Begusarai News: अब चुप्पी नहीं, सीधा मिलेगा न्याय, महिलाओं की सुरक्षा के लिए सी-बॉक्स व्यवस्था
Begusarai News: बेगूसराय न्यायालय परिसर में कार्यरत महिला न्यायाधीश, महिला अधिवक्ता, पीएलवी और न्यायालय की अन्य महिला कर्मियों को कार्यस्थल पर होने वाले मानसिक या यौन उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) ने "सी-बॉक्स (C-Box)" शिकायत पेटी की व्यवस्था शुरू की है। इसके माध्यम से महिलाएं अब बिना झिझक और गोपनीय तरीके से अपनी शिकायत दर्ज कर सकेंगी।
क्या है सी-बॉक्स व्यवस्था?
* सी-बॉक्स एक गोपनीय शिकायत पेटी है, जिसे व्यवहार न्यायालय परिसर और जिला विधिक सेवा प्राधिकार के एडीआर भवन में स्थापित किया गया है।
* इसमें महिला कर्मी अपनी शिकायत लिखकर डाल सकती हैं।
* हर महीने कमेटी द्वारा इस पेटी को खोला जाएगा और शिकायतों की सुनवाई की जाएगी।
* दोषी पाए जाने पर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

कमेटी की संरचना और जिम्मेदारी
इस व्यवस्था के तहत गठित कमेटी की अध्यक्षता पोक्सो न्यायालय के स्पेशल जज दिव्यशेखर करेंगे। वहीं अनुमंडल न्यायालय स्तर पर कमेटी की अध्यक्ष मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कविता कुमारी होंगी।
प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा और न्यायाधीशों की समिति दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुरूप पहल
एडीजे (प्रथम) महेश प्रसाद सिंह ने बताया कि यह कदम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ऋषिकांत के निर्देश और सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के तहत उठाया गया है। वहीं जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव न्यायाधीश सह अवर न्यायाधीश करुणा निधि प्रसाद आर्या ने कहा कि नालसा के मॉड्यूल के अनुसार यह पहल महिलाओं को कार्यस्थल पर सुरक्षित और सशक्त वातावरण देने के लिए है।
क्यों है यह व्यवस्था जरूरी?
भारतीय न्यायालयों और संस्थानों में अक्सर महिला कर्मियों को पद का दबाव, मानसिक उत्पीड़न या यौन शोषण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। लेकिन शिकायत दर्ज कराने में उन्हेंसमाज और पद-प्रतिष्ठा का डर रहता है। सी-बॉक्स व्यवस्था उनकी पहचान गोपनीय रखते हुए उन्हें निडर होकर न्याय मांगने का अवसर देती है।
इस व्यवस्था का लोकार्पण एडीआर भवन में हुआ, जिसकी अध्यक्षता अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (प्रथम) महेश प्रसाद सिंह ने की। इस मौके पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सबा आलम, एसडीजेएम रूबी कुमारी, मुंसिफ न्यायधीश मासूम खानम समेत कई महिला न्यायाधीश और महिला अधिवक्ता उपस्थित थीं।












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