चावल की लंबित सब्सिडी को लेकर बीजेडी सांसदों ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से की मुलाकात
बीजेडी ने मंगलवार को केंद्र सरकार के समक्ष राज्य को दी जाने वाली लंबित खाद्द सब्सिडी के भुगतान का मुद्दा उठाया।
भुवनेश्वर, 22 जुलाई। बीजेडी ने मंगलवार को केंद्र सरकार के समक्ष राज्य को दी जाने वाली लंबित खाद्द सब्सिडी के भुगतान का मुद्दा उठाया। इसके भारतीय खाद्द निगम द्वारा शेष बचे चावल को खाली करने की मांग की। बीजेडी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्द और सार्वजनिक खरीद मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की और अपनी मांगों को उठाया। सांसदों ने राज्य में बोरियों की कमी का भी मुद्दा उठाया। सांसदों ने अपनी मांगों को लेकर पीयूष गोयल को ज्ञापन सौंपा। पीयूष गोयल से मुलाकात के बाद सांसदों ने कहा कि उन्होंने हमारी मांगों पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

ज्ञापन में दावा किया गया है कि केंद्र बार-बार याद दिलाने के बावजूद 2003-04 से ओडिशा की लंबित 6081.45 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी करने में देरी कर रहा है। राज्य सरकार की प्रमुख खरीद एजेंसी, ओडिशा राज्य नागरिक आपूर्ति निगम को अभी तक सब्सिडी और अग्रिम सब्सिडी नहीं मिली है।
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ज्ञापन में कहा गया है कि सब्सिडी में देरी के कारण इसपर लगभग 4883.55 करोड़ रुपए का अतिरिक्त ब्याज भी लगता है, जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती है और इसका भुगतान केंद्र सरकार द्वारा किया जाना चाहिए। बीजेडी सांसदों ने कहा कि हालांकि पिछले कुछ वर्षों में धान की खरीद बढ़ रही है, इसके बावजूद भारतीय खाद्द निगम द्वारा चावल की निकासी एक अनुरूप और सुसंगत तरीके से नहीं हुई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि हालांकि राज्य में 2016-17 से 2020-21 खरीफ विपणन सत्र (केएमएस) तक 214.4 लाख टन चावल का उत्पादन किया गया है, एफसीआई द्वारा केवल 75.87 लाख टन का ही उत्पादन किया गया है। राज्य ने 2020-21 केएमएस में सबसे अधिक 52.35 लाख टन चावल का उत्पादन किया, लेकिन 6 जुलाई, 2021 तक केवल 12.5 लाख टन का उठाव हुआ। सांसदों ने आरोप लगाया कि बचे हुए चावल की समय पर निकासी न होने राज्य के गोदाम प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि चावल के लिए कोई खरीदार नहीं मिलेगा तो राज्य को हजारों करोड़ रुपए का नुकसान होगा।












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