बिहार: 'ज़रा याद करो कुर्बानी', 13 साल के कुताय भी हुए थे देश के लिए शहीद, सूची में है कई और नाम

हजारों की तादाद में लोगों ने अंग्रेज़ों के कब्ज़े वाले धमदाहा और रुपौली थाना को घेर लिया। घेरने के बाद थाना को आग के हवाले कर दिया। स्वतंत्रता सेनानियों के इस हरकत से अंग्रेज़ आग बबूला हो गए और अंधाधुंध फ़यारिंग करने लगे

पूर्णिया, 11 अगस्त 2022। हमारे देश में आज़ादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है, देश के लिए बलिदान देने वाले लोगों को याद कर नई पीढ़ियों को उनकी वीरता की कहानी सुना रहे हैं। इसी कड़ी में हम आपको बिहार के पूर्णिया जिले के शहीद हुए जवानों के बारे में बताने जा रहे हैं। गांधी जी ने 8 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की थी। वहीं उन्होंने मुंबई के गोवालिया टैंक मैदान में लोगों को संबोधित करते हुए 'करो या मरो' का नारा भी दिया था। गांधी जी के इस मंत्र ने पूरे देश वासियों में आज़ादी की लड़ाई के लिए जोश भर दिया था। गांधी जी के इस मंत्र के बाद पूर्णिया ज़िले के हज़ारों लोगों ने देश की आज़ादी के लिए अंग्रेज़ों के खिवाफ बिगुल फूंक दिया था।

अंग्रेज़ों ने की थी अंधाधुंध फ़ायरिग

अंग्रेज़ों ने की थी अंधाधुंध फ़ायरिग

हजारों की तादाद में लोगों ने अंग्रेज़ों के कब्ज़े वाले धमदाहा और रुपौली थाना को घेर लिया। घेरने के बाद थाना को आग के हवाले कर दिया। स्वतंत्रता सेनानियों के इस हरकत से अंग्रेज़ आग बबूला हो गए और अंधाधुंध फ़यारिंग करने लगे। इस हादसे में धमदाहा में 14 लोग शहीद हो गए। वहीं रुपौली में सात लोगों को शाहदत मिली थी। पूर्णिया के टाउन हॉल, धमदाहा और रुपौली में बने शहीद स्मारकों में आज भी इन वीर सपूतों का नाम लिखा हुआ है।

9 अगस्त 1942 को शहीद हुए कुताय और ध्रुव

9 अगस्त 1942 को शहीद हुए कुताय और ध्रुव

1942 में अंग्रेज़ों से लोहा लेते हुए 13 साल के कुताय साह भी शहीद हुए थे। इनकी याद में भी शहीद स्मारक बना है। शहीदों में एक नाम 13 साल के ध्रुव कुंन्डू का भी शामिल हैं, उन्होंने ने भी अंग्रेज़ों को चने चबवा दिए थे। इनके नाम का भी शहीद स्थल बना हुआ है। इन दोनों वीर सपूतों के बारे में इतिहासकार बताते हैं कि 9 अगस्त 1942 को दोनों अंग्रेज़ों से जंग लड़ते-लड़ते शहीद हो गए थे। पूर्णिया शहर के सिपाही टोला के सैकड़ों लोग अंग्रेज़ों के खिलाफ़ जंग लड़ रहे थे, उस दौरान कुताय साह भी अंग्रेज़ों से लोह ले रहे थे। अंग्रेज़ों ने उन्हें चेतावनी दी लेकिन वह बिना डरे आगे बढ़ते रहे। उन्होंने शर्ट का बटन खोलकर अंग्रेज़ों को ललकारते हुए कहा कि चलाओ गोली और आगे बढ़े। इसी दौरान अंग्रेज़ों ने उनकी सीने में गोली मार दी और वह मौक़े पर ही शहीद हो गए।

गुमनामी की कगार पर शहीद स्थल

गुमनामी की कगार पर शहीद स्थल

अंग्रेज़ो ने इसी दौरान ध्रुव कुन्डू को भी गोली मार दी। मधुबनी महावीर मंदिर के प्रांगण में दोनों शहीदों के शव को लाया गया। वहीं ध्रुव कुताय उद्यान बनाया गया। इसके साथ ही सिपाही टोला मे शहीद कुताय साह स्मारक और बनभाग में शहीद ध्रुव कुन्डू का स्मारक बनया गया। दोनों जगहों पर बने स्मारक अनदेखी का शिकार हो चुके हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम में पूर्णिया के 56 सपूतों ने जान की क़ुर्बानी दी थी । उनक याद में बने स्मारक उपेक्षा का शिकार हो चुका है। लोगों का कहना है कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी की वजह से सभी शहीद स्थल गुमनामी की कगार पर है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

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