मोकामा कांड की गुत्थी: दुलारचंद यादव की मौत हत्या थी या हादसा? अनंत सिंह जेल में और कई सवाल अब भी अनसुलझे
Dularchand Yadav Anant Singh Mokama News: बिहार विधानसभा चुनाव के बीच पटना जिले का मोकामा इन दिनों सुर्खियों में है। यहां जन सुराज पार्टी और जेडीयू समर्थकों के बीच हुई झड़प ने ऐसा मोड़ लिया कि एक बाहुबली दुलारचंद यादव की मौत हो गई और दूसरा बाहुबली अनंत सिंह जेल चला गया। यह मामला अब सिर्फ एक हत्या की जांच नहीं, बल्कि चुनावी सियासत की सबसे बड़ी पहेली बन चुका है।
झड़प से शुरू हुई कहानी, मौत पर थमा सियासी तूफान
30 अक्टूबर की दोपहर मोकामा के टाल इलाके में चुनाव प्रचार के दौरान जन सुराज उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी और जेडीयू प्रत्याशी अनंत सिंह के समर्थक आमने-सामने आ गए। गाली-गलौज से शुरू हुई बहस जल्द ही पथराव और फायरिंग में बदल गई। इसी अफरातफरी के बीच RJD नेता और बाहुबली दुलारचंद यादव की मौत हो गई।

दुलारचंद के परिजनों का आरोप है कि अनंत सिंह के समर्थकों ने पहले गोली मारी और फिर गाड़ी चढ़ाकर उनकी हत्या कर दी। पुलिस को दोनों ओर से हिंसा की शिकायतें मिलीं। देखते ही देखते यह मामला मोकामा से निकलकर पूरे बिहार की सियासत में चर्चा का केंद्र बन गया।
🔹 दुलारचंद यादव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बढ़ाई उलझन
घटना के बाद आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने मामले को और पेचीदा बना दिया। रिपोर्ट के मुताबिक दुलारचंद यादव की मौत गोली लगने से नहीं, बल्कि भारी वस्तु के शरीर पर गुजरने से हुई। डॉक्टरों ने फेफड़े फटने और हार्ट फेल को मृत्यु का कारण बताया है।
इससे यह सवाल उठने लगा कि क्या दुलारचंद की जान वाकई गोली से गई, या फिर भागते समय किसी गाड़ी की चपेट में आने से यह हादसा हुआ? पुलिस अब तक इस सवाल का जवाब नहीं ढूंढ पाई है।
डीजीपी विनय कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "प्रथमदृष्टया यह हत्या का मामला लगता है, लेकिन क्या जानबूझकर गाड़ी चढ़ाई गई या यह दुर्घटनावश हुआ-यह जांच का विषय है।"
🔹 चार FIR और 80 गिरफ्तारियां-फिर भी सवाल बरकरार
इस एक घटना ने प्रशासन को भी हिला दिया। चार अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गईं, एक दुलारचंद के परिवार की ओर से, एक अनंत सिंह समर्थक जितेंद्र ने, और दो पुलिस ने खुद से दर्ज कीं।इन एफआईआर के आधार पर अब तक 80 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें जेडीयू प्रत्याशी अनंत सिंह भी शामिल हैं।
डीजीपी ने बताया कि मोकामा की घटना को दंगा की श्रेणी में रखा गया है। उन्होंने कहा, "जो भी नेतृत्व की भूमिका में था, उसकी सामूहिक जिम्मेदारी बनती है। इसी वजह से अनंत सिंह को गिरफ्तार किया गया है। इसी आधार पर जन सुराज उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी की गिरफ्तारी भी संभव है।"
🔹 गोली किसकी बंदूक से चली? पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल
पुलिस ने पुष्टि की है कि दुलारचंद यादव के पैर में गोली लगी थी, लेकिन यह गोली किसने चलाई, यह अब तक रहस्य है। पुलिस ने अनंत सिंह के आवास की तलाशी ली, मगर कोई हथियार बरामद नहीं हुआ। जांच एजेंसी अब फॉरेंसिक टीम की मदद से मृतक के पैर से निकली गोली के निशान का विश्लेषण कर रही है।
🔹 1 नवंबर की रात-अनंत सिंह की गिरफ्तारी की कहानी
1 नवंबर की रात करीब 11:45 बजे, पटना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अनंत सिंह को उनके कारगिल मार्केट स्थित आवास से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में यह साफ हुआ कि अनंत सिंह घटना के वक्त मौके पर मौजूद थे और उनके समर्थक हिंसा में शामिल थे।
पटना SSP कार्तिकेय शर्मा ने बताया, "अनंत सिंह को दुलारचंद यादव की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। जांच में उनकी भूमिका सामने आई है।" 2 नवंबर की दोपहर उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अब वे बेऊर जेल में हैं।
🔹 मोकामा हत्याकांड की टाइमलाइन
- 30 अक्टूबर, दोपहर 3:30 बजे: मोकामा के टाल इलाके में प्रचार के दौरान अनंत सिंह और पीयूष प्रियदर्शी के समर्थकों के बीच झड़प। फायरिंग में दुलारचंद यादव घायल हुए और उनकी मौत हो गई।
- 30 अक्टूबर, रात 9:30 बजे: तीन FIR दर्ज-एक दुलारचंद के परिवार की, एक अनंत समर्थक जितेंद्र की और एक पुलिस की ओर से।
- 31 अक्टूबर: पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई। रिपोर्ट में गोली से मौत की पुष्टि नहीं हुई। परिजन और समर्थकों ने हंगामा किया। प्रशासन के समझाने के बाद शव का अंतिम संस्कार हुआ।
- 1 नवंबर, रात 11:45 बजे: अनंत सिंह को उनके पटना स्थित घर से गिरफ्तार किया गया।
- 2 नवंबर, दोपहर 3:45 बजे: पटना पुलिस ने अनंत सिंह को CJM कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा।
🔹 चुनावी सरगर्मी में बढ़ा राजनीतिक तापमान
बिहार में चुनावी माहौल के बीच इस हत्याकांड ने राजनीतिक गलियारों में बवाल मचा दिया है। विपक्ष इसे सत्ता पक्ष की हिंसक राजनीति बता रहा है, जबकि जेडीयू इसे साजिश करार दे रही है। जन सुराज पार्टी ने भी आरोप लगाया है कि पुलिस राजनीतिक दबाव में काम कर रही है।
सीआईडी और स्थानीय पुलिस मिलकर केस की जांच कर रही हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। मगर अब तक यह सवाल जस का तस है क्या दुलारचंद यादव की मौत एक सोची-समझी हत्या थी या फिर एक अफरातफरी में हुआ हादसा? जवाब चाहे जो भी हो, लेकिन मोकामा की इस घटना ने बिहार की सियासत में एक बार फिर 'बाहुबली राजनीति' और कानून के टकराव की पुरानी बहस को जिंदा कर दिया है।












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