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सीहोर में पानी के लिए हाहाकार, सैकड़ों परिवार गांव छोड़कर पलायन को मजबूर, CM हाउस पहुंचा ग्रामीणों का गुस्सा

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में भीषण जल संकट ने ग्रामीण जीवन को उजाड़ दिया है। कई गांवों में कुएं, बोरवेल और हैंडपंप सूख चुके हैं। महिलाएं और बच्चे बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि सैकड़ों परिवारों ने घरों पर ताले लगाकर गांव छोड़ दिया है। कुछ शहरों में मजदूरी करने चले गए, तो कुछ दूर-दराज के खेतों में टेंट लगाकर रहने लगे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि मंत्री स्तर तक शिकायत और आदेश पहुंच चुके हैं, लेकिन जिला प्रशासन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारी आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। आज (17 मार्च 2026) किसान व समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में दर्जनों सरपंच, ग्रामीण और महिलाओं ने भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री निवास पर ज्ञापन सौंपा और शीघ्र नलकूप खनन कर पानी की व्यवस्था करने की मांग की।

Water crisis in Sehore district Hundreds of families lock their homes and flee

गांव-गांव में पलायन की तस्वीर

  • ग्राम खमरिया: करीब 80 परिवारों ने पानी के अभाव में गांव छोड़ दिया। घरों पर ताले लटक रहे हैं।
  • ग्राम भरवेली: 40 परिवारों ने पलायन किया। लोग शहर या रिश्तेदारों के यहां शरण ले रहे हैं।
  • ग्राम रायपुर: 30 परिवारों ने पानी के संकट में गांव छोड़ दिया।
  • ग्राम नरेला: 25 परिवार बूंद-बूंद पानी से परेशान होकर पलायन कर चुके हैं।
  • अन्य गांव जैसे ग्राम क्लास कला, जामिनी, पचामा, बडवेली, रोला मानपुर, नया खेड़ा आदि में भी यही हाल है। महिलाएं रोज 3-5 किमी दूर पानी लाने को मजबूर हैं। पशु-पक्षी मर रहे हैं। खेती-बाड़ी ठप है।

ग्रामीणों ने बताया कि पिछले कई महीनों से सूखा है। भूजल स्तर 300-400 फीट नीचे चला गया है। पुराने नलकूप काम नहीं कर रहे। टैंकर से पानी आता है, लेकिन अपर्याप्त और महंगा। मंत्री के आदेश की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं

Water crisis in Sehore district Hundreds of families lock their homes and flee

ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या को लेकर कई बार ज्ञापन दिए गए:

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री (मैडम साहिबा) ने प्रमुख अभियंता लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग भोपाल को निर्देश दिए थे कि उपरोक्त गांवों में शीघ्र नलकूप खनन कराया जाए। प्रमुख अभियंता ने कार्यपालन यंत्री श्री सक्सेना को निर्देश जारी किए।
प्रभारी मंत्री सीहोर जिले की कृष्णा गौर ने भी कलेक्टर सीहोर को सिग्नल करने के निर्देश दिए। लेकिन जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारी इन आदेशों का पालन नहीं कर रहे। ग्रामीणों ने कहा कि मंत्री जी के आदेशों की अनदेखी हो रही है।

मुख्यमंत्री निवास पर ज्ञापन

आज एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में दर्जनों सरपंच, ग्रामीण और महिलाएं भोपाल पहुंचीं। उन्होंने मुख्यमंत्री निवास पर ज्ञापन सौंपा और मांग की:

  • उपरोक्त सभी गांवों में शीघ्र नलकूप खनन कराया जाए।
  • जल संकट से जूझ रहे परिवारों को तत्काल राहत दी जाए।
  • मंत्री और प्रमुख अभियंता के आदेशों का पालन कराया जाए।

मुख्यमंत्री कार्यालय के ओएसडी और प्रमुख सचिव ने दूरभाष पर प्रमुख अभियंता लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से बात की और शीघ्र कार्यवाही के निर्देश दिए। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि अब काम होगा, वरना पलायन और बढ़ेगा।

विशेषज्ञों और ग्रामीणों की चिंता

जल विशेषज्ञों का कहना है कि सीहोर जैसे क्षेत्रों में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। अनियंत्रित बोरिंग और वर्षा जल संचयन की कमी से समस्या बढ़ी है। अगर तुरंत नलकूप खनन और अमृत सरोवर जैसे कार्य नहीं हुए तो बड़े पैमाने पर पलायन होगा। ग्रामीण महिलाओं ने कहा कि पानी के लिए रोज संघर्ष कर रही हैं, लेकिन बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे। पशु मर रहे हैं।

एमएस मेवाड़ा ने कहा कि यह संकट सिर्फ सीहोर का नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में है। सरकार को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। यह पलायन ग्रामीण भारत के जल संकट की चेतावनी है। अगर जल्द राहत नहीं मिली तो हजारों परिवार उजड़ जाएंगे। ग्रामीणों की एकमात्र उम्मीद अब मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से है।

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