BJP छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए मुजफ्फरपुर MP अजय निषाद, एक और सांसद के पार्टी छोड़ने की चर्चा हुई तेज
मुजफ्फरपुर से बीजेपी सांसद अजय निषाद आज कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। बीजेपी ने इस बार मुजफ्फरपुर से अजय निषाद को टिकट नहीं दिया था। जिससे नाराज होकर उन्होंने पार्टी छोड़कर कांग्रेस से जुड़ने का फैसला किया।
अजय निषाद ने दिल्ली में कांग्रेस की सदस्यता ली। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस दौरान बिहार कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश सिंह भी मौजूद रहे। अजय निषाद ने कहा कि बिहार में अब कांग्रेस कैसे मजबूत हो, इसके लिए वे प्रयास करेंगे।

मुजफ्फरपुर सांसद अजय निषाद ने एक दिन पहले ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से मुलाकात की थी। इसके बाद से ही उनके कांग्रेस में जाने की चर्चा तेज हो गई थी। ऐसी चर्चा है कि कांग्रेस मुजफ्फरपुर से अजय निषाद को टिकट दे सकती है।
कांग्रेस की सदस्यता लेने के दौरान अजय निषाद ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें जीत मिली, लेकिन एक बार भी बीजेपी नेताओं ने उनसे बात नहीं की और टिकट काट दिया। जब उन्होंने इसका कारण पूछा तो बताया गया कि आपका सर्वे रिपोर्ट ठीक नहीं था। जब पिछले चुनाव में 4.50 लाख से अधिक मतों के अंतर से जीत की बात बताई, तो बीजेपी नेताओं ने कहा कि वो आपका वोट नहीं था, सब ऊपर वाला का वोट था।
अजय निषाद ने आगे कहा कि वे इस बार के चुनाव में अहंकार को तोड़ने और अपने सम्मान को वापस हासिल करेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी अहंकार से नहीं चलता, ये चुनाव धन-बल का चुनाव नहीं है, जनता के समर्थन से चलती है।
आपको बता दें कि मुजफ्फरपुर में बीजेपी ने डॉ. राजभूषण चौधरी को मैदान में उतारा है। दिलचस्प बात ये है कि डॉ. चौधरी पिछली बार बीजेपी के खिलाफ मैदान में थे। वे मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी से चुनाव लड़े थे लेकिन उन्हें हार नसीब हुई थी।
छेदी पासवान भी नाराज
अजय निषाद के पार्टी छोड़ने के बाद सासाराम से बीजेपी सांसद छेदी पासवान भी कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। कहा जा रहा है कि सासाराम से छेदी पासवान कट गया है जिससे वे नाराज चल रहे हैं। कहा जा रहा है कि पूर्व स्पीकर मीरा कुमार की वजह से अब तक छेदी पासवान पर मुहर नहीं लग पाई है। दरअसल मीरा कुमार को पिछले 2 चुनावों में छेदी पासवान से हार मिली है। अगर छेदी पासवान कांग्रेस में शामिल होते हैं तो इससे मीरा कुमार का राजनीति प्रभाव कमजोर पड़ सकता है।












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