के बाद योग्यता के आधार पर होनी चाहिए थी, लेकिन गुप्त रूप से भर्ती प्रक्रिया की गई।

यह भर्ती सही मायने में पारदर्शी और योग्यता-आधारित होनी चाहिए थी। कथित तौर पर गांव के मुखिया और अन्य सरकारी अधिकारियों सहित सत्ता में बैठे लोगों द्वारा हेरफेर कर नियुक्ति की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि डेढ़ लाख रुपये लेकर कम पात्र उम्मीदवार को नौकरी दी गई। इसकी निष्पक्ष जांच होगी तो सच सामने आ जाएगा।
एक महिला से कहा गया कि डेढ़ लाख रुपये दो तो नौकरी मिल जाएगी। उसने कहा कि 20 हज़ार रुपये दे सकते हैं। महिला ने डेढ़ लाख रुपये नहीं दिए, इसलिए उसकी नौकरी नहीं हुई। अब सवाल यह उठता है कि यह कहा गया था कि पूरे पंचायत में अनाउंसमेंट करने के बाद बहाली होगी तो फिर चुपचाप बहाली क्यों की गई।
पैसे के लेन-देन के ज़रिए भर्ती होने की वजह से गरीब योग्य उम्मीदवार नौकरी से वंचित हो जा रहे हैं। ग्राम स्तर के जनप्रतिनिधि से लेकर संबंधित अधिकारी की मिली भगत से ही यह भ्रष्टाचार का खेल चल रही है। यह निष्पक्षता और समानता सुनिश्चित करने वाली उचित प्रक्रियाओं को दरकिनार कर रही है।
रामचंद्र द्वारा लगाए गए आरोप पारदर्शी भर्ती प्रक्रियाओं का पालन करने में प्रणालीगत विफलता की ओर इशारा कर रह हैं। किस तरह सार्वजनिक घोषणाओं और निष्पक्ष चयन विधियों का वादा कर बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए चुपचाप भर्तियां की गईं। पारदर्शिता की यह कमी न केवल स्थानीय शासन में लोगों के विश्वास को कम कर रही है, बल्कि योग्य उम्मीदवारों को निष्पक्ष अवसरों से भी वंचित कर रही है।
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रामचंद्र ने कहा कि पंचायत के भीतर भर्ती प्रक्रियाओं की निष्पक्ष जांच जाए और भ्रष्ट तरीके से की गई नियुक्तियों को रद्द की जाए। 1 हज़ार रुपये की सैलरी के लिए डेढ़ लाख रुपये की मांग करना कहां से जायज़ है। आम बैठक आयोजित कर भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए, ताकि स्थानीय सरकारी प्रणालियों में लोगों का विश्वास बहाल रहे।












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