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बिहार में दिखी विचित्र तितली, पंख पर बना है सांप का आकार, लोगों ने कहा- देवी का अवतार

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पटना, 27 सितंबर 2022। बिहार में इन दिनों विचित्र जीवों के मिलने का सिसलिसा जारी है। बगहा के बनचहरी गांव के पास हरहा नदी में चार आंख वाली सकरमाउथ कैटफिश मिली थी। वहीं अब वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के पास दुर्लभ प्रजाति की एटलस मॉथ तितली मिली है। हरनाटाड़ वनक्षेत्र में एटलस मॉथ मिली तितली के दोनों पंखों पर सांप की आकृति बनी हुई है। बैरिया काला गांव के एक घर में तितली बल्ब पर बैठी थी। जब लोगों ने तितली के पंख पर सांप की आकृति देखी तो वन देवी मानकर उसकी पूजा करने लगे। यह बात पूरे गांव में आग की तरह फैल गई जिसके बाद तितली को देखने के लिए वहां जमावड़ा लग गया।

विदेशों में पाई जाती है एटलस मॉथ तितली

विदेशों में पाई जाती है एटलस मॉथ तितली

वन विभाग की टीम को इस बात की जानकारी मिली तो वह लोग मौक़े पर पहुंचे। टीम ने सोमवार को रेस्क्यू कर तितली को महफूज़ तरीक़े जंगल में दिया।बगहा वनक्षेत्र अधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि दुर्लभ प्रजाती की तितली एटलस मॉथ है। साधारण तौर पर एटलस मॉथ तितली इंडिया में नहीं पाई जाती है। यह तितली ज़्यादातर मलेशिया, अमेरिका, चीन, स्पेन, अफ्रीका जैसे देशों में मिलती है।

24 सेंटीमीटर तक के होते हैं तितली के पंख

24 सेंटीमीटर तक के होते हैं तितली के पंख

सुनिल कुमार (वनक्षेत्र अधिकारी) ने बताया की विभिन्न देशों में इस तितली को अलग-अलग नाम से जाना जाता है। एटलस मॉथ तितली के पंख 24 सेंटीमीटर तक के होते हैं। इसके साथ ही वह 15 से 17 सेंटीमीटर तक पंख फैला सकती है। वहीं जानकारों की मानें तो इस तितली की ज़िंदगी ज्यादा से ज्यादा 10 दिनों की होती है।

10 दिनों की होती है एटलथ मॉथ तितली की ज़िंदगी

10 दिनों की होती है एटलथ मॉथ तितली की ज़िंदगी

कमलेश मौर्या ( अधिकारी, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) की मानें तो जून से अगस्त के आखिर तक एटलथ मॉथ दिखाई देती है। एटलय मॉथ केअंडे से दो सप्ताह में बच्चे निकलते हैं। प्यूपा से बड़ी तितली बनने में 21 दिनों तक का वक़्त लग जाता है। वहीं तितली बनने (पूरा आकार) के बाद 10 दिनों की ही एटलस मॉथ की ज़िंदगी होती है।

बहुत कम लोगों को है 'एटलस मॉथ की जानकारी

बहुत कम लोगों को है 'एटलस मॉथ की जानकारी

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अधिकारी कमलेश मौर्या की मानें तो बहुत कम लोगों को एटलस मॉथ तितली की जानकारी है। दुर्लभ प्रजाति की यह तितली बहुत कम दिखाई देती है। एटलस मॉथ खतरा महसूस होने पर अपने पंख फडफड़ाती है। पंख पर सांप की तरह आकार दिखने पर शिकार करने वाले जीव डर जाते हैं। जिससे वह खुद को महफूज़ कर पाती है। उन्होंने बताया कि एटलस मॉथ तितली दुर्लभ प्रजातियों के कीटों में से एक है जो आमतौर पर नहीं दिखती है।

कांगेर घाटी में है तितलियों की अनोखी दुनिया

कांगेर घाटी में है तितलियों की अनोखी दुनिया

छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग अपने कुदरती नज़ारे के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। कांगेर वैली की प्राकृतिक गुफाओं में विभिन्न प्रकार के जीव जंतु महफूज़ हैं। यहां तितलियों के नज़ारे को देखने दूर-दूर से पर्यटक आते हैं। कुदरती तौर पर विकसित तितली पार्क में कई प्रजातियों की तितलियां पाई जाती है। 200 किलोमीटर के इलाके में फैले कांगेर वैली नेशनल पार्क में छत्तीसगढ़ का दूसरा बड़ा तितली पार्क मौजूद है, जिसे तितली जोन भी कहते हैं। कई प्रजतियों की रंग बिरंगी तितलियां पर्यटकों को बेहद आकर्षित करती हैं। विशेष बात यह है कि किसी खास मौसम में नहीं,बल्कि पूरे साल यहां विभिन्न प्रजातियों की रंग-बिरंगी तितलियों को देखा जा सकता है।

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English summary
atlas moth butterfly found in beria kala near balmiki tiger reserve
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