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Bihar News: गंगाजल लेकर हाथ के बल चलते हुए बाबा के दर्शन के लिए निकला भक्त, 53 दिनों से जारी है यात्रा

शिव भक्ति में लीन अनोखा भक्त अशोक उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रसडा नाथनगर का रहने वाला है। सुल्तानगंज-देवघर कच्ची कांवरिया पथ पर खैरा मोड़ के पास लोगों ने जब उन्हें हाथ के बल पर चलते देखा हैरान रह गए। लोगों ने कहा कि..

पटना, 3 अक्टूबर 2022। नवरात्रि शुरू होते ही भक्ति की विभिन्न तरह की खबरें देखने को मिल रही है। इसी कड़ी में आज हम आपको एक अनोखे भक्त के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने हाथ के बल पर चलते हुए बाबा के दर्शन की ठानी है। लगातार 53 दिनों से उनकी यात्रा जारी है। शिव भक्ति में लीन 46 वर्षीय अशोक गिरी (मनु सोनी) गंगाजल लेकर हाथ के बल ही बाबा बैद्यनाथ के दरबार में पहुंचने का संकल्प लिया है। उन्होंने श्रावणी पूर्णिमा को सुल्तानगंज से अपनी यात्रा की शुरुआत की थी।

शिव भक्ति में लीन अनोखा भक्त अशोक

शिव भक्ति में लीन अनोखा भक्त अशोक

शिव भक्ति में लीन अनोखा भक्त अशोक उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रसडा नाथनगर का रहने वाला है। सुल्तानगंज-देवघर कच्ची कांवरिया पथ पर खैरा मोड़ के पास लोगों ने जब उन्हें हाथ के बल पर चलते देखा हैरान रह गए। लोगों ने कहा कि आधुनिक युग में इस तरह शिव भक्त बहुत ही कम को देखने को मिलते हैं। इसके बाद यह बात आग की तरह फैल गई और शिव भक्त अशोक को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी । आपको बता दें कि 12 अगस्त 2022 (शुक्रवार) सुबह 7:07 बजे अशोक ने अपने यात्रा की शुरुआत की थी। बाबा अजगैबीनाथ मंदिर गंगाघाट (सुल्तानगंज) से उन्होंने जल लेकर बिच्छू डंक दंड कांवर यात्रा की शुरुआत की थी।

हाथ के सहारे चलकर बाबा बैद्यनाथ का दर्शन

हाथ के सहारे चलकर बाबा बैद्यनाथ का दर्शन

अशोक गिरी (मनु सोनी) गंगाजल लेकर हाथ के सहारे चलकर ही बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के लिए चल पड़ें हैं। पिछले 53 दिनों से उनकी यात्रा लगातार जारी है। स्थानीय लोगों ने जब अशोक को देखा तो उन्होंने कहा कि इतने कड़े संघर्ष के साथ सफर करते हुए शिव भक्त ज़रा सा भी थकान महसूस नहीं कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इससे पहले इस तरह के भक्त को नहीं देखा था। वहीं अशोक की संकल्प के बारे में जिसने भी सुना उन्हें देखने पहुंच गया।

10 साल तक लगातार कावड़ यात्रा कर रहे अशोक

10 साल तक लगातार कावड़ यात्रा कर रहे अशोक

शिवभक्त अशोक गिरी ने बताया कि जल लेकर हाथ के बल चल कर सफर करने को बिच्छू डंक दंड कांवर यात्रा का नाम दिया गया है। 1991 में उन्होंने शिव भक्ति में लीन होकर सुल्तानगंज से देवघर तक की कावड़ यात्रा की शुरुआत की थी। 10 साल तक लगातार कावड़ यात्रा करने के बाद वह 2001 से डाक बम के रूप में बाबा बैद्यनाथ के दरबार में हाजिरी लगाते आ रहे हैं।

बिच्छू डंक दंड कांवर यात्रा की शुरुआत

बिच्छू डंक दंड कांवर यात्रा की शुरुआत

अशोक गिरि ने बताया कि साल 2002 से सावन महीने के हर सोमवार को बाबा को डाक बम के तौर पर जल चढ़ाने लगे। 2003 से 2020 तक सावन महीने के शुक्रवार और सोमवार को लगातार वह सुल्तानगंज से देवघर की यात्रा डाक बम के तौर करते हुए बाबा का जलाभिषेक कर रहे हैं। उन्होंने बिच्छू डंक दंड कांवर यात्रा के बारे में बताते हुए कहा कि इस बार तीसरी सोमवारी को वह बाबबा बैद्यनाथ के दरबार में डाक बम के तौर पर पहुंचे। इसी दौरान उन्हें महसूस हुआ की महादेव का आदेश है कि मैं बिच्छू डंक दंड कांवर यात्रा करूं।

108 दिन में पूरी करेंगे यात्रा- अशोक

108 दिन में पूरी करेंगे यात्रा- अशोक

शिव भक्त अशोक गिरि ने कहा कि मुझे लगा कि महादेव का आदेश मैं शारीरिक रूप से समर्थ हूं। इसलिए सुल्तानगंज से जल लेकर बिच्छू डंक दंड (हाथ के बल चल कर यात्रा) कर महादेव का जलाभिषेक करूं। इसलिए अशोक गिरि ने आदेश को मानते हुए सावन माह की पूर्णिमा के दिन सुल्तानगंज से जल लेकर बिच्छू डंक दंड यात्रा करते हुए देवघर के लिए निकल पड़े। अशोक गिरि ने 108 दिन के अंदर इस यात्रा पूरी करने का लक्ष्य रखा है।

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