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कौन हैं Teacher नीरज सक्सेना? जिन्होंने बैलगाड़ी से पहुंचाई बच्चों तक किताबें, अब राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित

मध्य प्रदेश के रायसेन में बंजर पथरीली जमीन पर पेड़ उगाने वाले और बैलगाड़ी से बच्चों तक किताबें पहुंचाने वाले शिक्षक नीरज कुमार सक्सेना को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित करेंगी।

रायसेन,26 अगस्त। रायसेन जिले के का आदिवासी गांव शालेगढ़ के प्राथमिक स्कूल में, जहां पहुंचने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलकर जाना पड़ता है। वहां पर युवा नीरज सक्सेना को प्राथमिक शिक्षक के रूप रूप में पदस्थापना मिली। जब वह पहले दिन स्कूल पहुंचे तो, उन्हें लगा कि वे कहां आकर फंस गए हैं। तभी उन्हें स्वामी विवेकानंद की कहे शब्द याद आए कि 'संघर्ष जितना बड़ा होगा, जीत भी उतनी बड़ी होगी' इन शब्दों को नीरज सक्सेना ने अपनी ताकत बनाया और स्कूल के बंजर पथरीले आंगन में शिक्षा के रास्ते खोल दिए। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक को शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और स्वच्छता के प्रति समर्पित बना दिया। इसी संघर्ष का सफल होने अब शिक्षक दिवस पर मिलने जा रहा है नीरज सक्सेना का चयन राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए हुआ है उन्हें 5 सितंबर को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। आइए जानते हैं शिक्षक नीरज सक्सेना के संघर्ष की कहानी...

संघर्ष की कहानी नीरज सक्सेना की जुबानी

संघर्ष की कहानी नीरज सक्सेना की जुबानी

शिक्षक नीरज कुमार सक्सेना ने बताया कि 6 नवंबर 2009 को उन्होंने सालेगढ़ के प्राथमिक स्कूल में शिक्षक की जिम्मेदारी संभाली थी। पहली बार जब वो सालेगढ़ के स्कूल पहुंचे तो पैरों तले जमीन खिसक गई। चारों तरफ जंगल और सुनसान इलाका स्कूल में महज 20 से 22 बच्चे व छोटे-छोटे दो कमरे और पथरीली जमीन देखकर मन कांप गया। स्कूल पहुंचने का साधन बैलगाड़ी या पैदल वह भी 4 से 5 किलोमीटर। वहां जो शिक्षक पहले से थे, वह भी ट्रांसफर करा कर चले गए थे। लेकिन उन्हें स्वामी विवेकानंद के कहे शब्द याद आए और संकल्प लेकर उन्होंने अपना काम शुरू किया।

पथरीली बंजर भूमि पर तार फेंसिंग कर एक सुव्यवस्थित पार्क किया तैयार

पथरीली बंजर भूमि पर तार फेंसिंग कर एक सुव्यवस्थित पार्क किया तैयार

सबसे पहले नीरज सक्सेना ने लोगों के घर घर जाकर शिक्षा का महत्व बताया और अभिभावकों को स्कूल से जुड़ा। इसके बाद स्वच्छता एवं पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक किया। धीरे-धीरे अभिभावक और गांव वाले शिक्षा स्वच्छता एवं पर्यावरण को महत्व देने लगे। फिर सभी ने मिलकर स्कूल से लगी पथरीली बंजर भूमि पर तार फेंसिंग कर एक सुव्यवस्थित पार्क तैयार किया। जिसमें लगभग 1500 छोटे बड़े पेड़ लगाए। 200 पेड़ों पर शैक्षणिक बोर्ड लगाए, जिन पर विषय एवं मध्य प्रदेश की छोटी-बड़ी जानकारियां लिखी गई। इससे बच्चे खेल खेल में दिन दिन प्रतिदिन शिक्षण गतिविधि करने लगे और उनकी रूचि शिक्षा के प्रति बढ़ने लगी। स्कूल के बच्चों का चयन नवोदय विद्यालय एवं अनुसूचित जनजाति कन्या परिसर के छात्रावास रायसेन में होने लगा।

नीरज के नवाचार ऊपर बनी डॉक्यूमेंट्री, इस्पात मंत्रालय ने बनाया था अपना ब्रांड एंबेसडर

नीरज के नवाचार ऊपर बनी डॉक्यूमेंट्री, इस्पात मंत्रालय ने बनाया था अपना ब्रांड एंबेसडर

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के शिक्षक नीरज सक्सेना के अनूठे प्रयास देश में नजीर बन गए। तमाम विपरीत परिस्थितियों में बच्चों को शिक्षित करने के प्रयासों को देखते हुए इस्पात मंत्रालय ने उन्हें जुलाई 2020 में अपना ब्रांड बनाया। उन पर बनी डॉक्यूमेंट्री भी जारी की गई। मध्य प्रदेश का नाम रोशन करने वाले शिक्षक ने आदिवासी अंचल में जंगल के पास बने सरकारी स्कूल को अपने प्रयासों से निजी स्कूल के समकक्ष खड़ा कर दिया। इसके लिए उनकी देशभर में सराहना भी हुई।

दिल्ली से आई टीम ने देखी नीरज के प्रयासों की सफलता

दिल्ली से आई टीम ने देखी नीरज के प्रयासों की सफलता

शासकीय स्कूल को निजी से भी बेहतर बनाने के प्रयासों की पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही थी केंद्र सरकार के पास मंत्रालय के अधिकारियों को नीरज सक्सेना के विचार भा गए। उन्होंने तत्कालीन रायसेन के कलेक्टर उमाशंकर भार्गव से बात कर शिक्षक और स्कूल पर डॉक्यूमेंट्री बनाने की इच्छा जाहिर की। दिल्ली से आई टीम ने शिक्षा नीरज के प्रयासों को फलीभूत होते हुए यहां देखा। फिर 6 सदस्य टीम ने 1 सप्ताह यहां रुक कर डॉक्यूमेंट्री तैयार की। 21 जुलाई 2020 को मंत्रालय ने जब अपनी फेसबुक सहित अन्य सोशल प्लेटफॉर्म पर इस डॉक्यूमेंट्री को जारी किया, तो नीरज के मजबूत इरादों से देश के विभिन्न हिस्सों के लोग रूबरू हुए।

बैलगाड़ी से किताबें लेकर स्कूल पहुंचे थे शिक्षक नीरज

बैलगाड़ी से किताबें लेकर स्कूल पहुंचे थे शिक्षक नीरज

8 जुलाई 2020 को नीरज सक्सेना उस समय चर्चाओं में आए थे, जब वह 4.5 किलोमीटर लंबे जंगल के रास्ते से स्कूल के विद्यार्थियों के लिए बैलगाड़ी से किताबें लेकर पहुंचे। सोशल मीडिया पर उनके इस प्रयास को लोगों ने बेहद पसंद किया और उनकी सराहना भी की। इसके बाद शिक्षक सक्सेना मध्यप्रदेश में लोगों की चर्चाओं का विषय बन गए।

राष्ट्रपति पुरस्कार से होंगे सम्मानित

राष्ट्रपति पुरस्कार से होंगे सम्मानित

शिक्षा के क्षेत्र में अलग जगाने वाले नीरज सक्सेना को दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू सम्मानित करेंगी मध्य प्रदेश से नीरज सक्सेना के अलावा शाहजहांपुर के ओम प्रकाश पाटीदार को भी इस पुरस्कार के लिए चुना गया है। मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने दोनों के राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयन होने पर शुभकामनाएं और बधाई दी हैं।

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