Banka Lok Sabha Seat: 2019 में JDU Vs RJD की थी लड़ाई, इस बार हैं साथ, क्या बदलेगा नज़ारा?
Banka Lok Sabha Seat, Election 2024: बिहार में लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक पार्टियों ने रणनीतियां बनानी शुरू कर दी है। वहीं सभी 40 लोकसभा सीटों पर सियासी चर्चा शुरू हो गई है, इसी क्रम में आज हम आपको बांका लोकसभा सीट के सियासी इतिहास और समीकरण बताने जा रहे हैं।
बिहार में समाजवादियों के गढ़ वाली सीटों में शुमार की जाने वाली बांका लोकसभा सीट से जदयू के दिग्गज नेता गिरधारी यादव सांसद हैं। इस लोकसभा सीट के अंतर्गत बांका जिले की 5 विधानसभा सीट और भागलपुर जिले की 1 विधानसभा सीट शामिल है।

ग़ौरतलब है कि 2014 लोकसभा चुनाव में देशभर में मोदी लहर थी, लेकिन इस सीट पर भाजपा क़ब्ज़ा नहीं जमा सकी है। हालांकि पिछली लोकसभा चुनाव में NDA गठबंधन की तरफ़ से जदयू प्रत्याशी काफी अच्छे मतों से जीत दर्ज की थी।
बांका लोकसभा सीट यादव बाहुल्य इलाका भी है, लेकिन यहां विनिंग फ़ैक्टर के तौर पर सवर्ण, महादलित, मुस्लिम और अति पिछड़ा मतदाताओं को शुमार किया जाता है। इसी जातिगत समीकरणों पर मंथन कर राजनीतिक पार्टिया उम्मीदवार को चुनावी मैदान में उतारतीं हैं।
आपको बता दें कि पहले यह इलाका भागलपुर में शामिल था, 1957 में यह लोकसभा सीट (बांका) अस्तित्व में आई। मतदाताओं की जातीय समीकरण की बात की जाए तो यहां 3 लाख से ज़्यादा यादव मतदाताओं की तादाद है। वहीं राजपूत, ब्राह्मण, भूमिहार और कायस्थ मतदाताओं की तादाद लगभग साढ़े तीन लाख है।
मुस्लिम मतदाताओं की तादाद दो लाख के करीब हैं, वहीं महादलित, कुर्मी, कोइरी समुदाय के मतदाताओं की तादाद भी ज्यादा है। इसके अलावा किसी भी पार्टी की जीत और हार में सवर्ण मतदाता भी अहम किरदार निभाते रहे हैं।
2019 के लोकसभा चुनाव में NDA गठबंधन की तरफ़ से जदयू प्रत्याशी गिरधारी यादव ने महागठबंधन के राजद प्रत्याशी जय प्रकाश नारायण यादव को चुनावी मात दी थी। करीब दो लाख मतों के फ़र्क से राजद प्रत्याशी को हराया था। ग़ौरतलब है कि उस वक्त जय प्रकाश नारायण उस बांका से सांसद थे।
2024 के लोकसभा चुनाव में इस बार प्रदेश में अलग ही नज़ारा दिखेगा, क्योंकि पिछली बार और इस बार के समीकरण में काफी फ़र्क है। 2019 में कमल (भाजपा) की हिफ़ाज़त तीर (जदयू) कर रही थी। लेकिन इस बार कमल के ख़िलाफ़ जदयू है। भाजपा अपने उम्मीदवार उतार सकती है, वहीं राजद और जदयू के बीच सीट के टिकट को लेकर मतभेद देखने को मिल सकता है। वहीं वाम दल भी अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं।












Click it and Unblock the Notifications