अब ट्रेन से ढाई घंटे में ही पहुंच जाएंगे नेपाल, रक्सौल से काठमांडू के लिए बनेगा एक और रेल रूट

भारत से नेपाल के लिए ट्रेन से से सफ़र की शुरुआत की गई है। बिहार के जयनगर से नेपाल के कुर्था के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में रेल लाइन को हरी झंडी दी थी।

पटना, 8 अप्रैल 2022। भारत से नेपाल के लिए ट्रेन से से सफ़र की शुरुआत की गई है। बिहार के जयनगर से नेपाल के कुर्था के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में रेल लाइन को हरी झंडी दी थी। जिसके बाद दोनों देशों के बीच आने-जाने की दुशवारियां कम हो गईं। इस सौगात के बाद अब बिहार वासियों के नेपाल के सफर को आसान करने के लिए एक और नई रेलवे लाइन बनने जा रही है। यहे रेलवे लाइन रक्सौल (बिहार) से काठमांडू (नेपाल की राजधानी) तक जाएगी। गौरतलब है कि रेलवे लाइन के निर्माण के लिए साल 2018 में ही मंज़ूरी मिल चुकी थी। अब तीसरे चरण के सर्वे का काम चल रहा है।

16 हजार 550 करोड़ रुपये की आएगी लागत

16 हजार 550 करोड़ रुपये की आएगी लागत

रक्सौल (बिहार) काठमांडू तक रेल लाइन परियोजना 16 हजार 550 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस रेलवे लाइन में कुल 13 स्टेशनों का प्रावधान है। जिसमें रक्सौल, बीरगंज, बगही, पिपरा, धूमरवाना, काकड़ी, चंद्रपुर, धीयाल, शिखरपुर, सिसनेरी, सथिकेल और काठमांडू का नाम शामिल है। इसके साथ ही 136 किलोमीटर लंबाई वाले रेल लाइन में 32 रोड ओवरब्रिज, 39 छोटी-बड़ी सुरंगें, 41 बड़े रेल पुल, 53 अंडरपास, 259 छोटे पुल भी होंगे। का भी इन सब की कुल लंबाई 41.87 किलोमीटर है।

दो से ढाई घंटे में पहुंच जाएंगे नेपाल

दो से ढाई घंटे में पहुंच जाएंगे नेपाल

रक्सौल से काठमांडू अगर सड़क मार्ग से जाएगें तो करीब 150 किलोमीटर की दूरी तय कर होगी। अब ट्रेन सेवा बहाल होने के बाद यह दूरी घटकर करीब 136 किलोमीटर हो जाएगी। आपको बता दें कि मौजूदा हालात में नेपाल जाने के लिए निजी वाहन या बस की ही सुविधा है। रक्सौल से काठमांडू के बस का किराया की बात की जाए तो करीब 600 रुपये (भारतीय मुद्रा) है। वहीं ट्रेन के टिकट की बात की जाए तो ज़्यादा से ज़्यादा 200 रुपये का टिकट होने की उम्मीद जताई जा रही है। पहले रक्सौल से काठमांडू तक जाने में क़रीब छह घंटे का सफर तय करना होता था। लेकिन ट्रेन से सफ़र करने पर छह घंटे की बजाए सिर्फ़ दो से ढाई घंटे ही लगेंगे। रक्सौल स्टेशन प्रबंधक की मानें तो काठमांडू की तरफ़ से कोंकण रेलवे सर्वेक्षण किया जा रहा है। परियोजना को जल्द से जल्द साल में पूरा करने की कोशिश की जा रही है।

 नेपाल में पहली आधुनिक रेलवे सेवा

नेपाल में पहली आधुनिक रेलवे सेवा

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाल के प्रधान मंत्री शेर बहादुर देउबा ने संयुक्त रूप से भारत की अनुदान सहायता के तहत निर्मित जयनगर (भारत) और कुर्था (नेपाल) के बीच सीमा पार यात्री ट्रेन सेवाओं का पहले ही कर चुके हैं। उद्घाटन किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, परियोजना के पहले चरण में कुल 69.08 किमी लंबे खंड में से 34.50 किमी (जयनगर से कुर्था) को खोला जाएगा, जबकि नेपाल के बर्दीबास तक की शेष लाइन को कुछ समय में चालू कर दिया जाएगा। रेलवे लिंक नेपाल में पहली आधुनिक रेलवे सेवा होगी। पूर्व मध्य रेलवे (ईसीआर) के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) बीरेंद्र कुमार ने कहा है कि बहुप्रतीक्षित रेल सेवाओं के शुरू होने से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और गति मिलेगी। भारत में रेल परियोजना की कुल 2.95 किमी है जबकि शेष 65.75 किमी नेपाल में है।

जयनगर से कुर्था के बीच कुल 9 स्टॉप

जयनगर से कुर्था के बीच कुल 9 स्टॉप

जयनगर से कुर्था के बीच कुल 9 स्टॉप होंगे। बिहार के जयनगर से ट्रेन चलने के बाद इनरवा रुकेगी और अगला स्टेशन खजूरी होगा। ट्रेन खजूरी से महिनाथपुर, महिनाथपुर से वैदाही, वैधी से पाहे, पाहे से जनकपुर और जनकपुर से कुर्था के रूट पर चलेगी। बिहार के जयनगर से कुर्था का किराया सामान्य श्रेणी में 56.25 रुपये जबकि एसी कोच का किराया 281.25 रुपये होगा। सामान्य तौर पर जयनगर से इनरवा का किराया 12.50 रुपये, खजूरी का 15.60 रुपये, महिनाथपुर का 21.87 रुपये, वैधी का 28.12 रुपये, पारेहा का 34.37 रुपये, जनकपुर का 43.75 रुपये और कुर्था का 56.25 रुपये का किराया होगा। एसी श्रेणी में जयनगर से इनरवा का किराया 62.50 रुपये, खजूरी का 78.12 रुपये होगा। इसके अलावा महिनाथपुर का 109.37 रुपये, वैधी का 140.60 रुपये, पाहेखा का 171.8 रुपये, जनकपुर का 218.75 रुपये और कुर्था का 281.25 रुपये है।

1937 में पहली बार अंग्रेजों ने शुरू की थी सेवा

1937 में पहली बार अंग्रेजों ने शुरू की थी सेवा

नेपाल में जयनगर और बिजलपुरा के बीच रेल सेवा पहली बार 1937 में अंग्रेजों द्वारा शुरू की गई थी। इसे 2001 में नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद निलंबित कर दिया गया था। इस सेक्शन में कुल आठ स्टेशन और छह हॉल्ट स्टेशन होंगे। इसमें 47 रोड क्रॉसिंग और 15 बड़े पुल भी होंगे। इसके अलावा, मार्ग पर 127 छोटे पुल हैं। प्रारंभिक योजनाओं के अनुसार, यात्री ट्रेनों के लिए 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति की अनुमति होगी, जबकि माल ढुलाई के लिए यह 65 किमी प्रति घंटे तक सीमित होगी।

भारत-नेपाल यात्रा के लिए ज़रूरी दस्तावेज़

भारत-नेपाल यात्रा के लिए ज़रूरी दस्तावेज़

वैध राष्ट्रीय पासपोर्ट, भारत सरकार/राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन द्वारा अपने कर्मचारियों को जारी किया गया फोटो पहचान पत्र, भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी फोटो पहचान पत्र, भारत के दूतावास/नेपाल में भारत के महावाणिज्य दूतावास द्वारा जारी आपातकालीन प्रमाणपत्र/पहचान प्रमाणपत्र, 65 वर्ष से अधिक और 15 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों के पास उनकी आयु और पहचान की पुष्टि करने के लिए फोटोग्राफिक दस्तावेज होने चाहिए जैसे पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, सीजीएचएस कार्ड, राशन कार्ड, आदि।

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