अहिल्या स्थान: जहां प्रभु राम के चरण रज से शाप मुक्त हुईं थी देवी अहिल्या
भारत में कई ऐसे मंदिर और तीर्थ स्थल हैं, जिनका रामायण काल से विशेष संबंध जुड़ता है। इन्हीं में से एक है बिहार के बक्सर में अहिरौली का माता अहिल्या स्थान। यही वो पावन स्थली है, जो त्रेता युग में भगवान श्रीराम के चरण पड़ने से धन्य हो उठी थी।
आज जिस स्थान में माता अहिल्या का ये धाम है, वहीं पर भगवान राम ने शिला बन चुकीं माता अहिल्या को अपने चरणों से छूकर उनका उद्धार किया था। ऐसा माना जाता है कि त्रेता युग में श्री राम और श्री लक्ष्मण की पंच कोशी यात्रा बक्सर के अहिरौली में इसी सिद्धाश्रम से शुरू हुई थी।

इसी स्थान पर कभी महर्षि गौतम का आश्रम हुआ करता था था। जो अपनी पत्नी अहिल्या के साथ रहा करते थे। त्रेता में श्रीराम और लक्ष्मण जी अपने गुरु ऋषि विश्वामित्र के साथ जब मिथिला में स्थित विदेह नगरी जनकपुर की ओर जा रहे थे, तो निर्जन वन में उन्हें एक आश्रम दिखाई दिया, लेकिन वहां उन्हें ना कोई मुनी दिखे और ना ही कोई अनुचर दिखाई दिए। इस पर श्रीराम ने आश्चर्य से ऋषि विश्वामित्र से इसका कारण पूछा।
तब ऋषि विश्वामित्र ने उन्हें बताया कि ये आश्रम महर्षि गौतम का है। यहां वो तो नहीं रहते लेकिन शिला रूप में आज भी उनकी अर्धांगिनी आपके चरण रज की प्रतीक्षा में हैं। ऋषि विश्वामित्र के कहने पर जब प्रभु राम ने उस शिला को अपने चरणों से स्पर्श किया तो देवी अहिल्या पुन: स्त्री रूप में आईं और इस तरह से उनका उद्धार हुआ।
देवी अहिल्या का उद्धार करने के पश्चात श्रीराम और लक्ष्मण गुरु ऋषि विश्वामित्र के साथ ईशान कोण में विदेह नगरी जनकपुर की ओर प्रस्थान कर गए। भगवान राम के आगमन के कारण इस स्थान की आज भी बड़ी मान्यता है। माना जाता है अपने जिन पावन चरण रज से उन्होंने देवी अहिल्या को श्राप मुक्त कर उनका उद्धार किया था, वो चरण रज आज भी यहां की मिट्टी में है। श्रद्धालुओं का मानना है, कि माता अहिल्या के इस पावन धाम में आने वालों को कष्टों से मुक्ति मिलती है।
तीर्थयात्री आज भी अगहन मास में गंगा में पवित्र स्नान के साथ शुरू होने वाली पंचकोशी यात्रा से जुड़ते हैं। लाखों भक्त यहां हर वर्ष कई धार्मिक कर्मकांड और जल भरी कलश यात्रा, श्रीमद्भगवद कथा और सनातन संस्कृति समागम आदि में सम्मिलित होते हैं,। अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर के साथ-साथ रामायणकालीन इस महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल की महिमा भी आलौकिक हो उठी है। बिहार के बक्सर जिले के इस पवित्र स्थल पर आने वाले लोग भी अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर को लेकर उत्साहित हैं।












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