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Animal Lover: 'दिलदार फ़ौजी' जानवरों की देखभाल के लिए पेंशन का पैसा करते हैं खर्च, हर कोई कर रहा तारीफ़

रिटायर्ड फौजी हरी सिंह 20 साल की उम्र से जानवरों की सेवा करते आ रहे हैं। एक घटना की वजह से उनका मन विचलित हो गया था, जिसके बाद से ही उन्होंने इस पहल की शुरुआत की।

Animal Lover Army Hari Singh

Animal Lover: मंहगाई के इस दौर में लोग पाई-पाई जोड़कर अपनी जिंदगी बसर करने पर मजबूर हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपने साथ-साथ खुद के पैसे से बेज़ुबान जानवरों की देख रेख कर रहे हैं। आज हम आपको बिहार के गोपालगंज जिले के रहने वाले रिटायर्ड फौज़ी हरि सिंह के बारे में बताने जा रहे हैं। जो अपने पेंशन की आधी रक़म बेजुबान जानवरों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए कर रहे हैं। गांव के लोग उन्हें 'दिलदार फौजी' बुलाते हैं। उनकी पहल की हर कोई तारीफ़ कर रहा है। भितभेरवा ग़ांव (सदर प्रखण्ड) के रहने वाले रिटायर्ड फौजी हरि सिंह अपनी दिलदारी की वजह से सुर्खियों में छाए हुए हैं।

परिवार की तरह रखते हैं जानवरों का खयाल

परिवार की तरह रखते हैं जानवरों का खयाल

हरि सिंह अपने परिवार की तरह पशु और पक्षियों का खयाल रखते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि हरि सिंह अपनी सेवा के दौरान से ही जानवरों का खयाल रखते आ रहे हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्होंने अपने इस नेक काम को जारी रखा है। 62 वर्षीय बेटा हरि सिंह के साथ 1974 में उनके साथ एक मामला पेश आया जिसके बाद से उन्होंने बेज़ुबान जानवरों की देख रेख का फैसला लिया। उनके साथ क्या घटना घटी थी इसकी जानकारी हम आपको आगे देंगे, इससे पहले उनकी सेवा के बारे जानते हैं। 1982 में हरि सिंह पारा मिलिट्री फोर्स में शामिल होकर देश की सेवा में जुटे रहे। साल 2017 में दिल्ली सीआईएसएफ पारा मिलीट्री से सेवानिवृत्त हुए।

जानवरों की देखभाल के लिए पेंशन का पैसा खर्च

जानवरों की देखभाल के लिए पेंशन का पैसा खर्च

नौकरी से रिटायर होने के बाद हरि सिंह अपनी पेंशन की रकम से बेजुबान जानवरों की देख रेख करने लगे। 20 साल की उम्र से वह पशु पक्षियों की सेवा करते आ रहे है। बेज़ुबान जानवर की सेवा का खयाल उन्हें कैसे आया ? दरअसल जब वह 20 साल के थे तो एक दुकान पर मीट खरीदने गए। उन्होंने बकरे को काटते हुए देखा, इस दौरान दूसरा बकरा वहां मौजूद था, जिसकी आंखों में डर दिख रहा था। यह नज़ारा देख कर हरि सिंह का मन विचलित हो गया और वह उस दिन से ही मांसाहारी से शाकाहारी बन गए। इसके बाद उन्होंने बेजुबान जानवरों की सेवा करने का फ़ैसला लिया और आज तक उस पर अमल कर रहे हैं।

परिवार की तरफ से भी मिलता है पूरा सहयोग

परिवार की तरफ से भी मिलता है पूरा सहयोग

हरि सिंह को जब नौकरी मिली तो ड्यूटी करने के दौरान उन्हें जब भी मौक़ मिलता था तो जानवरों की सेवा करने लग जाते थे। अपने भोजन में से आधा खाना पशु पक्षियों को खिला देते थे। रिटायर होने के बाद 7 दिसंबर 2022 को उन्होंन बतौर गॉर्ड सदर अस्पताल में नौकरी शुरु कर दी। यहां भी उन्होंने अपने नेक काम को जारी रखा। ड्यूटी के दौरान वह अकसर कुत्तों को बिस्किट खिलाते और प्यार करते हुए दिखा जाते हैं। हरि सिंह के परिवार की बात की जाए तो उनके तीन बेटे हैं, दो बेटा एयफोर्स में तैनात है, एक बेटा डीएवी स्कूल में बतौर शिक्षक काम कर रहे हैं। हरि सिंह के इस नेक काम में उनके परिवार वालों की तरफ से भी पूरा सहयोग मिलता है। वही गांव के लोग उनके पहल की सराहना करते हुए कहते हैं कि लोगों को इनसे सीख लेनी चाहिए।

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