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गुमनामी के अंधेरे में है हिंदुस्तान का एक और ताजमहल, जानिए क्या है माजरा ?

हिंदुस्तान के सात अजूबों में से एक अजूबा ताज महल भी है जिसे लोग मोहब्बत की निशानी के नाम से भई जानते हैं।

पटना, 06 अप्रैल 2022। हिंदुस्तान के सात अजूबों में से एक अजूबा ताज महल भी है जिसे लोग मोहब्बत की निशानी के नाम से भई जानते हैं। उत्तर प्रदेश के आगरा में मौजूद ताजमहल के बारे में सभी लोग जानते हैं, लेकिन बिहार के पटना साहिब से करीब 50 गज़ पर मौजूद इस ताजमाहल के बारे में ज़्यादातर लोग नहीं जानते हैं। एक ही परिवार में पैदा हुई मुमताज़ और मल्लिका लेकिन एक बहन को पूरी दुनिया जानती है तो वहीं दूसरी बहन गुमनामी का शिकार हो गई। पटना साहिब से गंगा जाने वाले रास्ते में कुछ ही दूरी पर मुमताज महल की बड़ी बहन मल्लिका 'ताजमहल' की चारदीवारी में मजार है।

शाहजहां की साली मल्लिका का मकबरा

शाहजहां की साली मल्लिका का मकबरा

शाहजहां की साली और मुमताज महल की बड़ी बहन मल्लिका पटना (बिहार) के इस ताजमहल में दफन हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो मल्लिका बानो मुमताज महल की सगी बड़ी बहन थी। गंगा किनारे एक बड़े व्यवसायी के घर में सदियों से मल्लिका बानों दफ़न हैं। एक बहन को शाहजहां से इश्क हुआ तो वह उकी बेग़म बन गईं। इसके साथ ही शाहजहां ने अपनी बेगम की याद में ताजमहल की तामीर करवा दी। वहीं उनकी सगी बड़ी बहन मल्लिका ऊर्फ हमीदा बानो कंगन घाट गंगा किनारे में बने ताजमहल गुमनामी के अंधेरे में खो गई। यहां के बुजुर्गों की मानें तो सैफ़ और मल्लिका की मोहब्बत उस वक़्त काफि सुर्खियों में थी लेकिन सूबेदार सैफ खान अपनी बेगम की याद में बने स्मारक ताजमहल की शक्ल नहीं दे सके।

पटना सिटी से शाहजहां का रहा नजदीकी रिश्ता

पटना सिटी से शाहजहां का रहा नजदीकी रिश्ता

पटना के चौक थाना से कुछ ही कंगन घाट पर मल्लिका बानो की मजार है। लेकिन इसकी जानकारी ज्यादा लोगों को नहीं है इस वजह यहां बहुत कम ही लोग आते हैं। इतिहासकारों के के मुताबिक पटना सिटी से शाहजहां का नजदीकी रिश्ता था। तख्त पर बैठते ही अपने साढ़ू सैफ़ खान को शाहजहां ने बिहार का सूबेदार बना दिया था। इसके बाद ही झाऊगंज में गंगा तट पर विशाल मस्जिद औऱ मदरसे का निर्माण सूबेदार सैफ़ खान ने कराया था। मौजूदा वक़्त में उसे मदरसा मस्जिद के नाम से लोग जानते हैं। चहालसूम के नाम से मशहूर 40 खंभोंवाले हॉल की तामीर के साथ ही गुलजारबाग के पास शाही ईदगाह का भी निर्माण करवाया था। सूबेदार सैफ़ खान ने इतनी तामीरें करवाने के बाद भी अपनी मोहब्बत को इतिहास में जगह नहीं दिला पाए।

चादर चढ़ाकर फ़ख़्र महसूस करते थे लोग

चादर चढ़ाकर फ़ख़्र महसूस करते थे लोग

स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि उस वक़्त की नामचीन हस्ती पटना आने पर मल्लिका बानो के मज़ार पर याद से चादर चढ़ाते थे। बिहार के सूबेदार सैफ़ खान की बेग़म मल्लिका उर्फ हमीदा बानो और शाहजहां की साली की मजार पर चादर चढ़ाकर वह लोग फ़ख़्र महसूस करते थे। इसके साथ ही स्थानीय लोगों की मांग है कि गंगा किनारे बने इस मज़ार का ताजमहल की तर्ज़ पर सौंदर्यीकरण किया जाए ताकि पर्यटकों के लिए बिहार में भी घूमने के लिए यह एक महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल बन सके। इसी के ज़रिए शाहजहां की साली मल्लिका के साथ सूबेदार सैफ़ खान को भी लोग जान पाएंगे।

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