LJP के बाद बिहार में कांग्रेस विधायकों के टूटने की अटकलें तेज, जानिए क्या कह रही है JDU?
पटना, 15 जून: बिहार में चिराग पासवान की पार्टी लोजपा टूट चुकी है। अब कांग्रेस को लेकर भी इसी तरह की अटकलों का बाजार गर्म है। हालांकि, कांग्रेस के नेता ऐसी किसी भी संभावना से इनकार कर रहे हैं। लेकिन, सत्ताधारी जेडीयू की ओर से इस तरह की चर्चा को हवा दी जा रही है कि पार्टी के कई विधायक उनके संपर्क में हैं। असल में यह सारी सियासी कवायद लालू यादव के जन्मदिन के बाद से शुरू हुई है, जबसे राजद विधायक और लालू के बेटे तेज प्रताप यादव ने हम के नेता जीतन राम मांझी से मुलाकात की है।

'कांग्रेस के 3 विधायकों का और इंतजार'
दि हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में सत्ताधारी जदयू के कुछ नेताओं पर भरोसा करें तो प्रदेश के 19 कांग्रेसी एमएलए में से 10 उनके साथ लगातार संपर्क में हैं और 'किसी भी समय' पार्टी तोड़ने के लिए तैयार बैठे हैं। एक वरिष्ठ जदयू नेता ने कहा है, 'दलबदल-विरोधी कानून से बचने के लिए हमें अब दो-तिहाई से विभाजन के लिए कांग्रेस के सिर्फ तीन एमएलए की जरूरत है।' उन्होंने यह भी उम्मीद जताई है कि 'ये तीन भी जल्द ही आ जाएंगे।' पार्टी सूत्रों ने यहां तक कहा है कि कांग्रेस के इन 10 विधायकों में से 3 अल्पसंख्यक समुदाय के हैं और वो भी 2020 के विधानसभा चुनाव में भागलपुर के इलाके से जीते हैं। उन्होंने कहा है, 'अभी आगे-आगे देखिए होता है क्या.....'

एक भी कांग्रेस विधायक नहीं टूटेगा- प्रेम चंद्र मिश्रा
हालांकि, कांग्रेस की ओर से इन सभी कयासबाजियों को महज अफवाह बताया जा रहा है। पार्टी वरिष्ठ नेता और एमएलसी प्रेम चंद्र मिश्रा ने इससे पूरी तरह से इनकार करते हुए पत्रकारों से कहा है, 'पार्टी का एक भी एमएलए अलग होने के लिए तैयार नहीं है।' उन्होंने कहा, 'सत्ताधारी दल के कुछ नेताओं की ओर से सिर्फ यह अफवाहें फैलाई गई हैं, ताकि कंफ्यूजन पैदा हो। बिहार में कांग्रेस पार्टी के एमएलए पूरी तरह से एकजुट हैं और उनमें से एक भी कहीं जाने को तैयार नहीं है। उन्हें कहने दीजिए वह जो भी कहना चाहते हैं, लेकिन हम मजबूती के साथ एकसाथ हैं।'

कांग्रेस के अंदर गुटबाजी की भी अटकलें
दरअसल, पिछले साल अक्टूबर-नवंबर में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने महागठबंधन के तहत 70 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन उसके सिर्फ 19 उम्मीदवार ही चुनाव जीत सके। उसी के बाद से पार्टी के अंदर गुटबाजी की अटकलें भी चरम पर हैं और चुनाव के बाद पटना स्थित पार्टी मुख्यालय सदाकत आश्रम में कुछ अप्रिय दृश्य भी सामने आ चुके हैं। वैसे प्रदेश में पार्टी के इंचार्ज भक्त चरण दास पहले किसी भी तरह के आंतरिक कलह की बातों का खंडन कर चुके हैं।

आरजेडी ने शुरू किया है सियासी खेल !
बता दें कि बिहार में दल-बदल की अटकलों को हवा लोजपा कांड से पहले से ही मिलने लगी थी, जब आरजेडी नेता लालू यादव के जन्मदिन के मौके पर उनके बड़े बेटे और एमएलए तेज प्रताप यादव पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता जीतन राम मांझी से लंबी मुलाकात कर आए थे। इसके बाद विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश सहनी ने भी ऐसा बयान दिया, जो सत्ताधारी एनडीए गठबंधन के लिए टेंशन का कारण बन गया। इन दोनों दलों के 4-4 विधायक हैं और ये सभी दल बिहार में एनडीए का हिस्सा हैं और सरकार में हैं। लेकिन, लालू यादव के जेल से जमानत पर निकलने के बाद से इन अफवाहों को भी खूब हवा दी गई है कि इन दलों के 8 विधायकों और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के 5 विधायकों के सहयोग से आरजेडी तख्ता पलट करने की कोशिश कर सकती है। राज्य में बहुमत का आंकड़ा 122 है।












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