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बिहार: 10वीं पास ये छात्र किसी Scientist से नहीं हैं कम, छोटी सी उम्र में कमाल ही कर दिया

बिहार के युवा अपनी प्रतिभा से विदेशों तक में देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। आज हम आपको बिहार के तीन ऐसे छात्रों की प्रयोग के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे पढ़कर आप भी कहेंगे ये छात्र किसी साइंटिस्ट से कम नहीं...

पटना, 20 सितंबर 2022। बिहार के युवा अपनी प्रतिभा से विदेशों तक में देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। आज हम आपको बिहार के तीन ऐसे छात्रों की प्रयोग के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे पढ़कर आप भी कहेंगे ये छात्र किसी साइंटिस्ट से कम नहीं हैं। ग़ौरतलब है कि 10वीं पास छात्रों ने ऐसा-ऐसा एक्सपेरिमेंट किया जिसे करने में काफी तजुर्बे की ज़रूरत होती है। एक ने तो ऐसा एक्सपेरिमेंट किया उसके प्रयोग पर पटना आईआईटी ने भी मुहर लगा दी है। वहीं दो युवकों ने तो देश के जवानों के लिए डिवाइस तक तैयार कर दिया जिससे आर्मी को काफी मदद मिलेगी। इसके साथ ही मज़दूरों के लिए इलेक्ट्रिक बाइक भी बनाई है, जिससे बिना पेट्रोल की चिंता किए 50 किलोमीटर तक बिना रुके सफर कर सकते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं बिहार के लाल ने किस तरह से कम उम्र में कमाल कर दिखाया है।

भारतीय सेना की मदद के लिए बनाया डिवाइस

भारतीय सेना की मदद के लिए बनाया डिवाइस

पहले एक्सपेरिमेंट की बात करें तो बिहार के बेतिया जिले के रहने वाले युवक संजीत रंजन ने सेना के लिए एक डिवाइस तैयार किया है। जिसकी मदद से सेना गर्मी में ठंडी और ठंडी में गर्मी का लुत्फ़ उठा सकेंगे। एक लफ़्ज़ में कहें तो युवक ने आर्मी जवानों के लिए पोर्टेबल एसी बनाई है। जिसे पॉकेट में रख कर मौसमी चुनौतियों से सामना किया जा सकता है। धुसवा गांव (नौतन प्रखंड) के रहने 28 वर्षीय संजीत रंजन ने बताया कि, इस डिवाइस को सेना के जवान अपने पॉकेट में रख कर बखूबी ड्यूटी को अंजाम दे सकते हैं। इस डिवाइस की यह खासियत है कि गर्मी के मौसम यह ठंडा करेगा और ठंड के मौसम में गर्मी एहसास कराएगा। संजीत का दावा है कि बर्फीली इलाकों में तैनात जवान भी इस डिवाइस की मदद से बढ़े हुए तापमान का आनंद ले सकेंगे।

'अभी तक नहीं बना ऐसा डिवाइस'

'अभी तक नहीं बना ऐसा डिवाइस'

संजीत ने बताया पॉवरबैंक की तरह दिखने वाले डिवाइस में हीटर, एसी, चार्जेबल बैट्री, एयरपंप सर्किट (गर्म और ठंडा करने वाला सर्किट) इंस्टॉल्ड है। युवक की मानें तो एक बार चार्ज होने पर 6 घंटे से 24 घंटे तक बिना रुके यह काम कर सकता है। इसमे लगी चार्जेबल बैट्री को दो साल में बदलना पड़ेगा। ग़ौरतलब है कि आर्मी सेना की मदद के लिए तैयार किए गए इस डिवाइस को बनाने में सिर्फ़ एक हज़ार रुपये की लागत आई है। संजीत के मुताबिक छोटे से डिवाइस को पॉकेट में आसानी से रख सकते हैं।

सौर ऊर्जा से खुद चार्ज होगी बैट्री

सौर ऊर्जा से खुद चार्ज होगी बैट्री

डिवाइस से एक तार बाहर निकाला गया है जिसे बदन के किसी भी हिससे पर टच कराकर रखना है। गर्म और ठंडा दोनों स्विच डिवाइस में मौजूद है, गर्मी लगने पर ठंड वाला स्विच ऑन करते ही माइनस जीरो डिग्री तापमान में भी आपको गर्मी का अहसास होगा। वहीं बहुत तेज़ गर्मी में ठंड वाला स्विच ऑन करने पर भी आपका बदन बिल्कुल ठंडा रहेगा। संजीत ने दावा करते हुए कहा कि पूरी दुनिया में अभी तक ऐसा डिवाइस नहीं बनाया गया है। संजीत ने बताया कि डिवाइस में लगी चार्जेबल बैट्री साधारण बैट्री नहीं हैं, उसने खुद सुपर बैट्री का निर्माण किया है। इस बैट्री को चार्ज करने की ज़रूरत नहीं होगी। संजीत ने दावा किया है कि यह बैट्री अपने आप को वायुमंडल से सौर ऊर्जा को खींचकर खुद चार्ज हो जाएगी।

आर्मी के लिए राजा राम ने बनाया अनोखा डिवाइस

आर्मी के लिए राजा राम ने बनाया अनोखा डिवाइस

बिहार के भागलपुर जिले के सलेमपुर गांव निवासी राजा राम ने दो प्रयोग कर सुर्खियों बटोरी हैं। कबाड़ से इलेक्ट्रिक बाइक बनाने के बाद उन्होंने जवानों को लैंडमाइंस से बचाने के लिए एक जूता बनाया है। राजा राम का दावा है कि उनके द्वारा बनाए गए जूते पहने हुए अगर आर्मी जवानों का पैर अगर लैंडमाइंस पर पड़ेगा तो ब्लास्ट नहीं होगा। वहीं अगर आतंकवादी का पैर पड़ेगा तो लैंडमांइस ब्लास्ट कर जाएगा। राजा राम ने बाज़ाबते वीडियो पर अपने एक्सपेरिमेंट को साबित करके दिखाया है। जब मीडियाकर्मी ने उसके द्वारा बनाए गए लैंडमाइंस पर पैर रखा तो ब्लास्ट कर गया। वहीं जब राजा राम ने खुद पैर रखा तो लैंडमाइंस ब्लास्ट नहीं हुआ।

राजा राम ने बनाया अनोखा जूता

राजा राम ने बनाया अनोखा जूता

राजा राम ने कहा कि मैंने अपने द्वारा बनाया हुआ जूता पहनकर लैंडमाइंस पर पैर रखा था इसलिए ब्लास्ट नहीं हुआ। वहीं दूसरे के द्वारा पैर रखने पर ब्लास्ट इसलिए हुआ क्योंकि उसने दूसरा जूता पहना हुआ था। राजा राम ने कहा कि रिसर्च द्वारा बनाए गए जूते वाली डिवाइस की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं करेंगे। 5 महीने की कड़ी मेहनत करने के बाद इस डिवाइस को बनाने में क़रीब 2 हज़ार रुपये खर्च हुए हैं। सरकार मुझे आर्थिक मदद करे तो मैं रिसर्च कर और भी बेहतरीन डिवाइस बनाऊंगा।

फोन से भी स्टार्ट हो सकती है बाइक

फोन से भी स्टार्ट हो सकती है बाइक

इलेक्ट्रिक बाइक बनाने में राजा राम केबल मोटर लगाया जिसकी किमत 10 हजार रुपए है। इसके अलावा बैटरी (24 वोल्ट), पहिया, कंट्रोलर भी लगाया है। वही बाइक की कवर के लिए टिन का इस्तेमाल किया। बाइक की बॉडी के लिए लोहा और पुराने टायर जैसे सामानों का इस्तेमाल कर इलेक्ट्रिक बाइक बनाई है। राजा राम ने बताया कि ज्यादा पैसे लगाकर अच्छी बैट्री भी लगाई जा सकती है। इससे बाइक की माइलेज और भी बढ़ सकती है। राजा राम ने बाइक की एक और खासियत बताई की इलेक्ट्रिक बाइक को चाभी के साथ-साथ मोबाइल फोन से भी स्टार्ट कर सकते हैं।

सस्ती बिजली का उत्पादन मुमकिन

सस्ती बिजली का उत्पादन मुमकिन

जमुई ज़िले के रहने वाले 10वीं पास छात्र रोहित ने सात साल की कड़ी मेहनत से तकनीक विकसित किया है। इस तकनीक के ज़रिए पानी से सस्ती बिजली का उत्पादन किया जा सकता है। ग़ौरतलब है कि रोहित के आईडिया पर आईआईटी पटना ने भी मुहर लगा दी है। सिर्फ़ 12 प्रतिशत ऊर्चा की खपत से दोबारा पानी से बिजली बनाई जा सकती है। रोहित के सीआईएमपी के इंक्यूबेशन फाउंडेशन से इंक्यूबेटेड स्टार्ट-अप का नाम हाइड्रो लिफ्टिंग टेक्नोलॉजी है। रोहित के सात साल की शोध के हाइड्रो लिफ्टिंग तकनीक को आईपीआर केंद्र कोलकाता से प्रोविजनल पेटेंट भी मिल गया है। इस तकनीक के खासियत की बात की जाए तो बहुत ही कम खर्च में नीचे वाले डैम से ऊपर वाले डैम में पानी पहुंचाया जा सकता है।

हाइड्रो लिफ्टिंग तकनीक का रोहित ने किया ईजाद

हाइड्रो लिफ्टिंग तकनीक का रोहित ने किया ईजाद

आपको बता दें कि बिजली बनाने के लिए डैम में एक ही बार पानी भरने की आवश्यकता होती है। इस तकनीक से एक ही पानी नीचे और ऊपर वाली डैम में रोटेट होता रहेगा। निचले डैम से पानी ऊपर वाले डैम में ले जाने में बनाई गई बिजली का सिर्फ 12 फ़ीसद ही खर्च होगा। वहीं बची हुई 88 फ़ीसद बिजली का इस्तेमाल दूसरे कामों में किया जा सकेगा। ग़ौरतलब है कि अभी तक नीचे वाले डैम से पानी ऊपर वाले डैम में ले जाने में काफ़ी ख़र्च आता था। यही वजह है कि बिजली उत्पादन के लिए इस नीचे वाले डैम से ऊपर वाले डैम में पानी नहीं पहुंचाया जाता था। रोहित की नई तकनीक से कम खर्च में यह काम मुमकिन हो पाएगा।

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